कंज्यूमर फोरम / पॉलिसी होल्डर को थी हाइपरटेंशन की बीमारी, फिर भी बीमा कंपनी को देना होगा 5 लाख का क्लेम



consumer forum ordered lic to give insurance claim to nominee if policy holder suffers from hypertension
X
consumer forum ordered lic to give insurance claim to nominee if policy holder suffers from hypertension

Dainik Bhaskar

Jan 09, 2019, 05:06 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. हम हेल्थ इंश्योरेंस इसलिए लेते हैं ताकि बीमार पड़ने पर उसका उपयोग कर सके। जब व्यक्ति क्लेम लेने का दावा पेश करता है, तो उसे इस वजह से खारिज नहीं किया जा सकता है कि व्यक्ति को हाईपरटेंशन की बीमारी थी, जिसे छिपाया गया था। व्यक्ति जब हेल्थ इंश्योरेंस लेता है, तब संबंधित कंपनी उसकी जांच कराती है। ऐसे में क्लेम खारिज करना अनुचित व्यापार के साथ ही सेवा की कमी की श्रेणी में आता है। यह टिप्पणी भोपाल जिला उपभोक्ता फोरम ने भारतीय जीवन बीमा निगम मंडल कार्यालय के खिलाफ फैसला सुनाते हुए की है। फोरम ने इस मामले में उपभोक्ता को 5 लाख रुपए क्लेम देने और 11 हजार रुपए परिवाद व्यय देने के आदेश दिया।

कंपनी ने कहा- अनकंट्रोल्ड हाइपरटेंशन था जिसे छिपाया गया

  1. सोनागिरी निवासी अनीता सोनी ने 7 मार्च 2013 को भारतीय जीवन बीमा निगम मंडल कार्यालय के मंडल प्रबंधक के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर किया था।

  2. उनके पति शशिकांत सोनी ने भारतीय जीवन बीमा निगम से 2008 में दो पॉलिसी- जीवन सरल और हेल्थ प्लस ली थी। जीवन सरल के तहत 5 लाख रुपए की और हेल्थ प्लस की 3.56 लाख की पॉलिसी थी।

  3. दोनों पॉलिसी जारी करते समय बीमा कंपनी ने मेडिकल जांच कराई थी। सभी जांचों से संतुष्ट होने के बाद ही उनके पति को पॉलिसी जारी की गई थी। उन्होंने पॉलिसी की सभी किस्तें समय पर दी थी।

  4. अनिता ने शिकायत में बताया कि 23 जून 2011 को उनके पति को अचानक चक्कर आया और वे बेहोश हो गए। उन्हें नर्मदा ट्रामा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डेढ़ माह बाद उन्हें 9 अगस्त 2011 को चिरायु हॉस्पिटल में भर्ती कराया। यहां उनकी 19 सितंबर 2011 को मौत हो गई। पति के मौत के बाद उन्होंने नॉमिनी होने के नाते दोनों पॉलिसी के लिए क्लेम पेश किया। जिसे बीमा कंपनी ने खारिज कर दिया।

  5. फोरम में जीवन बीमा निगम के वकील ने तर्क रखते हुए कहा- शशिकांत अनकंट्रोल्ड हाइपरटेंशन रोग से पीड़ित थे। यह खुलासा क्लेम के लिए दिए गए नर्मदा ट्रामा सेंटर के दस्तावेजों से हुआ था। यह बात उन्होंने मेडिकल एक्जामिन के दौरान छिपाई थी। इसकी वजह से जीवन बीमा निगम ने शशिकांत की नॉमिनी अनिता सोनी का दावा खारिज किया था।

फोरम ने दिया ये फैसला

  1. कंपनी की जांच के समय था ब्लडप्रेशर

    दोनों पक्षों के द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को देखने के बाद फोरम ने कहा कि कंपनी द्वारा कराई गई मेडिकल जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि उस समय शशिकांत का ब्लड प्रेशर नार्मल था, पल्स रेट ठीक थी।

  2. फोरम ने आगे कहा कि नर्मदा ट्रामा सेंटर की रिपोर्ट में शशिकांत के अटेंडेंट ने जो हिस्ट्री बताई उसमें उल्लेख है कि उन्हें दो घंटे पहले से चक्कर आ रहे थे। इसके बाद वे बेहोश हुए थे।

  3. फोरम ने कंपनी के तर्कों को खारिज करते हुए जीवन सरल की पॉलिसी के तहत 5 लाख रुपए क्लेम 2 माह के अंदर दिया जाए। वहीं हेल्थ प्लस पॉलिसी की समुचित देय राशि और 11 हजार रुपए हर्जाना दिया जाए।

  4. इंश्योरेंस लेते वक्त मिस-सेलिंग से ऐसे बचें

    • इंश्योरेंस प्रोडक्ट खरीदने से पहले, उसके सभी नियमों एवं शर्तों को अच्छी तरह पढ़ लें। इंश्योरेंस आवेदन फॉर्म को सही-भरें। 
    • अपनी उम्र और सेहत से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारी सही-सही भरें, क्योंकि ऐसा न करने पर इंश्योरेंस क्लेम करने के दौरान आपका क्लेम अस्वीकार भी किया जा सकता है। 
    • यदि किसी कारण से आप पॉलिसी से संतुष्ट नहीं हैं तो 15 दिन की फ्री लुक पीरियड का इस्तेमाल करके पॉलिसी वापस की जा सकती है।

सादे कागज पर लिख कर की जा सकती है शिकायत

  1. जांच-परख कर इंश्योरेंश लेने के बाद भी यदि कंपनी किसी तरह सेवा की गुणवत्ता में कमी करती है तो आप भी कंज्यूमर फोरम में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

    • अगर नुकसान 20 लाख रुपए से कम का है तो जिला फोरम में शिकायत की जाती है।
    • 20 लाख से ऊपर और 1 करोड़ रुपए से कम की शिकायत पर राज्य आयोग पर शिकायत दर्ज करानी होती है।
    • अगर नुकसान एक करोड़ रुपए से ज्यादा है तो राष्ट्रीय आयोग पर शिकायत दर्ज करानी होती है।
    • आपको अपनी सारी समस्या एक सादे कागज पर लिख कर कंज्यूमर फोरम में शिकायत करनी होती है। इसके साथ ही आपको नुकसान से संबंधित दस्तावेज भी देने होते हैं।
    • इसके अलावा कंज्यूमर उपभोक्ता मामले की हेल्पलाइन (1800114000) और बेवसाइट (consumerhelpline.gov.in) पर जाकर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

  2. उपभोक्ता फोरम में 5 लाख रुपए तक के दावे पर कोई कोर्ट फीस नहीं लगती।इससे ऊपर की राशि के दावे के लिए नाममात्र की कोर्ट फीस जमा करना होगी।

    दावों पर कोर्ट फीस :

    दावे की रकम कोर्ट फीस 
    1 लाख रुपए तक 00
    1 लाख रुपए से 5 लाख तक 00
    5 लाख रुपए से 10 लाख तक 200 रुपए
    10 लाख रुपए से 20 लाख तक 400 रुपए
    20 लाख रुपए से 50 लाख तक 2000 रुपए
    50 लाख रुपए से 1 करोड़ तक 4000 रुपए
    1 करोड़ रुपए से ऊपर 5000 रुपए

COMMENT