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जेएनयू के एक और प्रोफेसर पर लगा छेड़छाड़ का आरोप, पीएचडी छात्रा की शिकायत पर केस दर्ज

आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ छेड़छाड़, धमकी देने, हमला करने जैसी धाराओं में केस दर्ज कराया गया है।

Bhaskar News | Last Modified - Apr 15, 2018, 05:54 AM IST

जेएनयू के एक और प्रोफेसर पर लगा छेड़छाड़ का आरोप, पीएचडी छात्रा की शिकायत पर केस दर्ज

नई दिल्ली.जेएनयू में एक और प्रोफेसर पर छेड़छाड़ करने का आरोप लगा है। छात्रा ने स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में एसोसिएट प्रोफेसर अजय कुमार पर छेड़छाड़, धमकी देने, हमला करने जैसी धाराओं में वसंतकुंज नॉर्थ थाने में केस दर्ज कराया है। छात्रा उन्हीं के अंडर में पीएचडी कर रही है। दक्षिण पश्चिम जिले के डीसीपी मिलिंद डुमरे ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। छात्रा का आरोप के आधार पर प्रोफेसर और विश्वविद्यालय के अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी। सभी तथ्यों की जांच के बाद ही गिरफ्तारी की जाएगी। जेएनयू छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय की इंटर्नल कंप्लेंट कमेटी (आईसीसी) के पास शिकायत दर्ज नहीं कराई है। इसका कारण छात्रों के मन में आईसीसी को लेकर विश्वसनीयता नहीं है।


हाल में लगे प्रोफेसरों पर यौन उत्पीड़न के आरोप
- 15 मार्च की रात को 9 छात्राओं ने जेएनयू के लाइफ साइंसिज के प्रोफेसर अतुल जौहरी के खिलाफ वसंत कुंज नॉर्थ थाने में यौन उत्पीड़न के आरोप में मामला दर्ज कराया था।
- 21 मार्च को दो छात्राओं का आईसीसी को किया शिकायत का मेल वायरल हो गया। दो छात्राओं ने सेंटर फॉर साउथ एशियन स्टडीज के प्रोफेसर महेंद्र पी. लामा और प्रोफेसर राजेश खरत के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी।

ये है इंटर्नल कंप्लेंट कमेटी

- यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (यूजीसी) की तरफ से उच्च शिक्षा संस्थानों में महिला कर्मचारी व छात्राओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निवारण अधिनियम 2015 के तहत इंटर्नल कंप्लेंट कमेटी का गठन किया गया था।

- मानव संसाधन मंत्रालय ने 2 मई 2016 को महिलाओं का कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम 2013 के तहत आईसीसी को अधिसूचित कर दिया था।

- इसके बाद जेएनयू ने साल 2017 में सितंबर महीने में 1999 से चली आ रही जेंडर सेंसिटाइजेशन कमेटी अगेंस्ट सेक्सुअल हैरासमेंट (जीएसकैश) को खत्म करते हुए कैंपस में इंटर्नल कंप्लेंट कमेटी का गठन किया था।

जेएनयू में ऐसे काम करती है आईसीसी
- छात्रों ने बताया कि आईसीसी के पास किसी भी छात्रा व महिला कर्मचारी की यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ से जुड़ी हुई शिकायत सामने आती है और वह किसी पुरुष कर्मचारी व प्रोफेसर के खिलाफ होती है। तब 90 दिनों के अंदर आईसीसी को जांच करते हुए अपनी रिपोर्ट वाइस चांसलर के पास भेजनी होती है।

- इसके बाद वाइस चांसलर से होते हुए एकेडमिक काउंसिल की बैठक में मामले पर चर्चा होती है।

- आईसीसी की रिपोर्ट के अनुसार आरोपी दोषी पाया जाता है तो एकेडमिक काउंसिल दोषी को नौकरी से बर्खास्त भी कर सकती है। बर्खास्तगी नहीं होती है तो दोषी को निलंबित भी करने का अधिकारी एकेडमिक काउंसिल के पास होता है।

खत्म होती आईसीसी की विश्वसनीयता
विश्वविद्यालय की छात्रा खुशबू हड्डा का मानना है कि जेएनयू की आईसीसी के पास यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ के मामले लगातार सामने आते हैं। लेकिन वह सही तरीके से कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। छात्रा भगत सिंह सुथार ने कहा कि आईसीसी को 90 दिनों के अंदर जांच करके रिपोर्ट सब्मिट करनी होती है। लेकिन वह ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। हालांकि कई छात्रों ने शिकायतों को राजनीतिक रूप से प्रेरित भी माना।

सितंबर से अब तक 20 से ज्यादा शिकायतें
छात्रों का कहना है कि आईसीसी में सितंबर से लेकर अप्रैल तक 20 से ज्यादा यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ से जुड़े मामले दर्ज हुए हैं। इन सभी मामलों में जेएनयू गोपनीय ढंग से जांच करता है।

पब्लिक डोमेन में नहीं लाते छात्राओं की शिकायत

जेएनयू प्रशासन ने कहा कि इंटर्नल कंप्लेंट कमेटी के निगरानी क्षेत्र में आने वाली तमाम गतिविधियों की जवाबदेही उन्हीं की होती है। यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ की शिकायतें कमेटी के पास आती हैं। वह इसकी गोपनीय तरीके जांच करते हैं।

कमेटी कार्रवाई नहीं करे तो यहां करें शिकायत

छात्रा व महिला कर्मचारी को पूरी छूट है कि वह संस्था की कमेटी के पास शिकायत दर्ज नहीं कराती है तो वह महिला आयोग व पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकती है।

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