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नेचुरल कॉल को लेकर सरकार के सवाल पर विमान कंपनियों ने कहा- पायलट डायपर पहनकर उड़ाएगा राफेल

केंद्र सरकार को वायुसेना के लिए 110 लड़ाकू विमान खरीदने हैं।

Danik Bhaskar | Jul 12, 2018, 06:53 PM IST

- सरकार ने पूछा था- फ्लाइट में पायलट रिलीव होना चाहे तो इसके लिए कॉकपिट में क्या इंतजाम होगा?

- फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदेगा भारत

नई दिल्ली. केंद्र सरकार को वायुसेना के लिए 110 लड़ाकू विमान खरीदने हैं। इन विमानों की खरीदी से पहले भारत ने अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से एक दिलचस्प सवाल किया है। वायुसेना ने विमान कंपनियों से पूछा है कि फ्लाइट के दौरान यदि पायलट रिलीव होना चाहेगा तो इसके लिए कॉकपिट में क्या इंतजाम होगा? क्या इस अपशिष्ट को ऑनबोर्ड रखने के लिए विशेष प्रबंध होंगे? जवाब में पता चला कि पायलट डायपर पहनकर विमान में उड़ान भरेंगे। वायुसेना अधिकारियों ने बताया कि फ्रांस से खरीदे जा रहे 36 राफेल विमानों के पायलट डायपर पहनकर उड़ान भरेंगे। राफेल लगातार 10 से 12 घंटे हवा में रह सकता है।

फ्रांस ने हाल के समय में ऐसे कई मिशन किए हैं, जिनमें राफेल ने लंबी उड़ान भरी है। ऐसे में स्वाभाविक है कि पायलट के लिए नेचुरल कॉल के इंतजाम रखने होंगे। नए विमानों को मेक इन इंडिया के तहत बनाए जाने के लिए जारी की गई रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन(आरएफआई) में वायुसेना ने कई जरूरतें गिनाई हैं। इसकी 20वीं रिक्वायरमेंट कॉकपिट की सुविधाओं को लेकर ही है। वायुसेना अधिकारियों ने बताया कि फाइटर फ्लाइंग बहुत डिमांडिंग हो चली है और कॉकपिट का सुविधाजनक होना आवश्यक है। ओवरऑल कहलाने वाली पायलट की वर्दी, सिर पर हेलमेट और नाक और मुंह पर कसे ऑक्सीजन की नली से जकड़े पायलट के लिए फाइटर की उड़ान काफी कठिन होती है। ऐसे में उड़ान का समय बढ़ने से कुदरती जरूरतों के लिए विशेष इंतजाम होना आवश्यक हो गया है।

कम फाइटर विमानों में ही ऐसी सुविधा की जरूरत होती है: वायुसेना के फाइटर बेड़े में सुखोई, मिग सीरीज के विमान, जगुआर, मिराज और स्वदेशी तेजस शामिल हैं। मिग सीरीज के विमान तीन-चार घंटे ही उड़ान में रहते हैं। तेजस एक घंटे तक हवा में रहता है। लिहाजा इन विमानों की उड़ान के लिए पायलटों को कॉकपिट में नेचर कॉल संबंधी सुविधा की जरूरत नहीं है। सुखोई लंबी दूरी की उड़ानों के लिए है और इसके पायलट एक विशेष आकार के कवर पहनकर बैठ सकते हैं। इस कवर में एक हौज पाइप जुड़ा होता है और सक्शन के जरिए यूरिन का डिस्पोजल हो जाता है। लेकिन यह इंतजाम बेहद झंझट वाला होता है।

यह भी पूछा-जेट में ऑक्सीजन पैदा करने के लिए क्या इंतजाम होंगे: सरकार ने विमान कंपनियों से यह भी पूछा है कि उनके जेट में ऑक्सीजन पैदा करने के लिए क्या इंतजाम होंगे। यह ऑनबोर्ड ऑक्सीजन जनरेटिंग सिस्टम कितने घंटे के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन पैदा कर सकेगा। विमान की सेफ रिकवरी के लिए ऑक्सीजन के स्टैंडबाई इंतजाम क्या होंगे? इमरजेंसी में पायलट की जान बचाने के लिए एस्केप सिस्टम को भी सरकार चाक-चौबंद रखना चाहती है। इसके लिए वायुसेना ने पूछा है कि विमान में किस तरह की इजेक्शन सीट होगी। क्या यह जीरो-जीरो कंडीशन में इजेक्शन कर पाएगी। जीरो स्पीड-जीरो हाइट को जीरो-जीरो कंडीशन कहते हैं।

..तो और क्या तरीके हैं? डायपर के अलावा पिडल पैक की भी व्यवस्था रहती है। विशेष प्लास्टिक की इस थैली में एक पाउडर भरा होता है। इसमें यूरीन जाने पर पाउडर से जैली बन जाती है, जिसे सुरक्षित कॉकपिट में रखा जा सकता है। इस व्यवस्था को भी पायलट प्राथमिकता देते हैं। पायलट पीने के लिए पानी, फ्रूट जूस और खाने के लिए न्यूट्री बार अपने साथ ले जाने लगे हैं। मौका मिलते ही हेलमेट मास्क उतारकर पानी गटकना और न्यूट्री बार खा लेना उन्होंने सीख लिया है।