रिपोर्ट / एसी चेयरकार रेलवे के लिए फायदेमंद सेवा, एसी फर्स्ट क्लास से हो रहा सबसे ज्यादा घाटा

ac chair car is a profitable service for railways cag report says
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ac chair car is a profitable service for railways cag report says

दैनिक भास्कर

Dec 04, 2019, 12:44 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. कैग की रिपोर्ट के अनुसार रेलवे को लगातार फायदा पहुंचाने वाली एसी थ्री टायर श्रेणी के अलावा एसी चेयर कार सेवा भारतीय रेलवे को मुनाफेवाली सेवा है। रिपोर्ट में कहा है कि यह वंदे भारत एक्सप्रेस और तेजस एक्सप्रेस जैसे एसी चेयर कार ट्रेनें शुरू करने को सही ठहराता है जिनमें शयनयान श्रेणी (स्लीपर) सेवाएं नहीं हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा है, ‘‘ रेल सेवाओं की सभी श्रेणियां 2016-17 में घाटे में रहीं, सिर्फ एसी थ्री टायर और एसी चेयर कार सेवाओं ने मुनाफा कमाया।’’ रिपोर्ट के अनुसार 2016-17 में एसी फर्स्ट क्लास 80 प्रतिश से भी ज्यादा घाटे में रहा। आपको बता दें कि भारतीय रेल का ऑपरेटिंग रेश्यो (OR) वित्त वर्ष 2017-18 में 98.44 फीसदी रहा हो जो पिछले 10 साल में सबसे खराब है।


एसी फर्स्ट क्लास 80.27 प्रतिशत घाटे में
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016-17 में यात्री सेवाओं के विभिन्न वर्गों में नुकसान का प्रतिशत 13.60 ( सेकंड एसी) से लेकर 80.27 (फर्स्ट एसी ) तक है। ईएमयू उपनगरीय ट्रेन सेवाओं पर नुकसान 64.74% था।


रियासतों के कारण हो रहा नुकसान
संसद के दोनों सदनों में सोमवार को पेश की गई कैग की रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2015-16, 2016-17 और 2017-18 में रेलवे के कुल यात्रियों में से 11.45 फीसदी ने विभिन्न प्रकार की रियायतों का उपभोग किया जिसमें रेलवे को किराए से होने वाली आय 8.42 फीसदी की कमी दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार इन तीन साल के दौरान लगभग 21.75 करोड़ यात्रियों ने तकरीबन 7418.44 करोड़ रुपए की रियायत हासिल की।


क्या होता है ऑपरेटिंग रेश्यो?
इस ऑपरेटिंग रेश्यो का मतलब यह है कि रेलवे ने 100 रुपए कमाने के लिए कितने रुपए खर्च किए। इस रेश्यो से यह देखा जाता है कि रेलवे की फाइनें​शियल स्थिति कैसी है।


किस साल कितना ऑपरेटिंग रेश्यो रहा?
रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2008-09 में रेलवे का ऑपरेटिंग रेश्यो 90.48 फीसदी, 2009-10 में 95.28 फीसदी, 2010-11 में 94.59 फीसदी, 2011-12 में 94.85 फीसदी, 2012-13 में 90.19 फीसदी, 2013-14 में 93.6 फीसदी, 2014-15 में 91.25 फीसदी, 2015-16 में 90.49 फीसदी, 2016-17 में 96.5 फीसदी और 2017-18 में 98.44 फीसदी दर्ज किया गया।

तेजस को पहले महीने हुआ था 70 लाख रुपए का मुनाफा
देश की पहली निजी ट्रेन 'तेजस एक्सप्रेस' को अक्टूबर में 70 लाख रुपए का मुनाफा हुआ है। रेलवे सूत्रों के मुताबिक, पिछले महीने इस ट्रेन के टिकटों की बिक्री से करीब 3.70 करोड़ रुपए का राजस्व मिला। इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) दिल्ली से लखनऊ के बीच इस ट्रेन को संचालित करता है। ये एक ऐसी चेयर कार ट्रेन है। 

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