काम की बात / कन्फर्म सीटों में बदलाव और व्हीलचेयर उपलब्धन कराने पर एयर इंडिया को देने पड़े पांच लाख रुपए

एयरलाइंस ने अपनी गलती तो मानी पर किसी कर्मचारी को सजा नहीं दी।

case of consumer forum of air india
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case of consumer forum of air india

Dainik Bhaskar

May 08, 2019, 03:35 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. कोलकाता के रहने वाले गोकुल चंद्र चक्रवर्ती और उनकी पत्नी सीमा चक्रवर्ती ने कोलकाता से अमेरिका के शिकागो जाने के लिए एयर इंडिया से आने-जाने की टिकट 1,45,396 रुपए में बुक कराई। उनको जारी टिकट के मुताबिक उनको कोलकाता से दिल्ली के लिए सीट नं. 10 ई और 10 एफ तथा दिल्ली से शिकागो के लिए सीट नं. 20 एच और 20 जे अलॉट की गई थीं। विमान में झटके आदि से बचने के लिए ही उन्होंने इन सीटों का चयन किया था। इसके अलावा श्रीमती सीमा चक्रवर्ती के लिए उन्होंने व्हीलचेयर उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया था, जिसे एयर इंडिया की ओर से मान लिया गया था।

ये है पूरा मामला

  1. 7 मई 2014 को जब चक्रवर्ती दंपत्ति कोलकाता में एयर इंडिया के चेक इन काउंटर पर पहुंचे तो उन्हें कहा गया कि वह काउंटर ढाका के लिए है, जबकि ऐसा कहीं पर लिखा नहीं गया था। गोकुल चंद्र चक्रवर्ती के कहने पर उन्हें उसी काउंटर से बोर्डिंग पास तो जारी कर दिए गए, लेकिन उनकी सीटें बदल दी गईं।

    • इनमें दिल्ली से शिकागो जाने वाली फ्लाइट में उन्हें 20 एच और 20 जे की जगह विमान के एकदम पिछले हिस्से में स्थित 52 जे और 52 के नंबर की सीटें दी गईं। इसके अलावा दिल्ली में व्हील चेयर भी उपलब्ध नहीं कराई गई। विमान के पिछले हिस्सें में बैठने से दोनों को काफी झटकों का सामना करना पड़ा।
    • जिससे दोनों बीमार हो गए और वे उन कार्यक्रमों में भी शामिल नहीं हो सके जिनके लिए वे अमेरिका गए था। उन्होंेने अपनी परेशानियों के बारे में 5 जून 2014 को एक ई-मेल एयर इंडिया को भेजा और मुआवजे की मांग की। 29 जून को एयर इंडिया ने इसके जवाब में माफी मांगी पर मुआवजा देने से इनकार कर दिया।
    • इस पर चक्रवर्ती दंपत्ति ने मुआवजे के रूप में 31,45,306 रु. और नुकसान के लिए 50,00,000 रु. 18% ब्याज के साथ दिलाने के कोलकाता के राज्य उपभोक्ता आयोग में शिकायत की। एयर इंडिया ने अपने जवाब में सभी आरोपों को नकार दिया। उन्होंने कहा कि कम संख्या में होने के कारण व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।
    • इसके अलावा सीटों में बदलाव तकनीकी कारणों से हुआ। साथ ही तर्कदिया कि बुक कराई गई टिकट में दी जाने वाली सीटें बदली जा सकती हैं। एयर इंडिया ने साथ ही कहा कि झटके लगने की बात भी गलत है, क्योंकि विमान के किसी भी और यात्री ने इसकी शिकायत नहीं की है।

  2. राज्य आयोग ने कहा कि कनफर्म सीट होने के बावजूद उनमें बदलाव किया गया। जब उक्त यात्रियों ने सीटों में बदलाव के बारे में संबंधित कर्मचारी से शिकायत की तो उसे तत्काल ठीक क्यों नहीं किया। इसके अलावा दो महीने पहले टिकट बुक कराते समय ही व्हील चेयर का आग्रह किया गया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

    • इसकी वजह से दिल्ली में उन्हें काफी कठिनाई हुई। आयोग ने कहा कि यह भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की गाइडलाइंस का भी उल्लंघन है। एयरलाइंस ने अपनी गलती तो मानी पर किसी को भी इसके लिए दंडित नहीं किया।
    • आयोग ने कहा कि उनके सामने ऐसा कोई सबूत नहीं दिया गया है, जिससे यह साबित हो कि शिकायतकर्ता बीमार हो गए थे। राज्य आयोग ने 30 जनवरी 2017 को दिए आदेश में एयर इंडिया को कहा कि वह चक्रवर्ती दंपत्ति को 15 लाख रुपए मुआवजा 30 दिन के भीतर अदा करे। 

  3. राज्य आयोग के इस आदेश को एयर इंडिया ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में चुनौती दी। 5 अप्रैल 2019 को आयोग के अध्यक्ष जस्टिस आर.के. अग्रवाल और श्रीमती एम श्रीश ने अपने आदेश में माना कि एयर इंडिया के स्तर पर इस पूरे मामले में लापरवाही हुई है।

    • हालांकि उन्होंने राज्य आयोग द्वारा दिए गए 15 लाख के मुआवजे को भी काफी अधिक माना, क्योंकि इस बात का कोई सबूत नहीं था कि चक्रवर्ती दंपति को बीमार हाेने की वजह से अमेरिका में अपने सभी कार्यक्रमों को छोड़ना पड़ा था। राष्ट्रीय आयोग ने मुआवजे की रकम को पांच लाख कर दिया और बाकी खर्च समेत चक्रवर्ती दंपत्ति को सवा पांच लाख रुपए देने का आदेश दिया।
       

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