संकरी गली में बनी फैक्ट्री में 200 मजदूर कर रहे काम, पास की बिल्डिंग पर कूद कर बचाई जान

New-delhi News - हर बार की तरह इस बार भी दिल्ली में फैक्ट्री में आग लगी और 3 लोगों की जान अव्यवस्था की भेट चढ़ गईं। झिलमिल इलाके में नल...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:20 AM IST
New Delhi News - work on 200 workers working in a narrow street factory jumping on nearby buildings to save lives
हर बार की तरह इस बार भी दिल्ली में फैक्ट्री में आग लगी और 3 लोगों की जान अव्यवस्था की भेट चढ़ गईं। झिलमिल इलाके में नल की टोंटी बनाने वाली कंपनी में आग लगी और पलक झपकते ही ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गई। जिस वक्त आग लगी कर्मचारी फैक्ट्री में काम कर रहे थे। दमकल विभाग की 26 गाड़ियां मौके पर पहुंच कर फैक्ट्री के अंदर से कई लोगो को निकाला। शाम तक फैक्ट्री में कूलिंग का काम व सर्च ऑपरेशन जारी था। पुलिस ने मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर जीटीबी अस्पताल की मोर्चरी भेज दिया है। जीटीबी एन्क्लेव थाना पुलिस लापरवाही से मौत का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच कर रही है। डीसीपी मेघना यादव ने बताया कि हादसा झिलमिल इंडस्ट्रियल एरिया के फ्रेंड्स कालोनी स्थित गली नंबर-4 में हुआ। यहां कोरसा बॉथ के नाम से प्लास्टिक व पीतल के नल बनाने की फैक्ट्री है। इमारत में बेेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर के अलावा तीन मंजिलें है। एक मंजिल पर तार बनाने का भी काम होता है। बाकी पर नल बनाने के अलावा उसकी पैकिंग का काम होता है। यहां 200 मजदूर काम करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं की है। फैक्ट्री चौहान बांगर निवासी नईम, वसीम, अदनान और शानू 4 भाईयों की है। फैक्ट्री का सामने का हिस्सा काफी संकरा है। फैक्ट्री की गहराई 60 से 70 फुट के बीच है। फैक्ट्री तीनों साइड से कवर है। सुबह करीब 9.10 बजे ग्राउंड फ्लोर पर मीटर के पैनल में आग लग गई। देखते ही देखते आग लिफ्ट के सहारे ऊपर की मंजिलों तक पहुंच गई।

तीनों तरफ से पैक थी फैक्ट्री, आग से निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता था खाली

लोगों ने बराबर वाली फैक्ट्री में कूदकर अपनी बचाई जान

आग लगने से बिल्डिंग में धुंआ भरा तो वहां अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में लोग बिल्डिंग से निकलकर बाहर भागे। इस बीच कुछ लोग ऊपर की मंजिलों पर फंस गए। कुछ लोगों ने दूसरी मंजिल से बराबर वाली फैक्ट्री में कूदकर अपनी जान बचाई। जबकि कुछ लोग फैक्ट्री छत पर चले गए, वहां से साथ वाली फैक्ट्री में कूदकर नीचे आए। वहीं सूचना के बाद 9.25 बजे स्थानीय पुलिस के अलावा दमकल विभाग की गाडिय़ां मौके पर पहुंच गईं

फैक्ट्री में लापरवाही से हो रहा था काम, नियमों की हो रही थी भारी अनदेखी

तीनों ओर से बंद फैक्ट्री में मजदूरों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा था। औद्योगिक क्षेत्र एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारी ने बताया जिस गली में फैक्टरी है, वहां 70 बाई 54 के प्लॉट हैं। सभी प्लॉट टू-साइड ओपन हैं। लेकिन प्लॉट को पहले ही 2 हिस्सों में 18 बाई 70 में बांटकर अलग-अलग फैक्ट्री बनाई थी। जिस फैक्ट्री में हादसा हुआ, पीछे की 10 फुट जगह को बेच दूसरी गली में एक अलग फैक्ट्री लगी थी। ऐसे में नल की यह फैक्ट्री तीन ओर से पूरी तरह पैक थी। फैक्ट्री में सामने की ओर से हवा आने-जाने का रास्ता था। आग लगने पर यह रास्ता बंद हो गया और मजदूर अंदर फंस गए। दूसरी ओर बिल्डिंग में आग से बचाव के लिए भी कोई खास इंतजाम नहीं थे। इसके अलावा बड़ी संख्या में मजदूरों से यहां काम करवाया जा रहा था।

लिफ्ट के पैनल से ऊपरी मंजिलों में पहुंची थी आग

शनिवार सुबह करीब 9.10 बजे ग्राउंड फ्लोर पर मीटर में आग लगी थी। आग लिफ्ट के पैनल के सहारे ऊपर की मंजिलों तक पहुंच गई। बिल्डिंग में धुंआ भरा तो वहां अफरा-तफरी मच गई। हादसे के दौरान करीब 30-35 मजदूर ऊपर की मंजिलों पर फंस गए। फैक्ट्री महिला कर्मचारी शकीला ने बताया कि हादसे के दौरान वह फैक्ट्री में थी। फैक्ट्री में धुंआ भरने से वह नीचे की तरफ भागी।

शोएब अम्मी को मिलवाने वाला था अपनी पसंद की लड़की से

धर्मेंद्र डागर | नई दिल्ली. मृतक शोएब अली (19) फैक्ट्री में सामान की बिल्टी बनाने का काम करता था। शोएब अली को काम की इतनी अधिक धुन थी कि वह शनिवार को जल्दी फैक्ट्री पहुंच गया था। घर से निकलने से पहले अम्मी से बोला था कि आज काम ज्यादा है, शाम में आकर बताऊंगा मन की बात। उसके एक पड़ोसी ने बताया कि शोएब पिछले कई महीनों से एक लड़की को पसंद करता था। रात एक शादी में उससे मिला था। शोएब शायद अपनी पसंद की लड़की की बात शाम को अम्मी को बताने वाला था, जो वह नहीं बता सका। शोएब परिवार के साथ गली नंबर-19 ब्रह्मपुरी में रहता था। पिता वाहिद अली, मां फातिमा बेगम और एक बहन साबिहा है। दरअसल फैक्ट्री का एक मालिक वसीम की शादी शोएब की गली में ही हुई थी। डेढ़ साल पहले शोएब को उसी वजह से नौकरी मिली। हादसे के बाद परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है। परिवार में इकलौते बेटे के गम में रोते, छाती पिटते हुए अम्मी फातिमा बेगम ने बताया कि बेटा शोएब ने बोला था कि मोबाइल खराब हो गया है, नया दिलवा दो। उसे एक महीने पहले ही 10 हजार रुपए का नया मोबाइल किस्तों पर दिलाया था। मोबाइल आने के बाद वह बहुत ही खुश रहता था।

फोन के लालच ने ली संगीता की जान

फैक्ट्री में काम करने वाली महिला शकीला ने बताया कि शार्ट-सर्किट के बाद सभी मंजिलों में धुंआ फैल गया। संगीता दूसरी मंजिल पर थी। धुंआ देख वह सीढिय़ों से नीचे की ओर भागी। बीच में याद आया कि उसका मोबाइल रहा गया है। वह तुरंत ही मोबाइल लेने ऊपर भागी। तब तक धुंआ इतना अधिक हो गया कि वह दूसरी मंजिल पर फंस गई और दम घुटने से उसकी मौत हो गई। संगीता परिवार के साथ फेज-2, गली नंबर-11, कृष्णा विहार, मंडोली में रहती थी। परिवार में पति श्रवण कुमार, 2 बेटे व बेटी है। संगीता पिछले 10 साल से यहां मजदूरी करती थी। वहीं तीसरी मृतक मंजू गली नंबर-2 लोनी, गाजियाबाद में रहती थीं। परिवार में पति सीताराम, 2 बेटे व 3 बेटियां हैं। मंजू पिछले 8 सालों से यहां काम कर रही थी।

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