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कंपोजिशन के बादशाह थे उस्ताद प्यारे लाल, रेडियो से की थी गायकी की शुरुआत

दोनों भाइयों ने रियाज की धुन में पत्र लेकर अपने तकिए के नीचे रख दिया और ऐसा रखा कि कई महीने तकिए के नीचे ही पड़ा रहा।

Danik Bhaskar | Mar 10, 2018, 05:57 AM IST
सूफी गायक प्यारेलाल वडाली का शुक्रवार को दिल का दौरा पड़ने से अमृतसर में निधन हो गया। सूफी गायक प्यारेलाल वडाली का शुक्रवार को दिल का दौरा पड़ने से अमृतसर में निधन हो गया।

कपूरथला (चंडीगढ़). सूफी गायक प्यारेलाल वडाली का शुक्रवार को दिल का दौरा पड़ने से अमृतसर में निधन हो गया। प्यारेलाल, अपने बड़े भाई पूरनचंद वडाली के साथ ही गाया करते थे। प्यारेलाल, पूरनचंद को ही अपना गुरु मानते थे। उनकी जोड़ी ने दुनियाभर में अपनी गायकी से एक अलग मुकाम बनाया था। हाल ही में उन्होंने कंगना रणौत की फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ में रंगरेज मेरे....गाया था। यह नंबर बेहद हिट रहा था। सूफी गायकी की वडाली ब्रदर्स की इस अनोखी जोड़ी ने पहली बार 1975 में ऑल इंडिया रेडियो से सूफी गायकी की शुरुआत की थी। पद्मश्री को लेकर सरकार से की बहस...

- भारत सरकार ने वडाली ब्रदर्स को पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित करने के लिए 2004 में उनके घर के पते पर पत्र भेजा था लेकिन दोनों भाइयों ने रियाज की धुन में पत्र लेकर अपने तकिए के नीचे रख दिया और ऐसा रखा कि कई महीने तकिए के नीचे ही पड़ा रहा। सरकार ने 2005 में फिर से पत्र भेजा। इस बार पत्र घर के किसी पढ़े-लिखे बच्चे ने पढ़ा तो लिखा था कि ‘यह पत्र पद्मश्री अवाॅर्ड के लिए है, आप दिल्ली नहीं आए। अब पत्र पढ़कर दिल्ली आ जाएं।’ बार-बार पत्र आने का मामला समझ आने पर दोनों भाई अवाॅर्ड लेने दिल्ली रवाना हो गए। दिल्ली में भी इस बात पर बहस हो गई कि सरकार यह अवाॅर्ड एक नहीं दोनों भाइयों को दे। सरकार के अफसरों ने किसी तरह समझाया-बुझाया तो बड़े भाई पूर्ण चंद ने पद्मश्री अवाॅर्ड ग्रहण किया।


सूफी गायकी को समर्पित पांच पीढ़ियां
- पूर्ण चंद और प्यारे लाल वडाली का परिवार सूफी गायकी में पांच पीढ़ी से जुड़ा हुआ है। पहले उनके दादा, फिर पिता, उनके बाद दोनों भाई खुद और अब पूर्ण चंद का बेटा लखविंदर वडाली सूफी गायकी की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। सूफी गायकी की वडाली ब्रदर्स की इस अनोखी जोड़ी ने पहली बार 1975 में ऑल इंडिया रेडियो से सूफी गायकी की शुरुआत की थी।

वडाली ब्रदर्स के नाम पर संगीत एकेडमी खोलेगी सरकार

- प्यारेलाल वडाली के निधन पर पंजाब सरकार ने शोक जताते हुए उनके नाम पर एकेडमी खोलने का ऐलान किया है।

- वडाली गांव में प्यारेलाल के अंतिम संस्कार में पहुंचे अमृतसर वेस्ट के कांग्रेसी विधायक डॉ. राजकुमार वेरका ने बताया, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की पहल पर वह यहां आए हैं।

- उन्होंने कहा, पंजाब सरकार वडाली गांव में दोनों भाइयों के नाम पर संगीत एकेडमी खोलेगी। उन्होंने इस एकेडमी के लिए 50 लाख रुपए देने का ऐलान भी किया।

- वेरका ने बताया, वडाली गांव को जाने वाली सड़क का नाम भी इस सूफी जोड़ी के नाम पर रखा जाएगा। गांव में उनके नाम से भव्य पार्क भी बनाया जाएगा।

पहली गाड़ी खरीदी तो पूजा के लिए मंदिर, गुरुद्वारे की बजाय कला केंद्र पहुंचे वडाली बंधु

- सूफी संगीत की सांसों की माला आज टूट गई। प्यारे बिन बड़े भाई पूर्ण वडाली अधूरे रह गए और उन्हें सुनने और चाहने वाले हजारों लाखों फैंस भी। चाहने वालों में हम दोनों बंधु भी रहे। सूफी गायन में उनकी हेक, मुरकियों की बारीकियों से मिली सीख से कुछ कदम हमने भी सूफी गायन की ओर बढ़ाए।

- जितने कार्यक्रमों में हमने उनकी संगत की तो पाया... कार्यक्रम खत्म होने के बाद वे तुरंत लोगों के बीच जाकर सभी से मिलते थे। अपने साथी म्यूजिशियन के काम की खुलकर प्रशंसा करते थे। कला की दुनिया में जितने बड़े फलक पर वे छाए, बातचीत और व्यवहार में उतने ही जमीन पर रहे।

- हवाई यात्रा के दौरान भी जब उन्हें बिजनेस क्लास में सफर करने के लिए कहा जाता तो वे मना कर देते थे और अपने संगतियाें के साथ ही इकोनोमी क्लास में जाते। बात 1993 की है, जब वडाली बंधुओं ने चंडीगढ़ से अपनी पहली गाड़ी क्वालिस खरीदी। तभी हमारी भी पहली मुलाकात हुई वडाली बंधुओं से।

- नई गाड़ी की पूजा के लिए मंदिर, गुरुद्वारे जाने की बजाय दोनों भाई चंडीगढ़ के प्राचीन कला केंद्र पहुंचे। प्राचीन कला केंद्र के संचालक स्वर्गीय मदन लाल कौसर से बोले- कौसर साहब बाहर आओ, अंसी हुण अपनी नवीं गड्डी खरीदी ऐ। इसदी पार्टी प्राचीन कला केंद्र विच हाेएगी।

निधन की खबर के बिलखते परिजन। निधन की खबर के बिलखते परिजन।
पिता को जाता देख रो पड़ी बेटियां। पिता को जाता देख रो पड़ी बेटियां।