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कोर्ट में अटके 7 लाख केसों पर जस्टिस क्लॉक से नजर रखेगी सरकार, देरी पर बिगड़ेगी जज और कोर्ट की रैंकिंग

देश की डिस्ट्रिक कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक में 7 लाख से ज्यादा मुकदमे अटके पड़े हैं।

पवन कुमार | Last Modified - Nov 29, 2017, 05:01 AM IST

नई दिल्ली. देश की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक में 7 लाख से ज्यादा मुकदमे अटके पड़े हैं। इसको निपटाने में अब ‘जस्टिस क्लॉक’ नाम का एक सॉफ्टवेयर मदद करेगा। इसे केंद्रीय कानून मंत्रालय ने तैयार करवाया है। ये देशभर की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक से जुड़ा एक इंटरनल सॉफ्टवेयर होगा। इसके जरिए ये सभी अदालतें इंटर-कनेक्ट होंगी। राज्य सरकारों को कहा गया है कि वो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट और हाईकोर्ट का सारा डाटा सॉफ्टवेयर के लिए मुहैया कराएंं।

क्या होगा इस सॉफ्टवेयर में?

-जस्टिस क्लॉक पर सभी अदालतों के हर केस की पूरी टाइमलाइन मौजूद होगी। किसी कोर्ट में कितने केस पेंडिंग हैं, कितने समय से पेंडिंग हैं, कितनी तारीखें लगीं, किस वजह से सुनवाई आगे खिसकी, ऐसी सारी जानकारी जस्टिस क्लॉक पर होगी।

- इस पूरे डाटा की निगरानी सीधे लॉ मिनिस्ट्री करेगी। कहीं गड़बड़ लगी तो उस बारे में फौरन संबंधित कोर्ट से जवाब मांगा जाएगा। बता दें कि जस्टिस क्लॉक के बारे में पीएम नरेंद्र मोदी ने भी रविवार को नेशनल लॉ डे इवेंट में बात की थी।

जस्टिस क्लॉक को तैयार करने के तीन बड़े मकसद

1. डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक को आपस में जोड़ना।

2. अदालतों के पेंडिंग केस और इनके निपटारे की रफ्तार पर लगातार नजर रखना।

3. मकसद ये पता लगाना कि अदालतें किस गति से काम कर रही हैं।

हर कोर्ट और जज की रैंकिंग भी तय होगी

- इस आधार पर हर कोर्ट और जज की रैंकिंग भी तय होगी। जिस कोर्ट ने केस निपटाने में देर की, उस कोर्ट और वहां के जज की रैंकिंग बिगड़ेगी। जिस कोर्ट में कम मामले पेंडिंग होंगे, उसे अच्छी रैंकिंग मिलेगी।

- इस रैंकिंग के आधार पर केंद्र और राज्य सरकार तय करेगी कि किस जगह पर मुकदमों के निपटारे की रफ्तार धीमी है। जस्टिस क्लॉक को अदालतों में इंस्टॉल करने का काम एक हफ्ते के भीतर पूरा किए जाने की योजना है। इसका असर सकारात्मक रहा तो जस्टिस क्लॉक एेप भी डेवलप किया जाएगा।

कोर्ट ने अगली तारीख दी तो बतानी पड़ेगी वजह
- लॉ मिनिस्ट्री के मुताबिक, जस्टिस क्लॉक का काम पूरा हो चुका है। इसमें देश के सभी राज्यों की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट और सभी हाईकोर्ट में पेंडिग मामलों की संख्या दर्ज की जा चुकी है। इसे रोज अपडेट किया जाएगा।

- जस्टिस क्लॉक में देश के किसी भी राज्य की किसी भी कोर्ट के किसी भी जज का नाम और केस नंबर डालते ही उस केस से जुड़ा सारा रिकॉर्ड सामने जाता है। ये भी जानकारी मौजूद होगी कि किसी केस में कितनी बार तारीख दी गई और हर बार अगली तारीख देने के पीछे क्या कारण रहा।

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Web Title: kort ke har kes par jstis klok se nazar rkhegai srkar, jjon ko milegai raiking
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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