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सबरीमाला के बाद मस्जिदों में प्रवेश के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची महिला, केंद्र को नोटिस

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 07:20 AM IST

New-delhi News - सबरीमाला मंदिर की तर्ज पर मुस्लिम महिलाओं को भी देशभर की मस्जिदाें में जाकर नमाज पढ़ने देने की मांग पर सुप्रीम...

New Delhi News - notice to the woman who reached the supreme court to enter mosques after sabarimala
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सबरीमाला मंदिर की तर्ज पर मुस्लिम महिलाओं को भी देशभर की मस्जिदाें में जाकर नमाज पढ़ने देने की मांग पर सुप्रीम काेर्ट ने मंगलवार काे केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। केंद्र के अलावा राष्ट्रीय महिला आयोग, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और वक्फ बोर्ड से भी 4 सप्ताह में जवाब मांगा है। काेर्ट ने कहा कि सिर्फ सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम काेर्ट के फैसले की वजह से ही इस मांग पर सुनवाई की जा रही है। महाराष्ट्र के दंपती यास्मीन और जुबेर अहमद पीरजादा ने इसी फैसले के अाधार पर याचिका दायर कर मांग की है कि महिलाअाें काे मस्जिदों में नमाज पढ़ने की इजाजत दी जाए। याचिका के अनुसार भारत में जमात-ए-इस्लामी के तहत अाती मस्जिदों में महिलाएं प्रवेश कर सकती हैं। लेकिन सुन्नी अाैर अन्य पंथों की मस्जिदों में पाबंदी है।

सुप्रीम काेर्ट लाइव... मस्जिदों में महिलाओं को नमाज पढ़ने की इजाजत न देना समानता केे अधिकारों का हनन है: याचिकाकर्ता की दलील

जस्टिस एसए बोबडे और अब्दुल नजीर की बेंच के सामने याचिकाकर्ता के वकील आशुुतोष दुबे थे...

अाशुताेष: महिलाओं को मस्जिद में नमाज की इजाजत नहीं है। यह समानता के अधिकार का हनन है। सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की इजाजत दी थी।

जस्टिस एसए बोबडे: आपने मांग के लिए सिर्फ सबरीमाला काे ही अाधार बताया है। क्या समानता का अधिकार नॉन स्टेट एक्टर यानी सरकार के इतर लोगों से भी ले सकते हैं?

अाशुताेष: नहीं। लेकिन महिलाओं को मस्जिद में रोका जाता है। पुलिस भी नमाज पढ़ने में मदद नहीं करती।

जस्टिस अब्दुल नजीर: हाजी अली दरगाह में तो महिलाएं जा सकती हैं।

अाशुताेष: वहां इजाजत है, लेकिन बहुत सी मस्जिदों में पाबंदी है।

जस्टिस नजीर: क्या मक्का-मदीना में महिला नमाज पढ़ सकती हैं?

अाशुताेष: महिलाअाें काे मक्का की एक मस्जिद में प्रवेश की इजाजत है। कनाडा में भी इजाजत दी गई है।

जस्टिस बोबडे: मंदिर-मस्जिद थर्ड पार्टी की हैं। सरकार कहां से आ गई?

अाशुताेष: भले ही मंदिर-मस्जिद सरकार के नहीं होते, लेकिन महिलाओं को इनमें जाने से नहीं राेकना चाहिए।

जस्टिस नजीर: अगर काेई आपके घर में आना चाहे तो आपकी अनुमति जरूरी है। क्या कोई पुलिस की मदद से आपके घर में घुस सकता है?

जस्टिस बोबडे: मस्जिद में मौजूद व्यक्ति नहीं चाहता कि महिला वहां प्रवेश करें तो क्या आप प्रदर्शन करेंगे? अनुच्छेद 21 के तहत समानता का मौलिक अधिकार सिर्फ सरकार से मांग सकते हैं, नॉन स्टेट एक्टर से नहीं।

अाशुताेष: भारत में मस्जिदें सरकाराें से अनुदान अाैर अन्य लाभ प्राप्त करती रहती हैं।

इसके बाद कोर्ट ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर दिया।

भास्कर नाॅलेज
Ãइस्लाम की पहली मस्जिद काबा में भी महिलाएं नमाज पढ़ती हैं। सबसे कट्‌टर माने जाने वाले सऊदी अरब में मस्जिदों से लेकर मॉल तक में महिलाओं की नमाज होती है। मलेशिया, इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम देशों की अधिकांश मस्जिदों में औरतों के लिए अलग से नमाज होती है। मदीना शहर में स्थित मस्जिद-ए-नबवी को पैगंबर माेहम्मद की मस्जिद कहा जाता है। यहां पर भी औरतों की एंट्री है और वे नमाज पढ़ सकती हैं।’ जीनत शौकत अली, डायरेक्टर जनरल, वर्ल्ड इंस्टीट्यूट ऑफ इस्लामिक स्टडीज फॉर डायलॉग, पीस एंड जेंडर जस्टिस

यास्मीन और जुबेर बिजनेसमैन हैं।

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