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बदरंग होते ताजमहल की परवाह है, संरक्षण के लिए क्या विदेशी एक्सपर्ट बुलाएं: केंद्र से सुप्रीम कोर्ट

प्रदूषण की वजह से ताजमहल के बदरंग होने पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई और जवाब मांगा है।

Bhaskar News | Last Modified - May 02, 2018, 10:16 AM IST

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    सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या आपको बदरंग होते ताजमहल की परवाह है ? (फाइल)

    • याचिकाकर्ता ने कहा- एएसआई की लापरवाही से ताज को हो रहा नुकसान
    • केंद्र ने कहा- एएसआई के साथ विशेषज्ञों से ताजमहल की जांच करवाएंगे

    नई दिल्ली. प्रदूषण की वजह से ताजमहल बदरंग होने पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने पूछा, “क्या आपको बदरंग होते ताजमहल की कोई चिंता है? क्या इसके संरक्षण के लिए हमें विदेशी एक्सपर्ट की मदद लेनी होगी।’ कोर्ट ने केंद्र और एएसआई को निर्देश दिया है कि ताजमहल की विशेषज्ञों से जांच करवाकर रिपोर्ट सौंपें। अगली सुनवाई 9 मई को होगी।

    एएसआई की लापरवाही से नुकसान हो रहा है: याचिकाकर्ता
    - दरअसल, ताजमहल को प्रदूषण और जहरीली गैसों से बचाने की मांग से जुड़ी याचिका पर जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की बेंच सुनवाई कर रही है।

    - याचिकाकर्ता ने कहा कि भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (एएसआई) की लापरवाही से ताज को नुकसान हो रहा है। फोटो दिखाकर उन्होंने कहा कि पहले ताजमहल का रंग पीला पड़ा और अब यह भूरा और हरा हो रहा है। फोटो देखकर जस्टिस लोकुर ने केंद्र की ओर से पेश एएसजी एएनएस नाडकर्णी से पूछा कि ताजमहल का रंग क्यों बदल रहा है?

    - उन्होंने कहा कि इमारत का प्रबंधन और संरक्षण एएसआई का जिम्मा है। इस पर नाराजगी जताते हुए जस्टिस लोकुर ने कहा कि आपको बदरंग ताजमहल की परवाह है या इसके लिए हमें विदेशी एक्सपर्ट की मदद लेनी होगी?

    - केंद्र ने कहा कि वह एएसआई के साथ विशेषज्ञों से ताजमहल की जांच करवाएंगे। इस पर जस्टिस लोकुर ने कहा कि हमें नहीं पता कि आपके पास एक्सपर्ट हैं या नहीं? अगर हैं भी तो आप उनका इस्तेमाल नहीं कर रहे। जस्टिस लोकुर ने केंद्र और एएसआई को निर्देश दिया कि ताजमहल की सुंदरता बहाल करने के लिए उचित कदम उठाएं। प्रदूषण से हो रहे नुकसान के आंकलन और बचाव के उपाय खोजने के लिए विशेषज्ञों से जांच करवाएं।

    यूपी सरकार ने पाइपलाइन बिछाने की अनुमति मांगी

    - यूपी जल निगम ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर ताज कॉरिडोर के संरक्षित क्षेत्र में दो किलोमीटर तक खुदाई कर पानी की पाइपलाइन बिछाने की अनुमति मांगी। याचिकाकर्ता एमसी मेहता ने इस पर आपत्ति जताई है। इस अर्जी पर बुधवार को सुनवाई होगी।

    यूपी वक्फ बोर्ड ने किया था दावा

    - अप्रैल में ताज महल पर मालिकाना हक जताते हुए उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया था कि खुद मुगल बादशाह शाहजहां ने बोर्ड के पक्ष में इसका वक्फनामा किया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सबूत के तौर पर शाहजहां के दस्तखत वाले दस्तावेज दिखाने को कहा। ताज महल पर हक को लेकर सुन्नी वक्फ बोर्ड और एएसआई के बीच विवाद चल रहा है।

    कोर्ट ने कहा- कौन यकीन करेगा कि ताज महल वक्फ बोर्ड का?
    - कोर्ट ने कहा कि मुगलकाल का अंत होने के साथ ही ताज महल समेत अन्य ऐतिहासिक इमारतें अंग्रेजों को हस्तांतरित हो गई थी। आजादी के बाद से यह स्मारक सरकार के पास है और एएसआई इसकी देखभाल कर रहा है।
    - चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने कहा, "भारत में कौन यकीन करेगा कि ताज महल वक्फ बोर्ड का है? ऐसे मसलों पर सुप्रीम कोर्ट का वक्त बर्बाद नहीं करना चाहिए।"

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    प्रदूषण की वजह से ताजमहल बदरंग होने पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को लगाई कड़ी फटकार, मांगा जवाब, अगली सुनवाई 9 मई को। (फाइल)
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