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वैक्सीन की रेस:ऑक्सफोर्ड और कैनसीनो समेत तीन वैक्सीन ने दिए अच्छे रिजल्ट, एक्सपर्ट्स बोले- अधूरे नतीजे वायरस रोकने की कोशिशों को कमजोर कर सकते हैं

एक वर्ष पहले
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ऑक्सफोर्ड में वैक्सीन ट्रायल के लिए बल्ड सैंपल्स की जांच करते साइंटिस्ट। - Dainik Bhaskar
ऑक्सफोर्ड में वैक्सीन ट्रायल के लिए बल्ड सैंपल्स की जांच करते साइंटिस्ट।
  • वैक्सीन के प्रभावी साबित हुए बिना ही कई सरकारें दो बिलियन डोज खरीदने के लिए लाखों डॉलर खर्च करने को तैयार हैं
  • ब्रिटेन और अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, रूस ऑक्सफोर्ड में चल रही वैक्सीन रीसर्च की जासूसी कर रहा है
  • एक्स्पर्ट्स ने चेताया कि, लैब टेस्ट में मिले रिस्पॉन्स यह गारंटी नहीं देते कि वैक्सीन आपको बीमारी से बचा सकती है

डेविड डी कर्कपैट्रिक. कोरोनावायरस के खिलाफ वैक्सीन बनाने की रेस और तेज हो चुकी है। तीन लैबोरेट्रीज ने इंसानों पर हुए शुरुआती ट्रायल्स के रिजल्ट को भरोसेमंद बताया है। बैलोर कॉलेज ऑफ मेडिसिन में वैक्सीन शोधकर्ता डॉक्टर पीटर जे होटेज ने कहा कि "इसका मतलब यह है कि यह वैक्सीन फेज थ्री के ट्रायल्स में ले जाने लायक हैं।" फेज थ्री के ट्रायल्स से हमें पता लगेगा कि ड्रग कितना असरदार है। सभी डेवलपर्स ने कहा कि उनकी वैक्सीन कोविड 19 से उबर चुके मरीज की तरह ही एंटीबॉडी के स्तर को सामने लाती है।

पार्टनरशिप में काम कर रहे दो वैक्सीन निर्माता ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी-एस्ट्राजेनेका और चीनी कंपनी कैनसीनो के शुरुआती परिणामों को ब्रिटिश मेडिकल जर्नल द लैंसेट में समीक्षा की गई है और स्टडी के तौर पर प्रकाशित भी किया है। जबकि, ड्रग कंपनी फाइजर और जर्मन कंपनी बायोएनटेक ने समीक्षा के पहले ही रिजल्ट ऑनलाइन शेयर किए हैं। इन दोनों कंपनियों ने बीते हफ्ते शुरुआती रिजल्ट साझा करने वाली कंपनी मॉडर्ना को तुलना के लिए आमंत्रित किया है।

बीमारी से बचाएगी या नहीं यह अभी तक साफ नहीं
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि कॉन्वालैसिंग मरीजों में एंटीबॉडी रिस्पॉन्स अलग-अलग आया है। इन प्रतिक्रिया को अगर मिला दिया जाए तो भी इम्युनिटी की कोई गारंटी नहीं है। वेल कॉर्नेल मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर जॉन पी मूर कहते हैं "यह वास्तव में आपको यह नहीं बताता है कि वैक्सीन आपका बचाव करेगी या नहीं।" सोमवार को रिजल्ट जारी करने वाले डेवलपर्स ने संकेत दिए हैं कि संभावना है कि इम्युनिटी को वैक्सीन के बूस्टर डोज की जरूरत पड़ सकती है।

लाखों डॉलर खर्च करने के लिए तैयार हैं सरकारें
सभी की नजर ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका पर टिकी हुई हैं। अमेरिका, ब्रिटेन समेत दूसरी सरकारों के अलावा कई एनजीओ भी वैक्सीन के असरदार साबित होने से पहले लाखों-करोड़ों डॉलर्स खर्च करने के लिए तैयार हैं। ब्रिटिश और अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि रूस ऑक्सफोर्ड में चल रही रिसर्च की जासूसी कर रहा है।

अभी हमें और लंबा रास्ता तय करना है
ब्रिटेन, ब्राजील और साउथ अफ्रीका में पहले ही 10 हजार से ज्यादा लोग डोज प्राप्त कर चुके हैं। इसके बाद अमेरिका में 30 हजार लोगों पर अगला फेज थ्री टेस्ट मॉडर्ना वैक्सीन टेस्ट के साथ अगले हफ्ते शुरू होगा। सोमवार को जारी हुई ऑक्सफोर्ड की स्टडी में कुछ सैकड़ों लोगों को शुरुआती ट्रायल्स में वैक्सीन दी गई थी। इनमें से कवल 10 लोगों को बूस्टर दिया गया और इसने सबसे ज्यादा भरोसेमंद इम्यून रिस्पॉन्स दिया है। ऑक्सफोर्ड की प्रोफेसर सारा गिलबर्ट का कहना है "अभी भी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।"

सबसे कमजोर रही चीनी कंपनी कैनसीनो की वैक्सीन
जारी किए गए रिजल्ट्स के मुताबिक, करीब 500 लोगों पर टेस्ट की गई कैनसीनो वैक्सीन सबसे कम असरदार रही। प्रोफेसर मूर के अनुसार, यह दूसरे वैक्सीन के मुकाबले कमजोर रही। हालांकि ऑक्सफोर्ड और कैनसीनो दोनों वैक्सीन दूसरे कॉमन वायरस एडीनोवायरस की जीन्स में फेरबदल कर काम कर रही हैं। इसलिए यह बिना नुकसान के कोरोनावायरस की नकल करता है और इम्यून रिस्पॉन्स को प्रेरित करता है।

ऑक्सफोर्ड चिंपैंजियों में मिले एडिनोवायरस का उपयोग कर रहा है। हालांकि इंसानों में इस वायरस के खिलाफ पहले से एंटी-बॉडीज नहीं हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि कैनसीनो वैक्सीन इंसानों में सर्दी-जुकाम फैलाने वाले एडिनोवायरस की मदद ले रहा है। ऐसे में कई लोगों में पहले से तैयार एडिनोवायरस का डिफेंस वैक्सीन को नाकाम करता नजर आ रहा है।

फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन से मिला बेहतर इम्यूनो रिस्पॉन्स
अलग-अलग डोज लेवल पर आधारित जर्मनी में 60 लोगों पर हुए फाइजर और बायोएनटेक वैक्सीन ट्रायल से मजबूत इम्यून रिस्पॉन्स मिला है। इस वैक्सीन में भी मॉडर्ना की तरह जैनेटिक मटेरियल एमआरएनए का उपयोग किया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, फाइज-बायोएनटेक के शुरुआती रिजल्ट्स और भी मजबूत इम्यून रिस्पॉन्स दे सकते हैं।

वैज्ञानिकों की चेतावनी- कोई भी लैब टेस्ट बीमारी से बचाने की गारंटी नहीं देता
वैज्ञानिकों ने इस बात को लेकर आगाह किया है कि लैब टेस्ट में मिला कोई भी रिस्पॉन्स यह गारंटी नहीं देता कि वैक्सीन बीमारी को रोक सकती है। उन्होंने बताया कि दूसरी वैक्सीन्स से जुड़े इम्यून रिस्पॉन्स की तुलना करना लगभग नामुमकिन है क्योंकि रिपोर्ट्स स्टैंडर्डाइज नहीं हैं।

प्रोफेसर मूर ने कहा "यह एक सुंदर बच्चे के फोटो कॉन्टेस्ट को जज करने जैसा है, जहां हर मां ने अलग-अलग इंस्टाग्राम फिल्टर का उपयोग किया है।" इसके अलावा कोई भी ट्रायल्स कुछ हफ्तों के बाद रिजल्ट मापने के लायक नहीं थे। इससे सवाल उठता है कि वैक्सीन का असर कितनी देर तक रह सकता है।

डॉक्टर होटेज ने कहा कि अधूरे रिजल्ट्स का प्रचार करने का वैक्सीन निर्माताओं का उत्साह मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग जैसे वायरस को रोकने के दूसरे उपायों को कमजोर कर सकता है।

उन्होंने कहा "यह बढ़ावा इसे एक कोने में चमत्कार की तरह बनाता है और केवल बात केवल यही नहीं है।" डॉक्टर होटेज बताते हैं "यह जल्द पूरा नहीं होने वाला है, इसे सुलझाने में कई साल लगेंगे।"

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