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सरकार लाई ‘ईको फ्रेंडली’ सेनेटरी नैपकिन, चार माह में गलकर मिट्‌टी में मिल जाएंगे

‘सुविधा’ होगा नाम, जन औषधि केंद्र में बिक्री, कीमत 10 रुपए रखी गई

Bhaskar News | Last Modified - Mar 09, 2018, 05:28 AM IST

सरकार लाई ‘ईको फ्रेंडली’ सेनेटरी नैपकिन, चार माह में गलकर मिट्‌टी में मिल जाएंगे

नई दिल्ली. देश में पहली बार केंद्र सरकार ने अपने स्तर पर ईको फ्रेंडली और सस्ते सेनेटरी नैपकिन बजार में उतारने का फैसला किया है। ‘सुविधा’ नाम के इन बायो-डिग्रेडेबल सेनेटरी नैपकिन को रसायन और उवर्रक मंत्री अनंत कुमार ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर लॉन्च किया। जन औषधि केन्द्रों के जरिए सिर्फ 10 रुपए में बेचा जाएगा। जन औषधि केंद्र में यह नैपकिन 28 मई से उपलब्ध होंगे। इस दिन अंतरराष्ट्रीय मासिक धर्म स्वच्छता दिवस यानी मेन्सट्रूल हाइजिन डे भी मनाया जाता है।


- ‘सुविधा’ नैपकिन की खासियत ये है कि यह तीन से चार महीने में ही गल जाएंगे। इससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा। इन्हें ऑक्सो-बायोडीग्रेडेबल तकनीक से बनाया गया है। इसमें भी प्लास्टिक और पॉलीमर का इस्तेमाल किया हुआ है लेकिन इसमें प्री-डीग्रेडेंट मिलाया गया है। इसकी वजह से ऑक्सीजन के अलावा जब नैपकिन किसी दूसरे तत्व के संपर्क में आएगा तो गलना शुरू हो जाएगा है। प्राकृतिक तौर पर नष्ट होने में इसे तीन-चार महीने लगेंगे। आम सेनेटरी नैपकिनों में प्लास्टिक की मात्रा ज्यादा होने की वजह से उन्हें प्राकृतिक तौर पर गलने में 500 साल तक लग जाते हैं
- औसतन एक मासिक चक्र में 12 सेनेटरी नैपकिनों का इस्तेमाल होता है। इस हिसाब से देखा जाए तो भारत में हर साल सिर्फ सेनेटरी नैपकिन से ही 13 टन कचरा पैदा होता है।

सिर्फ 48% महिलाओं की साफ नैपकिन तक पहुंच
- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के अनुसार 15 से 24 साल तक की 58 प्रतिशत महिलाएं स्थानीय स्तर पर तैयार नैपकिन, सैनिटरी नैपकिन और रूई के पैड इस्तेमाल करती हैं।
- शहरी क्षेत्रों में 78 प्रतिशत महिलाएं पीरियड्स के दौरान सुरक्षा के लिए आधुनिक और हाईजिनिक तरीके अपनाती हैं। ग्रामीण इलाके में केवल 48 फीसदी महिलाओं की ही साफ-सुथरे सैनिटरी नैपकीन तक पहुंच है।
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Web Title: srkar laaee eeko frendli senetri naipkin, Char maah mein galkar mit‌ti mein mil jaaengae
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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