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पंजाब सरकार का खजाना खाली, फिर भी 4 मंत्री व बादल परिवार फ्री चला रहा ट्यूबवेल

पंजाब सरकार का खजाना खाली है, कई कल्याणकारी योजनाएं रुकी हैं।

Dainik Bhaskar

Nov 27, 2017, 05:01 AM IST
Punjab government treasure vacant

जालंधर. पंजाब सरकार का खजाना खाली है, कई कल्याणकारी योजनाएं रुकी हैं। लेकिन 6000 करोड़ की मुफ्त बिजली में से 4000 की उन लोगों को दी जा रही है, जिनमें से ज्यादातर संपन्न हैं। इनमें एमपी, मंत्री, एमएलए और उद्योगपति व अफसर भी शामिल हैं। सूबे के 20 सांसदों में से 11 से बात हुई तो 9 ने माना कि उनके खेतों में फ्री बिजली से सिंचाई हो रही है।

117 में से 87 एमएलए से भास्कर टीम ने बात की तो पता चला कि 42 एमएलए और उनके परिवार फ्री बिजली से खेती ट्यूबवेल चला रहे हैं। इन 42 एमएलए में मौजूदा सरकार के ही मनप्रीत बादल समेत 4 मंत्री और पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल और पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर के परिवार भी शामिल हैं।


भास्कर पड़ताल में पता चला कि 13.51 लाख ट्यूबवेल कनेक्शनों में से 7.05 लाख कनेक्शन 10 एकड़ से ज्यादा खेती करने वालों के हैं। जबकि ढाई एकड़ तक की जमीन वाले 1.64 लाख छोटे किसानों में 49.70 फीसदी के पास कनेक्शन नहीं हैं। ढाई से 5 एकड़ तक के 1.95 लाख किसानों में 46340 के पास भी कनेक्शन नहीं हैं। ये छोटे किसान नहर, नदी और डीजल इंजन पंप या बड़े किसानों से पानी खरीद कर खेत सींच रहे हैं। 20 साल से फ्री बिजली का फायदा सिर्फ बड़े किसानों को ही मिल रहा है। इसके उलट 10 एकड़ से अधिक कृषि भूमि वालों के पास 2 से 3 कनेक्शन हैं। किसी भी सरकार ने नहीं देखा कि छोटे किसानों को इसका फायदा मिल भी रहा है या नहीं।

पहला: तृप्त बाजवा, अरुणा चौधरी व रजिया के परिवारों के ट्यूबवेल चल रहे फ्री बिजली से

सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 5 महीने पहले ही फ्री बिजली छोड़ने का ऐलान किया है जबकि खजाना मंत्री मनप्रीत बादल अभी तक फ्री बिजली ले रहे हैं। पावरकॉम के रिकॉर्ड के मुताबिक बादल गांव में मनप्रीत के नाम दो ट्यूबवेलों के कनेक्शन में से हरेक पर 7.5 बीएचपी की मोटर है। मनप्रीत समेत 9 में से 4 मंत्रियोंं के परिवारों के ट्यूबवेल फ्री िबजली से चल रहे हैं। इनमें पंचायत विकास मंत्री तृप्त राजेंद्र सिंह बाजवा के बेटे के नाम कादियां के राजोआ-बहादुरपुर में, शिक्षा मंत्री अरुणा चौधरी के ससुर जयमुनि के नाम दीनानगर के अवनखा में पीडब्ल्यूडी मंत्री रजिया सुल्ताना के परिवार का मालेरकोटला के हथोआ में ट्यूबवेल हैं।

दूसरा: छोटे किसान पानी खरीदकर सींच रहे खेत

सालाना 11800 मिलियन यूनिट फ्री बिजली पाने वाले 13.51 लाख खेती ट्यूबवेल कनेक्शनों में 7.05 लाख 10 एकड़ से अधिक जमीन वालों के हैं। 3 से 5 बीएचपी का सबमर्सिबल पंप लगाने का खर्च दो से ढाई लाख रुपए बैठता है इसलिए ढाई एकड़ तक की जमीन वाले 1.64 लाख छोटे किसानों में 81667 और ढाई से पांच एकड़ तक के 1.95 लाख किसानों में 46340 के पास ट्यूबवेल कनेक्शन ही नहीं हैं। ये किसान नहर, नदी और डीजल इंजन पंप या बड़े िकसानों से खरीदे पानी से खेत सींच रहे हैं।

- इधर, सियासत भी कम नहीं...

कैप्टन ने बंद कर दी थी फ्री बिजली, 2007 चुनाव में शुरू की, फिर भी हारे

कैप्टन सरकार ने अक्टूबर 2002 से अगस्त 2005 तक ट्यूबवेलों की फ्री बिजली बंद की थी। इससे सालाना करीब 2800 करोड़ की बचत हुई। 2007 के विस चुनाव देखते हुए सितंबर 2005 से फ्री बिजली बहाल कर दी गई फिर भी कांग्रेस चुनाव नहीं जीत पाई। वोट के लिए फ्री बिजली जारी रखने वाले अकाली-भाजपा गठबंधन को भी हार का सामना करना पड़ा।

- 20 साल पहले कांग्रेस ने ही शुरू की थी फ्री बिजली... 7 एकड़ तक वाले किसानांे को फ्री बिजली की पहल कांग्रेस सरकार ने ही जनवरी 1997 से की थी। इसके बाद 14 फरवरी 1997 से खेती के सभी ट्यूबवेलों को बिजली फ्री कर दी। इसके बावजूद कांग्रेस 1997 का चुनाव नहीं जीत पाई।

- कैप्टन की अपील बेअसर... खैहरा को छोड़ किसी ने भी नहीं छोड़ी बिजली : सूबे की माली हालत को देखते हुए 19 जून को विधानसभा बजट सत्र के दौरान सीएम कैप्टन ने सदन में एमएलए और मंत्रियों से मुफ्त बिजली छोड़ने की अपील की थी। इस दौरान खुद भी फ्री बिजली छोड़ने का ऐलान किया था। 5 महीने हो गए आप नेता सुखपाल खैहरा के अलावा किसी ने भी मुफ्त बिजली नहीं छोड़ी।

सरकार पर इस साल 8008 करोड़ बिजली सब्सिडी का बोझ

13.51 लाख टयूबवेल
5976.82 करोड़
17.78 लाख एससी, बीसी, बीपीएल को 200 यूनिट तक
1917.02 करोड़
फ्रीडम फाइट् र्स को 300 यूनिट तक
83 करोड़
नई इंडस्ट्री को 5 रु. यूनिट
113.31 करोड़

4000 करोड़ का गणित

- 13.51 लाख ट्यूबवेल कनेक्शनों को इस साल 6000 करोड़ की फ्री बिजली
- 7.05 लाख ट्यूबवेल 10 एकड़ से अधिक खेती में
- 10 एकड़ से अिधक की खेती
के ट्यूबवेल पर 7.5 बीएचपी से अधिक की मोटर
- 10 बीएचपी ट्यूबवेल की सालाना औसतन खपत 11,250 यूनिट
- पीएसईआरसी द्वारा तय प्रति यूनिट 5.06 रुपए के हिसाब से 7.05 लाख ट्यूबवेल को सालाना 4013 करोड़ रुपए फ्री बिजली

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