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फुटबॉलर से आतंकी बना माजिद घर लौट आया, मां ने बिलखते हुए कहा था- लौट आओ और हमारी जान ले लो, फिर चले जाना

हफ्ते भर पहले लश्कर में शामिल हुआ था; सेना ने कहा- कोई कार्रवाई नहीं करेंगे ताकि दूसरों को प्रेरणा मिल सके।

Dainik Bhaskar

Nov 18, 2017, 06:15 AM IST
Footballer majid khan turned Lashkar militant surrenders

श्रीनगर. हफ्ते भर पहले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हुआ कश्मीरी युवा माजिद इरशाद खान घर लौट आया है। उसने गुरुवार की रात करीब साढ़े दस बजे सेना के अधिकारियों के सामने सरेंडर कर दिया। फौज ने उसे अवंतिपोरा में विक्टर फोर्स को सौंप दिया है। सेना का कहना है कि उसके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी। उसे मुख्यधारा में शामिल किया जाएगा, जिससे आतंकी संगठनों में शामिल दूसरे युवाओं को भी घर लौटने के लिए प्रेरित कर सके।

15 नवंबर को जम्मू-कश्मीर के डीजीपी मुनीर खान ने कहा था कि घाटी के जो नौजवान उग्रवाद के रास्ते पर चल दिए थे और अब वापस आना चाहते हैं, पुलिस उनकी मदद करेगी। इसके अगले ही दिन माजिद ने सरेंडर कर दिया। उसकी मां, पिता और दोस्तों ने भी उससे घर लौट आने की अपील की थी।

माजिद की मां ने एक वीडियो में उससे लौट आने की गुजारिश करते हुए कहा था, ‘लौट आओ और हमारी जान ले लो, फिर चले जाना। हमें यहां किसके लिए छोड़ गए हो?’ दोस्तों ने भी माजिद को उसके मां-पिता की हालत का हवाला देते हुए घर लौट आने की अपील की थी।

माजिद के एक दोस्त ने फेसबुक पर एक बेहद भावुक पोस्ट लिखी थी, ‘आज मैंने तुम्हारी मां और अब्बू को देखा। वो पूरी तरह से टूट चुके हैं। प्लीज लौट आओ। इस तरह अपने मां-बाप को मत छोड़ो। प्लीज वापस आ जाओ। तुम अपने मां-बाप की इकलौती उम्मीद हो। वो तुमसे बिछड़ना नहीं सह पाएंगे। जब मैंने उन्हें देखा तब वो रो रहे थे। प्लीज माजिद उनके लिए लौट आओ। हम सब तुम्हें बहुत प्यार करते हैं।’

दरअसल, 9 नवंबर, 2017 को माजिद अचानक गायब हो गया था। अगले दिन सोशल मीडिया पर उसकी एक तस्वीर घूम रही थी, जिसमें वो हाथों में एके47 थामे हुए था। परिवार को भी सोशल मीडिया से ही पता चला कि उनके इकलौते बेटे ने फुटबॉल छोड़कर बंदूक थाम ली है।

दोस्त के एनकाउंटर के बाद आतंकी बना था

माजिद ने आतंकी संगठन में शामिल होने का इरादा 29 अक्तूबर की एक फेसबुक पोस्ट में जाहिर किया था। उसने लिखा था, ‘जब शौक-ए-शहादत हो दिल में, तो सूली से घबराना क्या।’ बताया जा रहा है कि माजिद अपने खास दोस्त यावर निसार शेरगुजरी की वजह से आतंकी बना। यावर जुलाई में एक आतंकी संगठन से जुड़ गया था, लेकिन एक महीने के भीतर ही सुरक्षा बलों ने उसे मार गिराया। दोस्त की मौत से माजिद इतना दुखी हुआ कि आतंकी बनने का फैसला कर लिया, लेकिन लश्कर-ए-तैयबा उसे एक हफ्ते से ज्यादा रोक नहीं पाया।

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