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खुद 62 साल में भी स्वस्थ, कभी अस्पताल भी नहीं गईं, लोगों को मरते देखा तो अपने ही गांव में मंजूर करवाया 100 बेड का अस्पताल

अन्ना से प्रेरित हो शुरू किया था संघर्ष, 2017 में जनहित याचिका डाली तो 2018 में केंद्र की आंखें खुली

Danik Bhaskar | May 14, 2018, 06:36 AM IST
भास्कर जब परमेश्वरी देवी के घर पहुंचा तो वह घरेलू कार्यों में व्यस्त थीं। भास्कर जब परमेश्वरी देवी के घर पहुंचा तो वह घरेलू कार्यों में व्यस्त थीं।

नई दिल्ली. यह खबर है नजफगढ़ गांव में रहने वाली 62 वर्षीय परमेश्वरी देवी की। आम घरेलू महिला जो अपने घर में चूल्हा-चौका करती हैं, जिसने कभी सोचा भी नहीं था कि वह किसी दिन दिल्ली सचिवालय या हाईकोर्ट जाएंगी। लेकिन इलाके में एकमात्र जाफरपुर के रावतुला अस्पताल के होने से बीमार लोगों को होने वाली परेशानियों ने उन्हें झकझोर दिया।

परमेश्वरी के सात साल के संघर्ष के बाद अब केंद्र सरकार नजफगढ़ में 100 बेड का अस्पताल बनवाने जा रही है। 1 मई को इसकी घोषणा भी हो चुकी है। सरकार ने यह निर्णय परमेश्वरी द्वारा हाईकोर्ट में चल रही एक जनहित याचिका के चलते लिया है। परमेश्वरी बताती हैं कि उन्हें कोई बीमारी नहीं है, वह जो खुद तो एकदम स्वस्थ हैं लेकिन आसपास इलाकों की लोगों की समस्या के चलते उन्होंने यह संघर्ष किया है।

2011 से अब तक ऐसे किया संघर्ष

- 2011 में जंतर-मंतर पर अन्ना आंदोलन देखकर इलाके की अस्पताल की समस्या के लिए कुछ करने की इच्छा हुई। फिर 2011 से 2013 तक तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के चक्कर काटती रहीं।
- 2014 में विधानसभा चुनाव हुए लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला, जबकि अस्पताल सभी पार्टिंयों का मुद्दा था।
- 2015 और 2016 में पहले दिल्ली सचिवालय, एलजी कार्यालय फिर केंद्र सरकार को शिकायत की।
- 2017 में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की।
- 2018 जनहित याचिका पर जवाब मांगने के बाद केंद्र सरकार ने नजफगढ़ में 100 बेड का अस्पताल बनाने की घोषणा की, अब जुलाई में याचिका पर सुनवाई है।

4 केस जिन्होंने परमेश्वरी देवी को झकझोर दिया

- 26 जुलाई 2017 | नजफगढ़ में रेस्त्रां में कूलर की हवा अपनी तरफ करने को लेकर पांच युवकों और पिता-पुत्र में झगड़ा हो गया। युवकों ने पहले बेटे मयंक और फिर बचाने आए पिता को कई गोलियां मार दीं। पिता ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मयंक को किसी तरह अस्पताल पहुंचा गया। पुलिस केस होने के चलते उसे भर्ती नहीं किया गया। जब तक उसे किसी सरकारी अस्पताल ले जाते, उसकी मौत हो गई।
- 2012 | झटीकरा निवासी त्रिलोक पहले रावतुला राम गया। वहां इलाज नहीं मिला तो एलएनजेपी गया। लेकिन अस्पताल के लिए डीटीसी बस से उतरते समय तबीयत अधिक बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया।
- मार्च 2016 | नजफगढ़ निवासी रमेशदेवी की बहू गर्भवती थी। समीप के रावतुला राम अस्पताल ने 9 महीने में जवाब दे दिया। किसी तरह 50 किमी दूर डीडीयू अस्पताल में इलाज कराया और जच्चा-बच्चा की जान बचाई।
- नजफगढ़ की उमा जाखड़ को शरीर में दर्द की समस्या हुई। रावतुला राम में इलाज नहीं मिला तो 35 किमी दूर एम्स में इलाज करा रही हैं।

दिल्ली में छठा अस्पताल होगा

- एम्स, आरएमएल, लेडी हार्डिंग, कलावती सरन, सफदरजंग के बाद केंद्र सरकार का दिल्ली में छठा अस्पताल होगा।
- अस्पताल में 100 बेड होंगे, 95 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा और वर्ष 2020 तक निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।
- 4 प्रमुख डिपार्टमेंट पीडियाट्रिक्स गायनकोलॉजी, मेडिसिन, सर्जरी होंगे। डेंटल, ईएनटी की ओपीडी, ब्लड बैंक व जांच की सुविधा होगी।

30 मिनट में पिज्जा डिलिवरी तो एंबुलेंस क्यों नहीं

हाईकोर्ट के वकील अभिषेक कुमार चौधरी ने परमेश्वरी का केस निशुल्क लड़ा है। उन्होंने कोर्ट में तर्क रखा कि देश में 30 मिनट में पिज्जा डिलिवरी हो रही, लेकिन इतने समय में एंबुलेंस पहुंच जाए ऐसा क्यों नहीं। प्राइवेट हॉस्पिटल खड़ी टैक्सी की तरह हैं, जिसका मीटर दौड़ता रहता है, आप डॉक्टरों की लिखाई पढ़ नहीं सकते लेकिन उनके बिल साफ देख सकते हैं।

अभी ऐसे हैं हालात

इलाके के एकमात्र रावतुला राम अस्पताल की रोजाना की ओपीडी 1500 है। अस्पताल में सुविधाओं का टोटा है। टायफाइड, हाथ-पैर दर्द जैसी मामूली बीमारियों के लिए 28 किमी दूर हरिनगर के दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। यहां आईसीयू नहीं है, सड़क दुर्घटना में ट्रामा की सुविधा नहीं, दोपहर दो बजे बाद महिला रोग विशेषज्ञ नहीं होते। दिल्ली देहात में 20 विधानसभा हैं, जहां 15 लाख की आबादी है। देहात के बवाना, नरेला, नजफगढ़ आदि इलाकों में नजफगढ़ अस्पताल से लाभ होगा।

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