कंज्यूमर फोरम / लोन की रकम न देने के बाद भी बैंक ने 2 साल तक वसूला ब्याज, ग्राहक 9 साल लड़कर जीता



case study bank could not take interest if consumer not received loan amount
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case study bank could not take interest if consumer not received loan amount

Dainik Bhaskar

Jan 09, 2019, 04:06 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. महाराष्ट्र के ठाणे में रहने वाले राजेंद्र सदाशिव परदेसी ने ठाणे के टेंभी नाका स्थित एसबीआई की मेन ब्रांच से लोन लिया था, लेकिन बैंक ने लोन की रकम नहीं दी। इसके बावजूद बैंक दो साल तक उनसे इस पर ब्याज वसूलता रहा। आपत्ति जताने पर बैंक ने कहा कि उसने चेक जारी कर दिया है, लेकिन इन्हें नहीं मिला। इसके बाद बैंक ने 2009 में फिर चेक जारी किया, लेकिन दो साल तक वसूला ब्याज नहीं लौटाया। इसे राजेंद्र ने उपभोक्ता फोरम में चुनौती दी और अपना अधिकार पाया।

ये था मामला

  1. राजेंद्र ने 23 जुलाई 2007 को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ठाणे के टेंभी नाका में माजदा कॉम्प्लेक्स स्थित मेन ब्रांच से 5 लाख 61 हजार रुपए के होम लोन के लिए आवेदन किया था।

  2. बैंक ने पूरी प्रक्रिया अपनाने के बाद उनका लोन मंजूर कर दिया। इसके बाद उन्होंने बिल्डर या डेवलपर को बुकिंग की रकम चुका दी। बाकी रकम बैंक से मिलने वाले लोन के चेक के तौर पर सीधे बिल्डर को दी जानी थी।

  3. कुछ समय बाद डेवलपर ने राजेंद्र को बताया कि उसे बैंक से चेक नहीं मिला है। इस पर राजेंद्र ने बैंक से पूछताछ की, तो बैंक ने कहा कि उसने चेक जारी कर दिया है। इस पूरी प्रक्रिया में दो साल लग गए।

  4. इसके बाद 2009 में राजेंद्र ने बैंक से शिकायत की कि डेवलपर को चेक नहीं दिया गया, लेकिन बैंक ब्याज वसूल रहा है। ऐसा कैसे हो सकता है?

  5. इस पर बैंक ने अप्रैल 2009 में एक और चेक जारी कर दिया। लेकिन ब्याज लोन तय करने की तारीख यानी 23 जुलाई 2007 से वसूलना शुरू कर दिया। जब राजेंद्र ने इसकी शिकायत की तो बैंक ने कहा कि ब्याज तो लोन डिस्बर्समेंट की पहले की तारीख से ही लगेगा।

ब्याजमाफी के साथ मिला हर्जाना भी

  1. बैंक रवैए से परेशान राजेंद्र ने जिला उपभोक्ता फोरम में चुनौती दी। करीब 6 साल तक चले केस के बाद 13 जनवरी 2015 को फोरम ने भी राजेंद्र की दलीलें मानी और उनके पक्ष में फैसला दिया।

  2. फोरम ने इसे सेवा में कमी और लापरवाही माना। इसके लिए फोरम ने 1 सितंबर 2007 से 31 मार्च 2009 तक राजेंद्र से वसूली गई ब्याज की रकम, मानसिक प्रताड़ना और कोर्ट के खर्च के लिए 50 हजार रुपए चुकाने का आदेश बैंक को दिया। फोरम ने यह भी कहा कि अगर बैंक 40 दिन में इस फैसले का पालन नहीं करता, तो इस रकम पर 6 फीसदी की दर से ब्याज भी चुकाना होगा।

  3. अब तक इस केस को 11 साल हो चुके थे। बैंक ने राज्य आयोग के फैसले को राष्ट्रीय आयोग में चुनौती दी। वहां भी राजेंद्र के पक्ष में फैसला आया।

  4. फोरम के सदस्य प्रेम नारायण ने अपने फैसले में लिखा- इस मामले में बैंक की लापरवाही और सेवा में कमी स्पष्ट नजर आती है। बैंक ने 2009 में दोबारा चेक जारी किया इसी से स्पष्ट होता है कि 2007 में बैंक के खाते से लोन की रकम नहीं कटी थी। क्योंकि 2007 में चेक भुनाया ही नहीं गया था। जाहिर है कि कोई भी बैंक एक ही लोन के लिए दो बार रकम जारी नहीं करेगा।

  5. उन्होंने आगे लिखा- जब चेक ही 2009 में जारी हुआ तो 2007 से बैंक ब्याज कैसे वसूल सकता है। इसलिए राज्य उपभोक्ता आयोग के फैसले को बदलने या खारिज करने की कोई कानूनी वजह नजर नहीं आती।

  6. बैंक इसके लिए भी तैयार नहीं हुआ और उसने इस आदेश को राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी। वहां भी हार मिली। राष्ट्रीय आयोग ने भी निचली अदातल के फैसले को बरकरार रखा। आखिर बैंक को झुकना पड़ा।

आप भी कर सकते हैं शिकायत

  1. कोई भी कर सकता है शिकायत

    उत्पाद या सेवा में किसी भी तरह की समस्या होने पर उपभोक्ता या उसके आधार कोई दूसरा व्यक्ति कंज्यूमर फोरम में शिकायत दर्ज करा सकता है। इंडिविजुअल्स के अलावा कोई पंजीकृत संस्था भी अपनी शिकायत कंज्यूमर फोरम में कर सकती है।

  2. यहां करें शिकायत

    शिकायत कहां करनी है इसका निर्धारण कंज्यूमर के नुकसान के आधार पर किया जाता है।

    • अगर नुकसान 20 लाख रुपए से कम का है तो जिला फोरम में इसकी शिकायत की जा सकती है।
    • 20 लाख से ऊपर और 1 करोड़ रुपए से कम का नुकसान होने पर राज्य आयोग पर शिकायत दर्ज करानी होती है।
    • अगर नुकसान एक करोड़ रुपए से ज्यादा है तो राष्ट्रीय आयोग पर शिकायत दर्ज करानी होती है।
    • इसके अलावा निचले फोरम से खारिज होने के बाद ऊपर की फोरम में शिकायत की जा सकती है।
    • कंज्यूमर उपभोक्ता मामले की हेल्पलाइन (1800114000) और बेवसाइट (consumerhelpline.gov.in) पर जाकर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

  3. ये है शिकायत करने का फॉर्मेट

    उपभोक्ता एक सादे कागज पर अपनी शिकायत लिखकर फोरम में दे सकता है। शिकायत में मामले का पूरा ब्योरा होना चाहिए, जैसे कि घटना कहां और कब की है। इसके साथ ही शिकायत के समर्थन में उपभोक्ता को सामान का बिल और अन्य दस्तावेज भी पेश करना होता है। शिकायत पत्र में यह भी लिखा जाता है कि आप सामने वाली कंपनी से कितनी राहत चाहते हैं।

  4. 5 लाख तक के दावों पर नहीं लगती कोई फीस

    उपभोक्ता फोरम में 5 लाख रुपए तक के दावे पर कोई कोर्ट फीस नहीं लगती। इससे ऊपर की राशि के दावे के लिए नाममात्र की कोर्ट फीस जमा करना होगी। 5 लाख से 10 लाख रुपए तक के दावे के लिए उपभोक्ताओं को 200 रुपए की कोर्ट फीस जमा करनी होगी।

    दावों पर कोर्ट फीस:

    दावे की रकम कोर्ट फीस
    1 लाख रुपए तक 00
    1 लाख रुपए से 5 लाख तक 00
    5 लाख रुपए से 10 लाख तक 200 रुपए
    10 लाख रुपए से 20 लाख तक 400 रुपए
    20 लाख रुपए से 50 लाख तक 2000 रुपए
    50 लाख रुपए से 1 करोड़ तक 4000 रुपए
    1 करोड़ रुपए से ऊपर 5000 रुपए

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