रिपोर्ट / रियायत और फ्री पास के दुरुपयोग से रेलवे ऑपरेटिंग रेशियो बिगड़ा, हो रहा करोड़ों का नुकसान

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  • ऑपरेटिंग रेशियो का मतलब यह है कि रेलवे ने 100 रुपए कमाने के लिए कितने रुपए खर्च किए
  • 2017-18 में ऑपरेटिंग रेशियो 98.44 फीसदी रहा हो जो पिछले 10 साल में सबसे खराब है

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2019, 12:06 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. भारतीय रेल का ऑपरेटिंग रेश्यो (OR) वित्त वर्ष 2017-18 में 98.44 फीसदी रहा हो जो पिछले 10 साल में सबसे खराब है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार बता दें कि वित्त वर्ष 2016-17 में रेलवे का ऑपरेटिंग रेश्यो 96.50 फीसदी था। कैग की रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि रेलवे को आंतरिक राजस्व बढ़ाने के लिए उपाय करने चाहिए।


रियायतों को लेकर लगाई रेलवे की फटकार
कैग ने रेल यात्री किरायों में रियायतों विशेषकर रेलवे अधिकारियों को मिलने वाले विशेष पास के दुरुपयोग के कारण करोड़ों रुपए के नुकसान के लिए रेलवे को फटकार लगाई है और रियायतों को युक्तिसंगत और उनकी नियंत्रण प्रणाली को प्रभावी बनाने की सिफारिश की है।


रियासतों के कारण हो रहा नुकसान
संसद के दोनों सदनों में सोमवार को पेश की गई कैग की रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2015-16, 2016-17 और 2017-18 में रेलवे के कुल यात्रियों में से 11.45 फीसदी ने विभिन्न प्रकार की रियायतों का उपभोग किया जिसमें रेलवे को किराए से होने वाली आय 8.42 फीसदी की कमी दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार इन तीन साल के दौरान लगभग 21.75 करोड़ यात्रियों ने तकरीबन 7418.44 करोड़ रुपए की रियायत हासिल की।


क्या होता है ऑपरेटिंग रेश्यो?
इस ऑपरेटिंग रेश्यो का मतलब यह है कि रेलवे ने 100 रुपए कमाने के लिए कितने रुपए खर्च किए। इस रेश्यो से यह देखा जाता है कि रेलवे की फाइनें​शियल स्थिति कैसी है।


किस साल कितना ऑपरेटिंग रेश्यो
रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2008-09 में रेलवे का ऑपरेटिंग रेश्यो 90.48 फीसदी, 2009-10 में 95.28 फीसदी, 2010-11 में 94.59 फीसदी, 2011-12 में 94.85 फीसदी, 2012-13 में 90.19 फीसदी, 2013-14 में 93.6 फीसदी, 2014-15 में 91.25 फीसदी, 2015-16 में 90.49 फीसदी, 2016-17 में 96.5 फीसदी और 2017-18 में 98.44 फीसदी दर्ज किया गया।

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