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सीलिंग पर भड़का गुस्सा: लाठीचार्ज से कारोबारियों के सिर फूटे, हाथ टूटे

सिर में चोट= धारा 307 का मामला, गंभीर चोट पर बनता है गैरइरादतन हत्या का मामला

Danik Bhaskar | Mar 10, 2018, 03:09 AM IST

नई दिल्ली. ओल्ड डबल स्टोरी लाजपत नगर-4 में गुरुवार को सीलिंग की कार्रवाई के दौरान हुए लाठीचार्ज में जहां छह कारोबारी घायल हो गए, वहीं इसके एक दिन बाद डीसीपी साउथ ईस्ट ने लाठीचार्ज के आदेश देने से इनकार कर दिया। उनका कहना है न तो लाठीचार्ज के आर्डर दिए गए और न ही लाठीचार्ज किया गया। पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए सिर्फ हलका बल प्रयोग किया था।


भास्कर ने जब इस मामले में कानून विशेषज्ञों से बात की तो उन्होंने कहा- इस पूरी कार्रवाई पर पुलिस पर कार्रवाई हो सकती है। उनका कहना है कि लाजपत नगर में निहत्थे लोगों के सिर पर लाठियां भांजने की शिकायत पर पुलिसकर्मियों पर हत्या के प्रयास (आईपीसी की धारा 307) तक में एफआईआर दर्ज हो सकती है। कार्रवाई के घेरे में आर्डर जारी करने वाले से लेकर मौके पर लाठी चलाने वाले सिपाही तक आ सकते हैं।

#पुलिस कब कर सकती है लाठीचार्ज और इसके कानूनी पहलू समझें

लाठीचार्ज यानी क्या?

सीलिंग के दौरान मौजूद ऑफिसर को लाठीचार्ज से पहले आला-अधिकारियों से अनुमति लेनी होती है। इसमें कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पैर में लाठी मारने की अनुमति होती है। कमर से ऊपर और सिर पर लाठी मारने की अनुमति नहीं होती।

किया क्या
यहां पुलिस ने भीड़ पर सीधे सिर, कमर में लाठी दे मारी। लोगों के हाथ तोड़ डाले।

कहां कर सकते हैं शिकायत
घायल लोगों को संबंधित थाने, डिस्ट्रिक्ट डीसीपी को लिखित शिकायत करनी चाहिए। फिर एलजी व पुलिस आयुक्त के पास भी जा सकते हैं। अगर यहां कार्रवाई न हो तो पीड़ित को जिला अदालत में सीआरपीसी 156(3) में अर्जी दायर करने का अधिकार है। अर्जी पर कोर्ट ये तय करेगी की एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए या नहीं।


घायलों की चोट के मुताबिक लगेगी धारा
वकील अभिषेक चौधरी व मनीष भदौरिया ने बताया कि अगर पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी तो उसमें घायलों की एमएलसी में आई चोटों के हिसाब से ही धाराएं लगेंगी। कमर के ऊपर चोट लगने पर संगीन धाराओं में केस दर्ज होता है। जैसे अगर किसी के सिर में चोट है तो मामला 307 हत्या के प्रयास का बनता है। चोट इतनी गंभीर है कि जान जाने का खतरा है तो धारा 308 गैरइरादतन हत्या के प्रयास का मामला भी लगाया जा सकता है।

पुलिस कब, कितनी बड़ी कार्रवाई सकती है

(लेकिन केवल आपात स्थिति में जब दंगा व जान-माल के नुकसान का खतरा हो)

- पुलिस हल्का बल प्रयोग कर सकती है, लेकिन इसके लिए भी उसे यह जस्टिफाई करना होगा कि अगर ऐसा नहीं किया तो लोगों की जानमाल का खतरा है और तोड़फोड़ हो जाएगी।
- पहले लाउड स्पीकर से चेतावनी फिर पैर में लाठी मारी जानी चाहिए।
- फिर हवा में गोली चलाई जा सकती है।
- हवा में गोली चलाने के बाद भी स्थिति न सुधरे तो पहले पैर व फिर कमर में नीचे गोली मारी जा सकती है, लेकिन किसी की जान न जाए।