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एक गांव से शुरु हुई अजीम प्रेमजी की कंपनी आज 110 देशों में कर रही कारोबार, दुनिया के सबसे बड़े दानदाताओं में शुमार अजीम जी बिना सिक्युरिटी के चलते हैं, इनके ज्यादातर कर्मचारी की अगली पीढ़ियां अब है करोड़पति

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 03:34 PM IST

किस्सों के जरिए जानिए प्रेमजी की शख्सियत की वे खूबियां जो उन्हें अजीम बनाती हैं... 

Mumbai Maharashtra News in Hindi: Success Story of Azim Premji Wipro
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मुंबई ( महाराष्ट्र)। महाराष्ट्र के जलगांव जिले का अमलनेर कस्बा करोड़पतियों से भरा हुआ है। 2.88 लाख आबादी वाले इस कस्बे में विप्रो कंपनी के करीब तीन प्रतिशत शेयर हैं। मौजूदा बाजार पूंजी देखें तो इनका मूल्य करीब 4,750 करोड़ रुपए है। खास बात यह है कि 1970 के दशक में इनमें से ज्यादातर शेयर कम कीमत पर दिए गए थे। हजारों शेयर तो उपहार में बांटे गए थे। गौरतलब है कि अजीम प्रेमजी के पिता ने विप्रो की शुरुआत इसी गांव में फैक्ट्री लगाकर की थी। हाल ही में एक बार फिर प्रेमजी ने 34% शेयर दान कर दिए हैं। ब्रिटेन की वेबसाइट कम्पेयर द मार्केट के अनुसार दान करने के मामले में वॉरेन बफेट (46.6 अरब डॉलर) और बिल गेट्स (41 अरब डॉलर) के बाद तीसरा नंबर माइकल ब्लूमबर्ग (6 अरब डॉलर) का था। अब 21 अरब डॉलर के साथ प्रेमजी तीसरे नंबर पर आ गए हैं।

इनके ज्यादातर कर्मचारी की अगली पीढ़ियां अब करोड़पति हैं
2013 में प्रेमजी ने अमलनेर फैक्ट्री का दौरा किया था। उन्होंने हर कर्मचारी को खुद इंडक्शन कुकर दिए थे। अमलनेर में रहने वाले सुनील माहेश्वरी बताते हैं कि उस जमाने में सेठजी ने 100 रुपए अंकित मूल्य वाले शेयर कर्मचारियों, व्यापारियों को बांटे थे। करीब 55 से 60 हजार शेयर बांटे गए थे। उस समय के ज्यादातर कर्मचारियों की अगली पीढ़ियां अब करोड़पति हैं। यहां के अरविंद मुथे को तो पता ही नहीं था कि उनके पिता उनके लिए करोड़ों रुपए के शेयर छोड़ गए हैं। उनके दोस्त ने जब उनका नाम विप्रो की एनुअल रिपोर्ट में शेयरहोल्डर्स की सूची में देखा तो उन्हें इसकी जानकारी दी। डागा परिवार में दो भाई और तीन बहनें हैं और उनके पिता विप्रो के कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (बल्ब, साबुन) के एजेंट थे। 1970 के दशक में उनके पास 5 लाख रु. के शेयर थे, जिनकी मौजूदा कीमत 40 करोड़ रुपए के आसपास है। इसके अलावा जो शेयरहोल्डर्स हैं उनमें किसान, किराना दुकान मालिक और सेवानिवृत्त लोग हैं। उस समय कुछ लोगों के लिए 100 रु. जुटा पाना भी मुश्किल था।

अजीम के पिता चावल का कारोबार करते थे

अजीम प्रेमजी के पूर्वज बर्मा में रहते थे और चावल का कारोबार करते थे। फिर किन्हीं कारणों से परिवार भारत में गुजरात के कच्छ आ गया। यहां भी पहले अजीम के पिता एम.एच प्रेमजी ने चावल का कारोबार किया, फिर अंग्रेजों की नीतियों से परेशान होकर उन्होंने वनस्पति घी के कारखाने की शुरुआत की। इस तरह 29 दिसंबर 1945 को वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोडक्ट्स लिमिटेड कंपनी अस्तित्व में आई, जो बाद में विप्रो के नाम से जानी गई। एम.एच. प्रेमजी भारत के बड़े व्यापारी बन चुके थे। इसीलिए बंटवारे के वक्त मोहम्मद अली जिन्ना ने उन्हें पाकिस्तान चलकर वहां का वित्त मंत्री बनने का प्रस्ताव दिया। इसे प्रेमजी ने ठुकरा दिया।

21 साल की उम्र में अजीम को कंपनी संभालनी पड़ी

कारोबार जमने पर अजीम के पिता ने उन्हें पढ़ने के लिए स्टैनफोर्ड भेज दिया। वहां पढ़ाई के दौरान 11 अगस्त 1966 को अजीम प्रेमजी के पास भारत से एक टेलीफोन कॉल आया। उस जमाने में अधिकांश ट्रंक कॉल्स दहलाने वाली खबरें लेकर आती थीं। ऐसा ही हुआ। फोन पर दूसरी तरफ उनकी मां गुलबानू थीं, जिन्होंने उन्हें पिता की मौत की खबर दी। अब कंपनी की जिम्मेदारी अजीम पर आ चुकी थी। यही पिता की आखिरी इच्छा है। अनुभव न होने के बावजूद उन्हें 21 साल की उम्र में कंपनी संभालनी पड़ी।

एक गांव से शुरू इस कंपनी को अजीम ने विदेश तक पहुंचाया

1965 में ही कंपनी की तात्कालिक वास्तविक कीमत लगभग 7 करोड़ रुपए थी। कंपनी उस समय के हिसाब से बड़ी थी लेकिन प्रेमजी ने यहां लगातार नीतियों, तकनीक और उत्पाद के आधार पर तमाम प्रयोग किए और इसे मल्टीनेशनल कंपनी बनाया। भारत से आईबीएम के बाहर जाने के बाद विप्रो ने 1980 में आईटी बिजनेस में कदम रखा। 1960 के दशक में जिस विप्रो ग्रुप का रेवेन्यू 20 लाख डॉलर (अब करीब 14 करोड़ रुपए) था, उसने 2017-18 में रेवेन्यू के मामले में 54,635 करोड़ रुपए का आंकड़ा छू लिया था। यानी 6 दशक में रेवेन्यू 3,900 गुना बढ़ा है। विप्रो अब 1.58 लाख करोड़ के मार्केट कैप वाली कंपनी बन चुकी है।

अपनी मां से प्रेरित होकर अजीम दान यात्रा 2001 में शुरू की थी

अपनी मां के चैरिटेबल हॉस्पिटल के लिए किए गए कार्यों से प्रेरित होकर अजीम प्रेमजी ने अपनी दान यात्रा 2001 में शुरू की। उन्होंने 875 करोड़ रुपए के शुरुआती दान के साथ 'द अजीम प्रेमजी फाउंडेशन' की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने इसके लिए 280 अरब रुपए और दान किए। और अब उन्होंने विप्रो में उनके 34 फीसदी शेयर्स को भी फाउंडेशन के लिए दान करने की घोषणा की है। यानी वे अब तक 67 फीसदी शेयर्स से होने वाली कमाई दान करने का वादा कर चुके हैं। इससे अजीम और उनके परिवार के पास अब विप्रो के शेयर्स में केवल 7 फीसदी की हिस्सेदारी बचेगी।

इतने लोग हैं अजीम के परिवार में...
अजीम के परिवार में उनकी बीवी यास्मीन और दो बेटे तारिक प्रेमजी और राशिद प्रेमजी और बहु अदिती प्रेमजी हैं। रिशाद जहां विप्रो के चीफ स्ट्रैटजी ऑफिसर हैं वहीं तारिक पिछले साल ही िवप्रो एंटरप्राइजेस के बोर्ड में शामिल हुए हैं।
स्रोत: अजीम प्रेमजी पर लिखी गई किताब 'परोपकारी बिजनेेमसैन अजीम प्रेमजी', प्रेमजी के इंटरव्यूज और अमलनेर गांव से रिपार्ट पर आधारित।

1. सादगी: पार्किंग सबकी है, अगर मुझे चाहिए तो ऑफिस पहले आना होगा
एक बार विप्रो के एक कर्मचारी ने कार वहां पार्क कर दी जहां अजीम अपनी कार खड़ी करते थे। अधिकारियों को पता चला तो सुर्कुलर जारी किया गया कि कोई भी भविष्य में उस जगह पर गाड़ी खड़ी न करे। प्रेमजी ने जब यह देखा तो सर्कुलर का जवाब भेजा। उन्होंने लिखा 'कोई भी खाली जगह पर वाहन खड़े कर सकता है। यदि मुझे वही जगह चाहिए तो मुझे दूसरों से पहले ऑफिस आना होगा।'

- अजीम कंपनी के काम से बाहर जाते हैं तो हमेशा ऑफिस गेस्ट हाउस में ही रुकते हैं। वे इकोनॉमी क्लास में सफर करते हैं। एयरपोर्ट आने-जाने के लिए टैक्सी न मिले तो ऑटो से भी चले जाते हैं।


2. जमीनी: इंटरव्यू लेने के लिए खुद सुबह 7 बजे पहुंचकर ऑफिस खोला
विप्रो की डब्ल्यूईपी सॉल्यूशन्स के एमडी राम नारायण अग्रवाल 1977 में विप्रो से जुड़े। जब वे सुबह सात बजे इंटरव्यू के लिए पहुंचे तो एक युवक आया और ऑफिस खोलने लगा। उन्हें लगा कि ये ऑफिस एडमिनिस्ट्रेशन का व्यक्ति है। युवक उन्हें रिसेप्शन पर बैठाकर अंदर चला गया। थोड़ी देर बाद इंटरव्यू के लिए बुलाते हुए उसी युवक ने अपना परिचय दिया, 'मैं प्रेमजी हूं।' इंटरव्यू 12 घंटे चला।

- प्रेमजी को पता चला कि अमलनेर की गर्मी में दिनभर खड़े रहना मुश्किल होता है इसलिए उत्पादन गिर रहा है। समस्या समझने के लिए वे तीन महीमे अमलनेर झुलसती गर्मी मे रहे और समाधान किया।

3. ईमानदारी: बिजली के लिए रिश्वत मांगी गई तो बोले हम खुद बना लेंगे बिजली
1987 में विप्रो ने अपने तुमकूर (कर्नाटक) कारखाने के लिए बिजली कनेक्शन का आवेदन किया। कर्मचारी ने इसके लिए एक लाख रुपए रिश्वत मांगी। प्रेमजी ने रिश्वत देने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा, नियम से सप्लाई नहीं मिलेगी तो हम अपनी बिजली बना लेंगे। विप्रो ने जेनरेटर से काम चलाया, जिससे 1.5 करोड़ रु. का नुकसान हुआ।

- प्रेमजी जब विप्रो के चेयरमैन बने तो 21 साल के थे। उनकी कंपनी के एक शेयरधारक करन वाडिया ने शेयरधारकों की मीटिंग में उनकी कम उम्र को मुद्दा न बनाने के एवज में अप्रत्यक्ष रूप से रिश्वत मांगी। लेकिन प्रेमजी कभी उसके सामने नहीं झुके।


4. परोपकारी: मां को हॉस्पिटल में काम करता देख मिली चैरिटी की प्रेरणा
एक बार उनकी मां के हॉस्पिटल के कर्मचारी वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर एंट्रेंस गेट पर ही धरने पर बैठ गए। उनकी मां ढेर सारे सफेद कागज लेकर आईं और उस जगह को पूरी तरह ढंक दिया। ताकि अस्पताल में काम चलता रहे। प्रेमजी कहते हैं कि यह घटना उन्हें हमेशा याद रही और मां से ही उन्हें सेवा और चैरिटी की प्रेरणा मिली।

- विप्रो कंपनी शुरू होने के दूसरे ही वर्ष में पब्लिक लिमिटेड बन गई थी। उस समय अजीम प्रेमजी के पिता ने ग्रामीणों को उपहारस्वरूप शेयर बांटे थे। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अजीम प्रेमजी ने 70 के दशक में गांव वालों को विप्रो के शेयर दिए थे।
विप्रो के शुरुआती दिनों की इंटरनल मीटिंग में अजीम प्रेमजी।

74 साल पुरानी कंपनी आज 110 देशों में कारोबार कर रही
वर्ष 1945 में जब कंपनी की स्थापना हुई तो इसका नाम वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोडक्ट्स लिमिटेड था। बाद में जब कंपनी दूसरे उत्पाद भी बनाने लगी तो इससे वेजिटेबल शब्द को हटा दिया गया। बाद में जब प्रेमजी ने कंपनी संभाली तो उन्हें छोटा नाम चाहिए था इसलिए उन्होंने वेस्टर्न से डब्ल्यू, इंडिया से आई और उत्पाद से प्रो शब्दों का चयन किया और इसका नया नाम विप्रो रखा।

2017-18 में विप्रो ग्रुप के पूरे बिजनेस का 96.7% आईटी सेगमेंट से आया था। 2000 में न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में इसकी लिस्टिंग हुई। फरवरी 2002 में आईएसओ 14001 सर्टिफिकेशन वाली भारत की पहली सॉफ्टवेयर कंपनी बनी। ग्रुप आईटी के अलावा पर्सनल केयर, हेल्थकेयर, लाइटिंग, फार्मा बिजनेस में है।

विप्रो के दो लोगो की कहानी
- 1996 में बने विप्रो के लोगो में सूरजमुखी फूल दिखा जो उसके खाद्य व्यापार को दर्शाता था। 2017 में आए लोगो को आईटी क्षेत्र में पहुंच को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया।

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