--Advertisement--

19 साल की उम्र से उड़ा रही हैं बोइंग प्लेन, बताया- ऐसे हो सकते हैं कामयाब

महज 19 साल की होते ही एनी की ट्रेनिंग पूरी की और एयर इंडिया में जॉब शुरू की।

Danik Bhaskar | Mar 09, 2018, 06:50 AM IST
दिव्या के मुताबिक, वे शुरू में इंग्लिश पढ़-लिख लेती थीं। मगर उनके लिए इंग्लिश में बोलना चुनौती थी। दिव्या के मुताबिक, वे शुरू में इंग्लिश पढ़-लिख लेती थीं। मगर उनके लिए इंग्लिश में बोलना चुनौती थी।

नई दिल्ली. एनी दिव्या बोइंग-777 विमान उड़ाने वाली दुनिया की सबसे सबसे युवा पायलट हैं। एनी बताया कि मैं अपने आसपास के लोगों से कहती थी कि मुझे पायलट बनना है तो वे मुझ पर हंसते थे। इस स्थिति में कई बार आप अपना आत्मविश्वास खो बैठते हैं। लेकिन एक बार मेरे एक टीचर की नजर मुझ पर पड़ी। उन्होंने मुझसे कहा, एक लिस्ट बनाओ और उस पर वे दस बातें लिखो जो तुम करना चाहती हो। तब मैंने कहा कि दस चीजें मैं कैसे कर सकती हूं। तब उन्होंने कहा कि कैसे करोगी इस बारे में बाद में सोचना, लेकिन पहले यह तय करो कि आखिर करना क्या है। मैंने दस पॉइंट्स में सबसे पहले पायलट बनने का सपना लिखा। इसके बाद उन्होंने दसों पॉइंट का मास्टर प्लान बनाने के लिए कहा। आगे चलकर उनकी उस सलाह ने मुझे अपने लक्ष्यों को पूरा करने में काफी मदद दी। यहां हुआ था जन्म...

- दरअसल, 30 साल की दिव्या का जन्म पंजाब के पठानकोट शहर में हुआ था। उनके पिता आर्मी में थे और वे वहीं पोस्टेड थे।
- एनी दिव्या के जन्म के बाद उनके पिता ने वॉलंटरी रिटायरमेंट ले लिया और फिर उनकी फैमिली अपने विजयवाड़ा शिफ्ट हो गई।
- दिव्या की स्कूलिंग विजयवाड़ा के सेंट्रल स्कूल से ही हुई। वो बचपन से ही पायलट बनना चाहती थीं।

सबसे युवा महिला पायलट एनी दिव्या ने हाल में साझा किए कुछ प्रेरणादायक अनुभव :

बेहतरीन सलाह का इंतजार

- हमारे शहर में लड़कियों को अनजानी जगहों पर जाने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जाता था। तब इंटरनेट की पहुंच भी सीमित थी।

- मैं अपने आसपास के लोगों से अक्सर यह सवाल करती थी कि पायलट कैसे बनते हैं तो वे मेरी हंसी उड़ाते थे। लेकिन मैंने हार नहीं मानी और न ही इस अपमान को अपने सपनों पर हावी होने दिया।

- आखिरकार किसी ने मुझे इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए एक बेहतरीन सलाह दी और मैंने 17 साल की उम्र में फ्लाइंग एकेडमी ज्वॉइन की।

अपने डर से बाहर निकलिए

- हम कई बार महत्वपूर्ण फैसले इसलिए नहीं ले पाते क्योंकि हमें लगता है कि लोग हमें जज करने लगेंगे। हम परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते तो सबसे पहले ख्याल आता है कि लोग क्या सोचेंगे।

- जबकि हमें इस वक्त सोचना चाहिए कि एग्जाम में अच्छा प्रदर्शन नहीं करने से हमारे आगे के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

- सिर्फ लोगों द्वारा आकलन किए जाने के डर से हम निर्णय भी उन्हीं की सोच के मुतािबक लेते हैं। इस डर से जब बाहर निकलेंगे तो अपने सपनों को जीना सीख जाएंगे।

लर्निंग से मिलेगा कॉन्फिडेंस

- एक बार एकेडमी में मेरी एक सीनियर ने मुझसे एक सवाल किया जिसका जवाब मुझे नहीं आता था। मुझे पता था कि मेरी हंसी उड़ेगी और ऐसा ही हुआ।

- उस वक्त मैं वहां से चली गई लेकिन जाते ही मैंने उस सवाल का जवाब खोजा। हालांकि मैंने उन्हें नहीं बताया, लेकिन मेरा आत्मविश्वास बढ़ा और मैं निरंतर लर्निंग के लिए प्रोरित हुई।

कोई रुकावट न रोके रास्ता

- जब मैं अंतरराष्ट्रीय जेट फ्लाइट की ट्रेनिंग के लिए मुंबई में थी तब बहुत कम लोग इस स्तर तक पहुंचे थे। उस वक्त मेरे लड़की होते हुए भी इस पड़ाव तक पहुंचने पर कई अफवाहें उड़ाई गईं।

- इसके चलते डिप्रेशन में मैंने दो साल निकाले, फिर मुझे लगा कि ऐसी गॉसिप को मुझे अपने रास्ते की रुकावट नहीं बनने देना चाहिए।

- फिर धीरे-धीरे मैंने बाहर निकलना शुरू किया, नए दोस्त बनाए और सीखना जारी रखा। ऐसा करके मैंने अपनी ताकत पहचानी।

मजाक उड़ाते थे दोस्त

- उनके मुताबिक, जब वे अपने दोस्तों के बीच पायलट बनने की बात करती थी तो वे उनका मजाक उड़ाया करते थे।
- 17 साल की उम्र में दिव्या ने 12वीं की थी। इसके बाद उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी में एडमिशन लिया।
- यहां एडमिशन के लिए दिव्या के पिता ने फ्लाइंग स्कूल में एडमिशन और पढ़ाई के लिए कर्ज लिया था।
- हालांकि, बाद में दिव्या को स्कॉलरशिप मिली जिससे आगे की उनकी राह आसान हो गई।

खराब अंग्रेजी के कारण लोग मजाक उड़ाते थे

- दिव्या के मुताबिक, वे शुरू में इंग्लिश पढ़-लिख लेती थीं। मगर उनके लिए इंग्लिश में बोलना चुनौती थी।
- एक छोटे से शहर से होने के कारण उन्हें इंग्लिश में बोलने और उस माहौल में एडजस्ट करने में कठिनाई हुई।
- दिव्या की खराब अंग्रेजी का लोग मजाक उड़ाया करते थे और ये बात उन्हें काफी हर्ट करती थी।
- कई बार तो उन्होंने अकादमी छोड़ने और घर जाने का मन बना लिया, मगर वो ऐसा नहीं कर पाईं।

बोइंग-777 चलाना बचपन का सपना था

- 19 साल की उम्र में उन्होंने अपनी ट्रेनिंग पूरी की और ट्रेनिंग खत्म होने के तुरंत बाद ही उन्हें एयर इंडिया में नौकरी मिल गई।
- इसी दौरान वे पहली बार विदेश गईं और फिर उन्हें ट्रेनिंग के लिए स्पेन भी भेजा गया। वापस लौटने के बाद उन्हें बोइंग 737 उड़ाने का मौका मिला।
- जब वे 21 साल की हुईं उन्हें ट्रेनिंग के लिए लंदन भेजा गया और यही वह समय था, जब उन्होंने बोइंग 777 उड़ाया था।

क्रू मेंबर्स के साथ पायलट एनी दिव्या। क्रू मेंबर्स के साथ पायलट एनी दिव्या।
उन्होंने लंदन में एडवांस ट्रेनिंग से पहले स्पेन में बोईंग 737 पर ट्रेनिंग ली थी। उन्होंने लंदन में एडवांस ट्रेनिंग से पहले स्पेन में बोईंग 737 पर ट्रेनिंग ली थी।
पहली बार में एनी दिव्या को बोइंग 737 विमान उड़ाने का मौका मिला था। पहली बार में एनी दिव्या को बोइंग 737 विमान उड़ाने का मौका मिला था।
अब बोइंग 777 विमान उड़ाती हैं पायलट दिव्या। अब बोइंग 777 विमान उड़ाती हैं पायलट दिव्या।
वे 21 साल की हुईं उन्हें ट्रेनिंग के लिए लंदन भेजा गया, जहां उन्होंने बोइंग 777 की ट्रेनिंग ली। वे 21 साल की हुईं उन्हें ट्रेनिंग के लिए लंदन भेजा गया, जहां उन्होंने बोइंग 777 की ट्रेनिंग ली।
एनी दिव्या एनी दिव्या