एनकाउंटर / 5 पाइंट में समझिए क्या होता है एनकाउंटर, सुप्रीम कोर्ट 2015 में जारी कर चुका है गाइडलाइन

Understand what happens in 5 points encounter, Supreme Court has issued guidelines in 2015
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Understand what happens in 5 points encounter, Supreme Court has issued guidelines in 2015

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2019, 05:33 PM IST
यूटिलिटी डेस्क. शुक्रवार सुबह तेलंगाना दुष्कर्म के चारों आरोपियों का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया। इसी के बाद से पुलिस का एक्शन चर्चा में है। हमने वकील और पुलिस के अधिकारियों से जाना कि एनकाउंटर क्या होता है? और इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट की क्या गाइडलाइन है? एनकाउंटर का सामान्य अर्थ होता है मुठभेड़ जो एक तरह का हिंसात्मक संघर्ष है। 'पुलिस या किसी अन्य सशस्त्र बल द्वारा, अपनी रक्षा करने के लिए, किसी अपराधी या आतंकवादी को मार गिराना' पुलिस एनकाउंटर कहलाता है। 'मुठ भेड़' या 'एनकाउंटर' शब्दों का उपयोग भारत में 20वीं शताब्दी से हो रहा है। हालांकि एनकाउंटर को लेकर कई बार विवाद भी होते रहे हैं। कुछ मानवाधिकार संगठन और कुछ अन्य लोग इसे गलत बताते रहे हैं।

इन आसान पाइंड्स से समझें क्या होता है एनकाउंटर 

  1. कब किया जाता है एनकाउंटर?

    पुलिस के अनुसार आमतौर पर दो तरह के एनकाउंटर होते हैं पहला जिसमें कोई खतरनाक अपराधी पुलिस या सुरक्षाबलों की कस्टडी से भागने की कोशिश करता है ऐसे और पुलिस को उसे रोकने या पकड़ने के लिए उसके खिलाफ बंदूक का प्रयोग करना पड़ता है। वहीं एनकाउंटर का दूसरा प्रकार वह होता है जब पुलिस किसी अपराधी को पकड़ने जाती है और वो पुलिस से बचने के लिए भागता है और ऐसे में पुलिस को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ती है। इसके अलावा किसी अपराधी द्वारा पुलिस पर हमला करने पर भी पुलिस एनकाउंटर कर सकती है।

  2. अपराधी पर हथियार का प्रयोग करने से पहले दी जाती है चेतावनी

    आमतौर पर जब एनकाउंटर की स्थिति बनती है तो पुलिस अपराधी पर सीधे हथियार का प्रयोग करने से पहले उसे चेतावनी देती है इसके बाद हवाई फायर करती है। अगर इस पर भी अपराधी नहीं रुकता है और भागने की कोशिश करता है या पुलिस पर हमला करता है तो उसके पैर पर गोली मारी जाती है, फिर भी स्थिति नियंत्रण में न आए तो पुलिस शरीर के अन्य हिस्सों पर फायर करती है।

  3. हर एनकाउंटर की जांच जरूरी

    सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में पुलिस एनकाउंटरों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी करते हुए हर एनकाउंटर की जांच को अनिवार्य किया था। ये जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाती है और जांच खत्म होने तक इसमें शामिल पुलिसकर्मियों को प्रमोशन या वीरता पुरस्कार नहीं मिलता। सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइन के अनुसार, सीआरपीसी की धारा 176 के तहत हर एनकाउंटर की मजिस्ट्रेट से जांच अनिवार्य होती है। पुलिसकर्मियों को हर एनकाउंटर के बाद इस्तेमाल किए गए हथियार व गोलियों का हिसाब देना होता है।

  4. गलत एनकाउंटर करने पर पुलिसकर्मियों के साथ क्या होता है?

    सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार अनुचित एनकाउंटर में दोषी पाए गए पुलिसकर्मी को निलंबित करके उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाती है। अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती है तो पीडित सत्र न्यायाधीश से इसकी शिकायत कर सकता है।

  5. एकाउंटर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश

    • खुफिया गतिविधियों की सूचना लिखित या इलेक्ट्रोनिक तरीके से आंशिक रूप में ही सही पर रिकॉर्ड अवश्य की जानी चाहिए।
    • यदि सूचना के आधार पर पुलिस एनकाउंटर के दौरान हथियारों का इस्तेमाल करती है और ऐसे संदिग्ध की मौत हो जाती है तो आपराधिक जांच के लिए एफआईआर अवश्य दर्ज हो।
    • ऎसी मौतों की जांच एक स्वतंत्र सीआईडी टीम करे जो आठ पहलुओं पर जांच करे।
    • एनकाउंटर में हुई सभी मौतों की मजिस्टेरियल जांच जरूरी।
    • एनकाउंटर में हुई मौत के संबंध में तत्काल राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग या राज्य आयोग को सूचित करें।
    • अगर एनकाउंटर में अपराधी घायल होता है तो एसे मैडिकल की सुविधा दी जाए।
    • अपराधी की मौत पर रिश्तेदारों को सूचित करें।
    • एनकाउंटर में हुई मौत में शामिल पुलिस अधिकारियों को वीरता पुरस्कार नहीं दिए जाएं।
    • गलत या फर्जी एनकाउंटर में दोषी पाए गए पुलिसकर्मी को निलंबित कर उन पर उचित कार्रवाई की जाती है।
    • इन दिशा निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है तो पीडित सत्र न्यायाधीश से इसकी शिकायत कर सकता है जो इसका संज्ञान अवश्य लेंगे।

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