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मूडीज ने कहा- नोटबंदी, जीएसटी से भारत में आर्थिक सुधार की संभावनाएं बेहतर हुईं

Bhaskar News | Last Modified - Nov 18, 2017, 04:47 AM IST

अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने रेटिंग ‘बीएए3’ से बढ़ाकर ‘बीएए2’ की, इससे निवेश और रोजगार बढ़ेगा
  • मूडीज ने कहा- नोटबंदी, जीएसटी से भारत में आर्थिक सुधार की संभावनाएं बेहतर हुईं
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    13 साल बाद रेटिंग बढ़ाई, फिर भी यह 1988 से 3 रैंकिंग कम। - फाइल

    नई दिल्ली.इंटरनेशनल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने 13 साल बाद भारत की रेटिंग ‘बीएए3’ से बढ़ाकर ‘बीएए2’ कर दी है। उसका कहना है कि नोटबंदी, जीएसटी जैसे आर्थिक सुधारों के कारण विकास की संभावनाएं बेहतर हुई हैं। हालांकि, आउटलुक ‘पॉजिटिव’ से घटाकर ‘स्थिर’ किया है। मूडीज ने 2004 में ‘बीएए3’ रेटिंग दी थी और 2005 में आउटलुक ‘स्थिर’ से ‘पॉजिटिव’ किया था। बीएए2 सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग नहीं है। मूडीज ने 1988 में भारत को ए2 रैंकिंग दी थी, जो अभी से 3 रैंकिंग ज्यादा थी। उस वक्त राजीव गांधी पीएम थे। दो हफ्ते पहले ही वर्ल्ड बैंक ने बिजनेस में आसानी में रैंकिंग 130 से सुधारकर 100 की थी। मूडीज ने 2017-18 में ग्रोथ रेट 6.7% और 2018-19 में 7.5% रहने की संभावना जताई है। सॉवरेन रेटिंग से निवेशकों को जोखिम का अंदाजा मिलता है। बीएए2 का मतलब, यहां निवेश में जोखिम कम है। ‘बीएए3’ निवेश का सबसे निचला ग्रेड है। मूडीज ने पिछले साल भी इसी समय समीक्षा की थी।

    क्यों : मूडीज ने कहा- नोटबंदी, आधार और डीबीटी से इकोनॉमी ज्यादा फॉर्मल होगी
    - आर्थिक सुधारों के उपायों से विकास दर तेज होगी। कर्ज लौटाने की सरकार की क्षमता बढ़ेगी और मध्यम अवधि में कर्ज भी कम होगा।
    - अब तक जो उपाय हुए उनसे बिजनेस का वातावरण सुधारने, निवेश बढ़ाने और अंतत: मजबूत और टिकाऊ विकास में मदद मिलेगी।
    - मौद्रिक नीति में बदलाव, एनपीए से निपटने के उपायों, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी), नोटबंदी, आधार से इकोनॉमी ज्यादा फॉर्मल होगी।

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    असर : विदेश से सस्ता कर्ज जुटा सकेंगी कंपनियां
    - रेटिंग बढ़ने से भारतीय कंपनियों के लिए विदेश से पैसे जुटाना आसान हो जाएगा। उन्हें कम ब्याज पर कर्ज मिलेगा। एफडीआई और एफआईआई में भी बढ़ोतरी होगी। विदेशी निवेश बढ़ने से रुपया मजबूत होगा। स्टॉक, बांड और करेंसी मार्केट के लिए भी यह अच्छा है।

    रेटिंग और बढ़ सकती है, बशर्ते...
    - सरकार का घाटा कम हुआ और निवेश में स्थायी वृद्धि हुई तो रेटिंग में और सुधार हो सकता है। घाटा कम करने के लिए राजस्व बढ़ाने और खर्च कम करने के उपाय करने होंगे। भूमि, श्रम सुधारों से भी रेटिंग बेहतर होगी।


    रेटिंग घट भी सकती है, अगर...
    - घाटा बढ़ा और बैंकिंग सिस्टम की हालत और खराब हुई तो रेटिंग घटाने का दबाव बढ़ेगा। जीएसटी लागू करने की दिक्कतें, निजी निवेश में कमी, बैंकों की एसेट क्वालिटी और भूमि एवं श्रम सुधारों में देरी अन्य चुनौतियां हैं।

    फिच और एसएंडपी ने बीबीबी माइनस रेटिंग दे रखी है
    मूडीज की रेटिंग की 9 कैटेगरी हैं- एएए, एए, ए, बीएए, बीए, बी, सीएए, सीए और सी। एए से सीएए तक की 1,2,3 सब-कैटेगरी भी होती हैं। वैसे रेटिंग एजेंसी फिच ने 2006 में और एसएंडपी ने 2007 में भारत को बीबीबी माइनस रेटिंग दी थी, जो अब भी बरकरार है। यह निवेश की सबसे निचली रैंकिंग है।

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    रेटिंग में सुधार पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि यह सकारात्मक कदमों को देर से मिली मान्यता है। - फाइल
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Web Title: Improves Prospects Of Economic Reform In India After Gst And Demonetisation
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