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ऑनलाइन फ्रॉड / ठगी का नया तरीका, ई-कॉमर्स ऐप का क्लोन बनाकर लोगों को बनाते हैं शिकार, ऐसे बचें



new way to online frauds and measures to Avoid
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new way to online frauds and measures to Avoid

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 07:07 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. ऑनलाइन शॉपिंग का क्रेज बढ़ने के साथ-साथ ऑनलाइन ठगी के मामले  भी बढ़ रहे हैं। ठग भी लोगों को शिकार बनाने के नए-नए तरीके खोज रहे हैं। अब ये ऑनलाइन खरीदारी की सुविधा देने वाली कंपनियों के ऐप्स का क्लोन बनाकर ठगी कर रहे हैं। भास्कर ने इंडियन साइबर आर्मी के चेयरमैन किसलय चौधरी से ठगी के नए तरीकों और उनसे बचाव के बारे में बात की...

समझें ऑनलाइन ठगी का नया तरीका और कैसे बचें

  1. फेक यूआरएल (वेबसाइट्स) की मदद से ठगी

    • ठगी करने वाले लोग किसी भी वेबसाइट के नाम से मिलती-जुलती एक दूसरी साइट बना देते हैं।
    • इसे ओपन करने पर यह बिलकुल असली साइट के जैसी ही दिखती है। हालांकि, असली साइट से इसका कुछ भी लेना-देना नहीं होता है।
    • ऐसी साइट्स बनाने के बाद गूगल एडवर्ड्स पर डाल कर इन्हें ट्रेंड करा दिया जाता है। ऐसा करने पर ये साइट्स सर्च इंजन में भी ऊपर दिखाई देती हैं।
    • इन साइट्स पर काफी कम कीमत में सामान दिखाया जाता है। जिससे ग्राहक प्रभावित होते हैं और सस्ते के चक्कर में ऑनलाइन पेमेंट कर देते हैं। ग्राहकों से पेमेंट लेने के बाद ये लिंक डिएक्टिवेट हो जाते हैं।


    बचाव: इस तरह की ठगी से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि जिस भी साइट से शॉपिंग करना चाहते हों उसका प्रॉपर यूआरएल ब्राउजर के एड्रेस बार में टाइप करके ही साइट पर जाएं और खरीदारी करें।

  2. क्लोन ऐप के माध्यम से ठगी

    • गूगल के प्ले स्टोर पर ऐप लॉन्च करना काफी आसान है।
    • इसी का फायदा उठाकर ठगी करने वाले फेमस ई-कॉमर्स साइट्स के ऐप का क्लोन (नाम और फीचर में मिलता-जुलता ऐप) बना कर प्ले स्टोर पर अपलोड कर देते हैं।
    • ऐसे में लोग जब प्ले स्टोर पर किसी ऐप को सर्च करते हैं तो कई बार क्लोन ऐप को ही असली ऐप समझ कर डाउनलोड कर लेते हैं और उन्हीं पर शॉपिंग करने लगते हैं।

    बचाव: इस स्थिति से बचने के लिए ग्राहकों को चाहिए कि वे जिस भी ई-कॉमर्स साइट का ऐप डाउनलोड करना चाहते हैं उसकी साइट पर जाएं और वहां पर दिए गए ऐप डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें। यह लिंक यूजर को प्ले स्टोर पर रीडायरेक्ट कर देता है। जहां से ऑफिशियल ऐप डाउनलोड किया जा सकता है।

  3. फेक और प्रमोशनल कॉल्स

    • आजकल ये तरीका काफी चलन में है। ठग लोगों को फोन करते हैं और उन्हें बताते हैं कि उनको फलां कंपनी की तरफ से लकी कस्टमर चुना गया है।
    • वे उन्हें यह भी बताते हैं कि लकी कस्टमर होने के कारण आपको 50 हजार का मोबाइल सिर्फ 7 हजार या 10 हजार में मिलेगा। इसके लिए आपको ये पैसे कंपनी के अकाउंट में जमा कराने होंगे।
    • आईएमपीएस जैसी तकनीक आ जाने से किसी को पेमेंट करते वक्त सामने वाले खाताधारक के नाम की खास जरूरत नहीं होती है। मतलब अगर खाता धारक का नाम गलत है तो भी पैसे उसके अकाउंट में चले जाएंगे। ऐसे में ठग कंपनी का फर्जी नाम बताकर पेमेंट ले लेते हैं।

    बचाव: इस तरह की ठगी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि इन फोन कॉल्स के चक्कर में न पड़ें। कोई भी कंपनी इस तरह फोन करके ऑफर नहीं देती है।

  4. सिम स्वैपिंग और ओटीपी की मदद से ठगी

    ये ऑनलाइन ठगी का नया ट्रेंड है। ठग फोन करके यूजर को किसी नम्बर पर एसएमएस करने को कहते हैं और उसके एसएमएस करने के बाद उसका नम्बर खुद अपने पास एक्टिवेट करवा लेते हैं।

    नम्बर एक्टिवेट करवाने के बाद उस नम्बर से रजिस्टर्ड बैंक अकाउंट या वॉलेट से पैसे अपने खाते में ट्रांसफर कर लेते हैं।

     

    बचाव: इस तरह की ठगी से बचने के लिए जरूरी है कि किसी भी अनजान व्यक्ति (भले ही वह फोन पर कोई अधिकारी होने का दावा कर रहा हो) के कहने पर किसी भी नम्बर पर मैसेज न करें। इसके अलावा किसी के साथ अपने क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड की डिटेल्स न शेयर करें और न ही किसी को ओटीपी बताएं।

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