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एलजीबीटी / सेनाध्यक्ष का बयान - LGBT लोगों को नहीं सेना में जगह नहीं जबकि इनके पास हैं सभी मूल अधिकार

Dainik Bhaskar

Jan 10, 2019, 06:12 PM IST


lgbt peoples can not join indian army these are their rights
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lgbt peoples can not join indian army these are their rights

यूटिलिटी डेस्क. गुरुवार को देश के एलजीबीटी (लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर) से संबंधित एक बड़ा फैसला आया है। सेना में एलजीबीटी से संबंधित एक्टिविटीज पर रोक लगी रहेगी। ये बातें भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही। उन्होंने कहा कि सेना में ऐसे लोगों को एक्सेप्ट नहीं किया जा सकता।

आर्मी परंपरागत तरीके से काम करती है। एलजीबीटी जैसे मामलों में सेना पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू नहीं होता क्योंकि इन पर आर्मी एक्ट के तहत फैसला लिया जाता है। हम देश के कानून से ऊपर नहीं हैं लेकिन जब आप सेना जॉइन करते हैं तो कुछ अधिकारों को छोड़ना पड़ता है। कुछ चीजें सेना के लिए अलग होती हैं।

बिपिन रावत, थल सेना प्रमुख

 

समलैंगिकता नहीं है अपराध: 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिता से संबंधित इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) की धारा 377 के उस प्रावधान को रद्द कर दिया था, जिसके तहत बालिगों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अपराध बताया गया था। कोर्ट ने कहा था कि इन्हें भी आम लोगों की तरह समान अधिकार हैं। देश-विदेश में एलजीबीटी (लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर) लोगों को आम लोगों के जैसे अधिकार देने के तमाम प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन इसके बावजूद अभी तक ये संभव नहीं हो पाया है।

 

अमेरिका में भी है रोक: भारत ही नहीं अमेरिका में एजीबीटी समुदाय के लोगों को सेना में भर्ती किए जाने पर रोक है। हालांकि, कुछ परिस्थितियों इस समुदाय के लोग सेना में जा सकते हैं। ओबामा सरकार के दौरान ट्रांसजेंडर नीति बनाई गई थी, जिसके बाद 2016 से गे और लेस्बियन समुदाय के लोगों की सेना में भर्ती होने लगी थी। लेकिन पिछले साल ट्रंप प्रसाशन ने एक मेमोरैंडम पर जारी करके इस पर रोक लगा दी है।

 

10 करोड़ से ज्यादा हैं एलजीबीटी समुदाय के लोग: देश में एलजीबीटी समुदाय से संबंधित कितने लोग हैं, इसकी वास्तविक जानकारी उपलब्ध नहीं है। 2018 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय के बाद ब्रिटिश अखबार द गार्डियन ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। जिसके मुताबिक, 2018 में भारत की कुल पॉपुलेशन के करीब 8 फीसदी लोग एलजीबीटी समुदाय से संबंधित थे। यह आंकड़ा 10 करोड़ 40 लाख के आसपास आता है।

एलजीबीटी समुदाय के पास हैं ये अधिकार

  1. भारतीय संविधान के तहत के LGBT समुदाय वालों को भी देश के अन्य नागरिकों के जैसे ही सभी मैलिक अधिकार दिए गए हैं। जिसमें समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार, संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार और संवैधानिक उपचारों का अधिकार शामिल हैं।

  2. समता या समानता का अधिकार

    भारतीय संविधान अनुच्छेद 14 से 18 तक समानता के आधार के बारे में बताया गया है। संविधान के इन अनुच्छेदों में कहा गया है कि राज्य सभी व्यक्तियों के लिए एक समान कानून बनाएगा तथा उन पर एक समान ढंग से उन्‍हें लागू करेगा। लोगों के धर्म, जाति, नस्ल, लिंग या जन्मस्थान आदि के आधार पर भेद नहीं किया जाएगा।

  3. स्वतंत्रता का अधिकार

    भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 से 22 तक स्वतंत्रता के अधिकार के बारे में बताया गया है। यह अधिकार भी सभी नागरिकों पर एक सामान रूप से लागू होता है। इसें लोगों को बोलने की, सभा करने की, देश भर में कहीं भी आने-जाने की और व्यवसाय करने की स्वातंत्रता दी गई है। इसके अलावा दोषसिद्धि से संरक्षण, प्राण-दैहिक स्वतंत्रता, शिक्षा पाने के अधिकार के अलावा कुछ परिस्थितियों में गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण की स्वतंत्रता भी दी गई है।

  4. शोषण के विरुद्ध अधिकार

    संविधान के अनुच्छेद 23 और 24 में नागरिकों को शोषण के विरुद्ध अधिकार दिया गया है। इसके तहत किसी भी व्यक्ति भले ही वह किसी भी लिंग या समुदाय का हो, उसकी खरीद-फरोख्त नहीं की जा सकती है और न ही उससे जबरदस्ती काम करवाया जा सकता है। इसके साथ ही 14 साल के कम आयु वाले बच्चे से उनकी इच्छा होने पर जोखिम वाले काम नहीं करवाए जा सकते।

  5. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

    संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 तक धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के बारे में बताया गया है। इन अनुच्छेदों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को मानने और उसका प्रचार-प्रसार करने के लिए स्वतंत्र है। इसके अलावा धार्मिक समुदायों को संस्थाओं की स्थापना करने का भी अधिकार है। राज्य धर्म या व्यक्ति की आस्था के आधार पर उसके साथ भेद नहीं कर सकती और न ही किसी व्यक्ति पर किसी तरह के धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने पर रोक लगाई जा सकती है।

  6. संस्कृति एवं शिक्षा संबंधित अधिकार

    संविधान ने अनुच्छेद 29 और 30 में यह स्वतंत्रता दी है। इसके तहत देश का कोई भी नागरिक चाहे वो जिस लिंग या समुदाय का हो अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को सुरक्षित रख सकता है। भाषा, जाति, धर्म और संस्कृति के आधार पर उसे किसी भी सरकारी शैक्षिक संस्था में प्रवेश से नहीं रोका जाएगा। इसके अलावा अल्पसंख्यक वर्ग अपनी पसंद की शैक्षाणिक संस्था भी चला सकता है। राज्य अनुदान देने में उसके साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं करेगी।

  7. संवैधानिक उपचारों का अधिकार

    संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत देश के सभी नागरिकों को संवैधानिक उपचारों का अधिकार दिया गया है। किसी भी प्रकार के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में सभी नागरिकों इसका प्रयोग करके बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध लेख, उत्प्रेरण और अधिकार पृच्छा रिट उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायलय में दाखिल कर सकते हैं।

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