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किचन में भी हाथ आजमाते हैं जस्टिस भंडारी, पिता और दादा भी थे नामी वकील

घर में उन्हें जब भी मौका मिलता है तो वह किचन में हाथ आजमाने से नहीं चूकते।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 22, 2017, 01:22 AM IST

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    जस्टिस भंडारी (कुर्सी पर बैठे बाएं से प्रथम) ने गत 1 अक्टूबर को दुबई में पूरे परिवार के साथ अपना 70वां जन्म दिन मनाया।

    जोधपुर/नई दिल्ली. जस्टिस दलबीर भंडारी की बहन निशा संचेती का कहना है, कि व्यक्ति के आगे बढ़ने के साथ ही उसका ईगो उस पर हावी होने लग जाता है। इसकी वजह से वह परिवार में भी अकेला होने लग जाता है, लेकिन दलबीर भैय्या इससे बिल्कुल विपरीत हैं। उनमें आगे बढ़ने के साथ सहजता भी बढ़ती जा रही है। वे आज भी परिवार के प्रति पूरा समर्पण रखते हैं।

    - निशा ने बताया- लॉ से हमारे परिवार का पुराना रिश्ता है। हमारे दादा और पिता दोनों जाने-माने एडवोकेट थे। वकालत शुरू कर दलबीर भैया ने उनका नाम आगे बढ़ाया और अब दलबीर भैया का बेटा भी वकालत कर रहा है। परिवार में दलबीर भैया सबसे बड़े हैं, पांच बहनें हैं। दो जोधपुर में रहती हैं, बाकी बाहर हैं।

    - उन्होंने बताया, हाल में दलबीर भैय्या की 70वीं वर्षगांठ थी, जब हमारा पूरा परिवार दुबई में एकत्र हुअा और वहां सेलिब्रेट किया। उन्हें स्पोर्ट्स में बहुत रुचि है, लेकिन सबसे ज्यादा खाना बनाने के शौकीन हैं। वे आज भी कई बार रसोई में खाना बनाने पहुंच जाते हैंं। दुबई यात्रा के दौरान एक दिन पूरा परिवार घूमने के लिए गया, दलबीर भैय्या घर में अकेले थे। जब तक हम सभी लाेग लौटे, तब तक उन्होंने पूरा खाना बना दिया।

    - निशा का कहना है, कि उन्हें भाई के हाथ की कबूली व हलवा बहुत पसंद है। सोमवार रात को उनकी जीत के साथ ही बधाइयों का दौर शुरू हो गया था। बधाइयों के दौर के बीच जस्टिस भंडारी की बहन के शास्त्रीनगर डी सेक्टर स्थित घर नौपत बैठी हुई थी।

    (जैसा उन्होंने मनोज कुमार पुरोहित को बताया)

    दोस्त मुरलीधर कॉलेज में करवाते थे परेड, 54 साल की दोनों की दोस्ती

    - जस्टिस दलबीर भंडारी के सहपाठी रह चुके रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट जज मुरलीधर वैष्णव ने उनकी सहजता व छात्र मित्रता के किस्से बताए। वैष्णव ने बताया, कि बात वर्ष 1963 की है जब जस्टिस भंडारी से उनकी दोस्ती ओल्ड कैंपस से स्नातक की डिग्री करने के दौरान हुई। वैष्णव बताते हैं- हमने यहां से कला वर्ग में 1966 में बीए और फिर दो वर्षीय एलएलबी भी साथ में की। पढ़ाई के दौरान मैं कॉलेज में एनसीसी में कैडेट्स अंडर ऑफिसर था और दलबीर कैडेट, इस कारण उनसे परेड भी करवाता था। वे बड़े खानदान से थे और मैं एक साधारण परिवार से था, इसके बावजूद हममें प्रगाढ़ दोस्ती थी। यहां से पढ़ाई पूरी होने के बाद वे एलएलएम करने विदेश चले गए और लौटने के बाद दिल्ली में प्रैक्टिस शुरू की। वर्ष 1975 में मैं आरएचजेएस में चयनित हो गया। वर्ष 1991 में उदयपुर में पोस्टिंग थी और प्रमोशन से मैं एडीजे बन गया। उस दौरान मेरी पोस्टिंग बूंदी होने वाली थी, लेकिन बच्चों की पढ़ाई के कारण वहां जाना संभव नहीं था। तब तक मेरी उनसे मुलाकात हुए कई साल बीत गए थे, वे दिल्ली में हाईकोर्ट जज बन चुके थे। मैंने उन्हें फोन किया और निवेदन करने लगा, ‘भंडारी साहब मैं मुरली बोल रहूं...’ इतना कहते ही वे बोले- ‘अब एडीजे हो गया है मुरली, साहब-साहब क्यों कह रहा है? तुम मेरे बचपने के दोस्त हो, राखी पर जोधपुर आ रहा हूं तब बात करेंगे।’ कई सालों बाद बात करने के बावजूद उन्होंने बड़ी सहजता से वैसे ही बात की, जैसे वे छात्र जीवन में करते थे। बॉम्बे हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रहने के बावजूद वे रियल जोधपुरियन हैं। रियल जोधपुरियन वही होता है, जो कितनी भी सफलता व ऊंचाई पर चला जाए, लेकिन अपणायत नहीं भूलता है। इसके वे सही प्रतिनिधि और मित्रता के आदर्श भी हैं।
    (जैसा उन्होंने डीडी वैष्णव को बताया)

    जोधपुर के निवासी

    -बता दें किइंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में दूसरी बार निर्वाचित जस्टिस दलबीर भंडारी जोधपुर के निवासी हैं।

    - उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा व लॉ की डिग्री जोधपुर से ही पूरी की। उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर स्थित मुख्यपीठ में भी कुछ समय प्रैक्टिस की।

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    जस्टिस दलबीर भंडारी की बहन निशा संचेती।
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    इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में दूसरी बार निर्वाचित जस्टिस दलबीर भंडारी जोधपुर के रहने वाले हैं।
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    जस्टिस भंडारी के दोस्त मुरलीधर।
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    जस्टिस ने अपनी स्कूली शिक्षा व लॉ की डिग्री जोधपुर से ही पूरी की। उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर स्थित मुख्यपीठ में भी कुछ समय प्रैक्टिस की।
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Web Title: Know About International Court Justice Dalveer Bhandari
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