दिल्ली न्यूज़

--Advertisement--

इंटरनेट एक्सेस में भेदभाव नहीं, कंज्यूमर को हर वेबसाइट पर मिलेगी समान स्पीड : TRAI

सर्विस प्रोवाइडर न तो किसी सर्विस को ब्लॉक कर सकता है, न ही किसी को ज्यादा स्पीड दे सकता है।

Danik Bhaskar

Nov 29, 2017, 06:35 AM IST
सर्विस प्रोवाइडर बेहतर वीडियो सेवा के लिए बाकी सर्विसेस की स्पीड कम नहीं कर सकेगी। (सिम्बॉलिक) सर्विस प्रोवाइडर बेहतर वीडियो सेवा के लिए बाकी सर्विसेस की स्पीड कम नहीं कर सकेगी। (सिम्बॉलिक)

नई दिल्ली. टेलिकाॅम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने मंगलवार को नेट न्यूट्रलिटी पर अपनी सिफारिशें दे दी। रेग्युलेटरी अथॉरिटी ने इंटरनेट को ओपन प्लैटफॉर्म के तौर पर रखने का सिद्धांत बरकरार रखा है। कहा है कि सर्विस प्रोवाइडर इंटरनेट की पहुंच में भेदभाव नहीं कर सकता है। वह न तो किसी एेप, वेबसाइट या सर्विस को ब्लॉक कर सकता है और न ही किसी को दूसरों से तेज स्पीड मुहैया करा सकता है। खास तरह की जरूरतों के लिए ज्यादा स्पीड जरूरी है तो वहां छूट मिलेगी। 55 पेज की सिफारिश में रेग्युलेटरी अथॉरिटी ने नेट न्यूट्रलिटी के लिए लाइसेंस की शर्तों में बदलाव करने को कहा है। सर्विस प्रोवाइडर भेदभाव वाली सेवा के लिए किसी के साथ समझौता भी नहीं कर सकते। ट्राई ने कॉन्टेंट डिलिवरी नेटवर्क को नेट न्यूट्रलिटी से बाहर रखा है।

भारती एयरटेल और रिलायंस जियो को फायदा होगा

- ब्रोकिंग फर्म एडेलवाइज के मुताबिक, इससे भारती एयरटेल और रिलायंस जियो को फायदा होगा। ये कंपनियां पहले से कॉन्टेंट प्लैटफॉर्म पर मौजूद हैं।

- ट्राई चेयरमैन आरएस शर्मा ने कहा कि इंटरनेट खुला और सबकी पहुंच में होना चाहिए। इनोवेशन, स्टार्टअप्स, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और सरकारी एेप्स के लिए यह जरूरी है।

- उन्होंने कहा कि नियमों के वाॅयलेशन पर अलग पेनल्टी की सिफारिश नहीं की गई है। लाइसेंस शर्तों के वॉयलेशन पर जो पेनल्टी है, वही इसमें भी लागू होगी।

कंपनियों के लिए : लाइसेंस से जुड़ी शर्तों में करना पड़ेगा बदलाव

- कॉन्टेंट के बेस पर इंटरनेट एक्सेस में भेदभाव न हो, इसके लिए लाइसेंसिंग शर्तों में बदलाव किया जाए।

- सर्विस प्रोवाइडर ऐसा कोई समझौता नहीं कर सकते, जिससे इंटरनेट एक्सेस में भेदभाव हो।

- पब्लिक इंटरनेट के बजाय अगर सर्विस प्रोवाइडर सिर्फ अपने नेटवर्क में कॉन्टेंट मुहैया कराता है, तो उस पर ये नियम लागू नहीं होंगे।

कंज्यूमर के लिए: वीडियो के लिए बाकी सर्विसेस की स्पीड कम नहीं

- किसी भी वेबसाइट पर समान इंटरनेट स्पीड मिलेगी। उदाहरण के लिए सर्विस प्रोवाइडर बेहतर वीडियो सेवा के लिए बाकी सर्विसेस की स्पीड कम नहीं कर सकेगी।

- ट्राई ने भेदभाव को भी डिफाइन किया है। किसी सर्विस को ब्लॉक करना, डिग्रेड करना, स्पीड कम करना या किसी को ज्यादा स्पीड मुहैया कराना भेदभाव माना जाएगा।

खास सर्विसेस को छूट मुमकिन, डॉट बनाएगा इन सर्विसेस की लिस्ट

- खास कॉन्टेंट के लिए ज्यादा स्पीड दी जा सकती है। डॉट छूट वाली सर्विस की पहचान कर सकता है।

- लेकिन खास कॉन्टेंट को ज्यादा स्पीड देने से इंटरनेट की ओवरऑल क्वालिटी पर असर नहीं पड़ना चाहिए।

- इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर भी यह नीति लागू होगी। इसमें टेली-सर्जरी जैसी अहम सर्विसेस को छूट दी जा सकती है।

मॉनिटरिंग के लिए कमेटी

मॉनिटरिंग करने और नियमों के तोड़ने की जांच के लिए स्पेशल कमेटी की सिफारिश है। इसमें टेलिकॉम ऑपरेटर, आईएसपी, कॉन्टेंट प्रोवाइडर, रिसर्च बॉडी, सिटिजन और कंज्यूमर ऑर्गनाइजेशन के रिप्रेजेंटेटिव होंगे।

अमेरिका में 2015 में बना नियम, अब खत्म करने का है प्रपोजल

- ट्राई की सिफारिशें ऐसे वक्त आई हैं, जब अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशन्स कमीशन के चेयरमैन अजीत पई ने नेट न्यूट्रलिटी को खत्म करने का प्रपोजल रखा है।

- पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय 2015 में यह नियम लागू हुआ था। अजीत पई के प्रप्रोजल पर कमीशन में 14 दिसंबर को वोटिंग होगी। अगर कमीशन की सिफारिशें मानी गईं तो वेराइजन और कॉमकास्ट जैसे इंटरनेट प्रोवाइडर्स चुनिंदा वेबसाइट तक तेज एक्सेस दे सकते हैं।

- सोमवार को कई सांसदों और एक्टिविस्ट्स ने वर्जीनिया में उनके घर के बाहर प्रदर्शन किया। विरोध के तौर पर वे हर 15 मिनट बाद उनके घर पिज्जा भिजवा रहे थे। पई ने कहा कि एक्टिविस्ट उनके परिवार को परेशान कर रहे हैं।

क्या है नेट न्यूट्रलिटी?
- नेट न्यूट्रलिटी यानी अगर आपके पास इंटरनेट प्लान है तो आप हर वेबसाइट पर हर तरह के कॉन्टेंट को एक जैसी स्पीड के साथ एक्सेस कर सकें।
- नेट न्यूट्रलिटी के मायने ये भी हैं कि चाहे आपका टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर कोई भी हो, अाप एक जैसी ही स्पीड पर हर तरह का डाटा एक्सेस कर सकें।
- कुल मिलाकर, इंटरनेट पर ऐसी आजादी जिसमें स्पीड या एक्सेस को लेकर किसी तरह की कोई रुकावट न हो।
- नेट न्यूट्रलिटी टर्मिनोलॉजी का इस्तेमाल सबसे पहले 2003 में हुआ। तब काेलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर टिम वू ने कहा था कि इंटरनेट पर जब सरकारें और टेलिकॉम कंपनियां डाटा एक्सेस को लेकर कोई भेदभाव नहीं करेंगी, तब वह Net Neutrality कहलाएगी।

रेग्युलेटर ने नेट न्यूट्रलिटी के लिए लाइसेंस की शर्तों में बदलाव करने को कहा है। (सिम्बॉलिक) रेग्युलेटर ने नेट न्यूट्रलिटी के लिए लाइसेंस की शर्तों में बदलाव करने को कहा है। (सिम्बॉलिक)
Click to listen..