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इम्पोर्टेड न्यूजप्रिंट: सालभर में 40% महंगा हुआ अखबार छपाई का कागज

न्यूजप्रिंट की कीमत 37,000 रुपए से बढ़कर 52,000 रु. प्रति टन हुई

Danik Bhaskar | Mar 09, 2018, 07:13 AM IST

नई दिल्ली. समाचार पत्र छपाई की लिए जरूरी इम्पोर्टेड न्यूजप्रिंट 40% से ज्यादा महंगा हो गया है। कुछ माह पहले तक इसकी कीमत करीब 37 हजार रुपए प्रति टन थी, जो अब 52 हजार रुपए प्रति टन तक पहुंच चुकी है। देश में हर साल करीब 28 लाख टन न्यूजप्रिंट की जरूरत पड़ती है। लेकिन इसका घरेलू उत्पादन महज 13 से 14 लाख टन है। इसलिए आधी जरूरत आयात से पूरी होती है।


इम्पोर्टेड न्यूजप्रिंट के दाम पिछले छह महीने में ज्यादा तेजी से बढ़े हैं। पिछले साल जनवरी-मार्च की डिलीवरी का कॉन्ट्रैक्ट 33 हजार 500 रु. प्रति टन पर हो रहा था। प्लांट तक पहुंचाने का खर्च जोड़कर यह लागत 37 हजार रु. थी। जुलाई-सितंबर तक के कॉन्ट्रैक्ट लगभग इसी दाम पर हो रहे थे। अक्टूबर से इसमें तेजी आनी शुरू हुई। अक्टूबर-दिसंबर के कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 40 हजार रु. प्रति टन तक पहुंच गई, जो अब 52 हजार रु. के भाव पर हो रहे हैं।

दाम में तेजी के दो मुख्य कारण हैं- चीन की न्यूजप्रिंट आयात नीति में बदलाव और यूरोप-अमेरिका में न्यूजप्रिंट बनाने वाली मिलों का बंद होना। हाल तक चीन कागज के मामले में आत्मनिर्भर था। लेकिन प्रदूषण मानकों का हवाला देते हुए वहां पिछले साल जुलाई में रद्दी कागज के आयात पर रोक लगा दी गई। इससे वहां के पब्लिशर न्यूजप्रिंट का आयात करने लगे। चाइनीज पब्लिशर ज्यादा दाम पर न्यूजप्रिंट खरीदने को तैयार हैं, इसलिए दूसरे देशों के निर्माता उन्हें सप्लाई कर रहे हैं। इससे भारत जैसे देशों में सप्लाई धीमी हुई है।

बाजार सूत्रों के मुताबिक सितंबर से दिसंबर 2017 के दौरान चीन ने 3.5 से 4 लाख टन न्यूजप्रिंट आयात किया। 2018 में भी वहां 4.5 से 5 लाख टन आयात की उम्मीद है।


ग्लोबल मार्केट में अमेरिका, कनाडा, यूरोप और रूस न्यूजप्रिंट का निर्यात करते हैं। डॉलर की तुलना में यूरो सालभर में करीब 22% महंगा हुआ है। इससे यूरोपियन निर्माताओं को निर्यात की कम कीमत मिल रही है। इसकी भरपाई के लिए वे ज्यादा कीमत मांग रहे हैं।