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यूटिलिटी डेस्क. अगर आपने क्रेडिट और डेबिट कार्ड से 16 मार्च तक ऑनलाइन या कॉन्टैक्टलेस ट्रांजैक्शन नहीं किया तो आपके कार्ड की ये सुविधा बंद की जा सकती है। अगर आप चाहते हैं कि आपके कार्ड पर मिलने वाली यह सर्विस बंद न हो तो 16 मार्च से पहले इसका कम से कम एक बार उपयोग जरूर करें। इसके अलावा भी 16 मार्च से बैंकिंग से जुड़े कई नियमों में बदलाव होगा। इसके तहत आप चौबीसों घंटे सातों दिन (24x7) किसी भी समय अपने कार्ड को ऑन/ऑफ कर सकते हैं या ट्रांजैक्शंस लिमिट में बदलाव कर सकेंगे हैं।
क्या होता है कॉन्टैक्टलेस ट्रांजैक्शन?
इस टेक्नॉलजी की मदद से कार्ड होल्डर को ट्रांजैक्शन के लिए स्वाइप करने की जरूरत नहीं होती है। पॉइंट ऑफ सेल (POS) मशीन से कार्ड को सटाने पर पेमेंट हो जाता है। कॉन्टैक्टलेस क्रेडिट कार्ड में दो तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है - ‘नियर फील्ड कम्युनिकेशन’ और ‘रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन’ (आरएफआईडी)। जब इस तरह के कार्ड को इस तकनीक से लैस कार्ड मशीन के पास लाया जाता है, तो पेमेंट अपने-आप हो जाता है। मशीन की 2 से 5 सेंटीमीटर की रेंज में भी कार्ड को रखा जाए तो पेमेंट हो सकता है। इससे कार्ड को किसी मशीन में डालने या उसे स्वाइप करने की जरूरत नहीं पड़ती। न ही पिन या ओटीपी डालने की जरूरत होती है। कॉन्टैक्टलेस पेमेंट की अधिकतम सीमा 2,000 रुपए होती है। एक दिन में पांच कॉन्टैक्टलेस ट्रांजैक्शन किए जा सकते हैं। इससे ज्यादा राशि के पेमेंट के लिए पिन डालने या ओटीपी की जरूरत होती है।
ऐसे काम करता है कॉन्टैक्टलेस कार्ड
इन कार्ड्स और मशीनो पर एक खास चिन्ह बना होता है। इस मशीन पर करीब 4 सेंटीमीटर की दूरी पर कार्ड रखना या दिखाना होता है और आपके खाते से पैसे कट जाते हैं। यानी कार्ड को स्वाइप या डिप करने की जरूरत नहीं होती और न ही पिन एंटर करना होता है।
16 मार्च से लागू हो रहे हैं आरबीआई के ये नियम
लगातार बढ़ रहे बैंकिंग फ्रॉड
आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार डिजिटल लेनदेन के चलते साल 2018-19 में 71,500 करोड़ रुपए का बैंकिंग फ्रॉड हुआ है। इस अवधि में बैंक फ्रॉड के 6800 से अधिक मामले प्रकाश में आए।
साल 2017-18 में बैंक फ्रॉड के 5916 मामले सामने आए थे। इनमें 41,167 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी हुई थी।पिछले 11 वित्त वर्ष में बैंक फ्रॉड के कुल 53,334 मामले प्रकाश में आये हैं, जबकि इनके जरिये 2.05 लाख करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है।
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