उपभोक्ता अदालत का फैसला / बैंक से चेक गुम होने पर ग्राहक के नुकसान का करना होगा पूरा भुगतान



loss of cheque to be compensated by bank says ncdrc directs bob to pay rs 3.6 lakhs to customer
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loss of cheque to be compensated by bank says ncdrc directs bob to pay rs 3.6 lakhs to customer

Dainik Bhaskar

Jul 23, 2019, 01:32 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत ने एक मामले में फैसला देते हुए कहा कि बैंक में जमा किए गए चेक के गुम हो जाने पर उसे ग्राहक को रकम की भरपाई करनी होगी। साथ ही बाउंस हो चुके चेक के मामले में भी यही फैसला लागू होगा। नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमिशन (NCDRC) ने बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) को आदेश दिया कि वह गुजरात के निवासी को 3 लाख 60 हजार रुपए भुगतान करे।

2010 में हुआ था चेक बाउंस

  1. क्या है मामला?

    व्यक्ति के पक्ष में जारी किया गया 3.6 लाख रुपए का चेक बैंक से गुम हो गया था। यह चेक बाउंस भी हो चुका था। उपभोक्ता अदालत ने कहा कि बैंक ने न सिर्फ बाउंस चेक को खो दिया, बल्कि शिकायतकर्ता चित्रोदिया बाबूजी दीवानजी को चेक रिटर्न मेमो भी नहीं दिया। 


    - शिकायकर्ता ने बैंक से लंबे समय तक इसके लिए आग्रह किया था। इसके कारण शिकायर्ता दीवानजी को 3.6 लाख रुपये का नुकसान हुआ। NCDRC ने कहा कि दीवानजी ने लंबे समय तक बैंक से बाउंस चेक और चेक रिटर्न मेमो वापस किए जाने का आग्रह किया। 


    - NCDRC ने कहा कि ना तो चित्रोदिया बाबूजी को पैसा मिलर और न ही बाउंस हुआ चेक। चूंकि विवादास्पद चेक बैंक द्वारा गुम हुआ, इसलिए नुकसान की भरपाई करना बैंक की जिम्मेदारी है।

  2. गुजरात राज्य उपभोक्ता आयोग ने भी बैंक को ठहराया था गलत

    NCDRC ने बैंक के खिलाफ दिए गए गुजरात राज्य उपभोक्ता आयोग के फैसले को सही ठहराया और इस फैसले की चुनौती देने वाली बैंक की याचिका को खारिज कर दिया।

     

    - राज्य उपभोक्ता आयोग ने जिला फोरम के फैसले को खारिज करते हुए 20 जनवरी 2016 को दीवानजी के पक्ष में फैसला दिया था और बैंक को उन्हें 3.6 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया था।


    - जिला फोरम ने 2013 में बैंक को ब्याज सहित सिर्फ 15,000 रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया था। इस फँसले से नाखुश दीवानजी ने इस फैसले को गुजरात राज्य उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी थी।

  3. 9 साल बाद मिला इंसाफ

    11 सितंबर 2010 को अपने बचत खाता में दीवानजी ने इस चेक को जमा किया था। चेक बाउंस हो गया और इसे दीवानजी को वापस भेज दिया गया। लेकिन दीवानजी के पास यह चेक नहीं पहुंच पाया। इसके बाद दीवानजी ने बैंक को कई कानूनी नोटिस भेजे, लेकिन बैंक सभी आरोपों से इंकार करता रहा। इसके बाद उन्होने कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला लिया।
     

  4. क्या हैं नियम?

    चेक बाउंस हो तो भी बैंक की जिम्मेदारी कि वह इसे ग्राहक को लौटाए। 


    - चेक बाउंस होने पर बैंक ग्राहक को एक रसीद दी जाती है जिसमें चेक बाउंस होने की वजह लिखी होती है। 


    - ऐसे समय में 30 दिन के अंदर एक लीगल नोटिस देनदार के पास भेजा जाता है जिसने चेक दिया है। 


    - इसके बाद भी अगर आपको आपका पैसा नहीं मिलता है तो आप नोटिस भेजने के 15 दिन बाद जिले की कोर्ट में वकील की मदद से केस दर्ज कर सकते है। 


    - तब कोर्ट आरोपी को सजा के साथ में जितनी राशि थी उसका 2 गुना भी देना पड़ सकता है। सही समय पर यह कदम उठाने पर आपका पैसा डूबने से बच सकता है।

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