ITR / इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए बेसिक टर्म्स की जानकारी होना जरूरी



itr ; use full tips for income tax return
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itr ; use full tips for income tax return

  • करदाता की टैक्स-फ्री आमदनी और अलाउंसेस को घटाने के बाद बची आय को ग्रॉस इनकम कहते हैं।
  • आपकी आमदनी पर सरकार टैक्स काटती है। इसे टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स कहते हैं। 

Dainik Bhaskar

Aug 06, 2019, 04:42 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. आयकर विभाग ने 2018-19 के आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तारीख एक महीने बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी है। आपको इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय न तो कोई दस्तावेज जमा करना होता है और न ही कोई दस्तावेज अपलोड करना होता है। आपको सिर्फ रिटर्न में मांगी गई जानकारी को अपने दस्तावेजों के मुताबिक सही भरना होता है। अगर आपने अब तक अपना रिर्टन फाइल नहीं किया है तो हम आपको कुछ ऐसे बेसिक टर्म्स के बारे में बता रहे हैं जो ITR भरने में आपके बहुत काम आ सकते हैं।

दस प्वाइंट्स में समझें बेसिक टर्म्स

  1. करदाता आयकर अधिनियम की धारा 2(7) के अनुसार करदाता का मतलब ऐसे व्यक्ति से है जो आयकर विभाग को राशि (ब्याज दंड आदि) देने के लिए उत्तरदायी है। वह करदाता कहलाता है।

  2. फाइनेंशियल इयर एक अप्रैल से 31 मार्च तक के समय को फाइनेंशिल इयर कहते हैं। उदाहरण के तौर पर एक अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2018 तक के समय को फाइनेंशिल इयर 2017-18 कहा जाएगा। इस बार हम जो रिटर्न भर रहे हैं ये फाइनेंशिल इयर 2017-18 के लिए है।

  3. कई तरह के निवेश और खर्च पर इनकम टैक्स विभाग आयकर नियमों के तहत आपको टैक्स छूट देता है। आप जो निवेश करते हैं इसके आधार पर टैक्स छूट का दावा करते हैं। इस पर आयकर विभाग आपको टैक्स रिफंड करता है। टैक्स में मिलने वाली छूट डिडक्शन कहलाती है।

  4. ग्रॉस इनकम करदाता की टैक्स-फ्री आमदनी और अलाउंसेस को घटाने के बाद साल की कुल आय को ग्रॉस इनकम कहा जाता है। ग्रॉस इनकम हमेशा 80C से 80U तक मिलने वाले डिडक्शन से पहले वाली इनकम होती है।

  5. टैक्सेबल इनकमग्रॉस इनकम में आयकर की धारा 80C से 80U तक मिलने वाली टैक्स छूट लेने के बाद जो इनकम आती है, उसे टैक्सेबल इनकम कहते हैं। मतबल डिडक्शन से पहले वाली इनकम ग्रॉस इनकम और डिडक्शन के बाद वाली इनकम को टैक्सेबल इनकम कहलाती है।

  6. टीडीएस की हिसाबआपकी आमदनी पर सरकार टैक्स काटती है। इसे टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स कहते हैं। आपकी कंपनी टैक्स की रकम काटकर बाकी रकम आपको सैलरी में देती है। जितना टैक्स काटा है उसे आयकर विभाग के खाते में जमा करती है। आपके रिकार्ड समेत।

  7. टीडीएस काटने का काम एंम्प्लॉयर या पेमेंट करने वाली संस्था का है। इसे काटना या जमा करना लेने वाले की जिम्मेदारी नहीं है।

  8. सीनियर सिटीजन जिन लोगों की उम्र 31 मार्च 2018 को 60 साल या उससे ज्यादा, लेकिन 80 साल से कम है, उन्हें सीनियर सिटिजन माना जाएगा। इसी तरह 31 मार्च 2018 को 80 साल या उससे ज्यादा उम्र वाले सुपर सीनियर सिटिजंस कहलाते हैं। उम्र की गणना उस फाइनेंशियल इअर से होती है जिसमें आप टैक्स भर रहे होते हैं।

  9. इनकम टैक्स रिफंड अगर किसी टैक्सपेयर का सरकार ज्यादा टैक्स काट लिया है तो वह वापस लेने के लिए निवेश के दावे करता है। जिस पर आयकर विभाग छीट देता है। उसके बाद अगर विभाग के पास करदाता का पैसा है तो उसे विभाग पैसे वापस कर देता है। जिसको टैक्स रिफंड कहते हैं। यह राशि करदाता के खाते में आती है।

  10. अगर आप कहीं नौकरी करते हैं तो आपका एम्प्लॉयर आपको एक फॉर्म 16 देता है। यह फॉर्म अब तक आपके एम्प्लॉयर ने आपको दे दिया होगा। फार्म 16 A के अंतर्गत करदाता को सैलरी के अलावा अगर दूसरे स्त्रोतों से आमदनी हुई है और उस पर टीडीएस कट चुका हो तो उस संस्था से भी टीडीएस सर्टिफिकेट लेना चाहिए। इस सर्टिफिकेट को ही फॉर्म 16ए कहा जाता है।

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