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न्याय व्यवस्था / डेथ वारंट में होता है फांसी का समय, जगह और तारीख का जिक्र

प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो
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प्रतीकात्मक फोटोप्रतीकात्मक फोटो

दैनिक भास्कर

Jan 07, 2020, 04:37 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. निर्भया केस के चारों गुनहगारों के डेथ वारंट पर कोर्ट थोड़ी देर में फैसला सुना सकता है। पटियाला हाउस कोर्ट निर्भया के माता-पिता ने अपनी याचिका में चारों दोषियों को फांसी पर लटकाए जाने की मांग की है। साथ ही चारों के खिलाफ डेथ वारंट जारी करने की अपील भी की है। ऐसे में कई लोगों के मन में डेथ वॉरंट तो आइए जानते हैं विस्तार से।


डेथ वॉरंट में फांसी का समय, जगह और तारीख का जिक्र होता है
डेथ वॉरंट को ब्लैक वॉरंट भी कहते हैं। इसमें फॉर्म नंबर-42 होता है, जिसमें फांसी का समय, जगह और तारीख का जिक्र होता है। इसमें फांसी पाने वाले सभी अपराधियों के नाम भी लिखे जाते हैं। इसमें ये भी लिखा होता है कि अपराधियों को फांसी पर तब तक लटकाया जाएगा, जब तक उनकी मौत नहीं हो जाती। अगर कोर्ट डेथ वॉरंट जारी करने की मंजूरी दे देता है तो दोषियों को इसके खिलाफ अपील करने के लिए 14 दिन का वक्त मिलेगा। अपील हाईकोर्ट में करनी होगी। अगर अपील नहीं की तो 14 दिन बाद दोषियों को फांसी दे दी जाएगी।


डेथ वॉरंट से जुड़ी खास बातें

  • नियमों के आधार पर डेथ वॉरंट लोअर कार्ट भी जारी कर सकता है।
  • डेथ वारंट भजे ही कोर्ट से जारी होता हो पर फांसी का समय जेल सुपरिंटेंडेंट निश्चित करता है।
  • इसके बाद सुपरिंटेंडेंट तय समय की जानकारी कोर्ट को देता है।
  • नियमों के अनुसार डेथ वॉरंट जारी होने के 15 दिनों बाद फांसी दी जाती है। पर ये नियम सरकार द्वारा बदला जा सकता है।
  • फांसी दिए जाने के समय सभी कैदी अपनी बैरक में ही रहते हैं।

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