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खूबसूरती को मास्क ने ढंका:लगातार मास्क पहनने से हो रहा 'मास्कने', एक्सपर्ट्स की सलाह- चेहरे को सेफ रखने के लिए मेकअप से दूरी बनाएं, पसीना पोछते रहें

10 महीने पहलेलेखक: गौरव पांडेय
  • हेल्थ वर्कर्स, दफ्तरों में लगातार मास्क पहनकर काम करने वालों को मास्कने की समस्या ज्यादा
  • जिनकी स्किन ज्यादा सेंसिटिव है, उन्हें भी खतरा, वे फेसवॉश चेंज करें, कम लेयर के मास्क पहनें
  • मास्क पहनने से पहले फेस पर पेट्रोलियम जेली और वैसलीन लगा सकते हैं, ताकि फ्रिक्शन न आए

खूबसूरत चेहरा किसकी ख्वाहिश नहीं होती...हर किसी की तो होती है। लेकिन, कोरोना ने इस ख्वाहिश पर पहरेदार बिठा रखा है और जिम्मेदारी दे रखी है मास्क को। मास्क भी इसे निभाने पर आमादा है। लेकिन, इसमें जाने-अनजाने उससे थोड़ी सख्ती भी हो जा रही है। चेहरा मासूम और मुलायम जो है।

मास्क चेहरों पर अपने निशां छोड़ने लगा है। किसी को रगड़ का दाग, तो कहीं कटने और फटने के निशान। मुहांसे और फुंसी के मामले भी बढ़ने लगे हैं। इन सबको कहने के लिए एक नया शब्द भी आ धमका है- ‘मास्कने’।

इस महामारी ने कई शब्द गढ़े हैं ओर उन्हें मशहूर किया है, मसलन- क्वारैंटाइन, सोशल डिस्टेंसिंग, हॉट स्पॉट, सोशल बबल और भी कई। मास्कने भी इन्हीं की बिरादरी का है। मायने है- मास्क पहनने से होने वाले मुंहासे, कट के निशान, दाग, जलन...। 

इस मुश्किल वक्त में कोई घर से बाहर बिना मास्क के आखिर निकल भी कैसे सकता है। फ्रंटलाइन वर्कर्स, हेल्थ केयर के लोग और दफ्तर जाने वालों के लिए तो ये बेहद जरूरी हो चला है।

न्यूयॉर्क की क्लीनिकल डर्मैटोलॉजिस्ट, डॉक्टर ऑफ मेडिसिन, सेलेब्स स्किन और वेलनेस एक्सपर्ट डॉ. किरन सेठी कहती हैं कि मेरे पास भी मास्कने के केस आ रहे हैं, पर बहुत ज्यादा नहीं। हालांकि, इसकी वजह यह भी हो सकती है कि मैं अभी सिर्फ वर्चुअल कंसल्टेंसी कर रही हूं और ज्यादातर लोग घर में रह रहे हैं। 

डाॅ. किरन मास्कने और मुंहासे से बचने के लिए फेसवॉस चेंज करने की सलाह देती हैं। कहती हैं कि ऐसे फेसवॉश यूज करें, जिसमें सेल्सलिक एसिड हो। इससे स्किन में ऑयल कम होता है। कम लेयर के मास्क पहनें, पसीना हो तो उसे साफ करें। पेट्रोलियम जेली और वैसलीन लगाने से भी चेहरे पर फ्रिक्शन नहीं आते हैं। 

  • मास्क पहनना तो जरूरी है-
डर्मैटोलॉजिस्ट डॉक्टर विवेक कुमार देय कहते हैं कि अभी तो मास्क को न पहनने के सलाह नहीं दे सकते हैं, क्योंकि मुंहासों से उतनी दिक्कत नहीं है, जितनी कोरोना से है। इसलिए मास्क पहनना तो बेहद जरूरी है। हां, इसे पहनने के दौरान कुछ सावधानियां जरूरी हैं। मास्क पहनने के दौरान मेकअप से भी बचना चाहिए।
डर्मैटोलॉजिस्ट डॉक्टर विवेक कुमार देय कहते हैं कि अभी तो मास्क को न पहनने के सलाह नहीं दे सकते हैं, क्योंकि मुंहासों से उतनी दिक्कत नहीं है, जितनी कोरोना से है। इसलिए मास्क पहनना तो बेहद जरूरी है। हां, इसे पहनने के दौरान कुछ सावधानियां जरूरी हैं। मास्क पहनने के दौरान मेकअप से भी बचना चाहिए।
  • सेंसिटिव स्किन वालों को ज्यादा रिस्क- 
डॉ. सेठी के मुताबिक यह दिक्कत उन लोगों को ज्यादा हो रही है, जो मास्क पहनकर बाहर निकल रहे हैं और लगातार काम कर रहे हैं। खासकर, फ्रंटलाइन वर्कर्स और हेल्थ वर्कर्स के साथ मास्कने या मुंहासों की समस्या ज्यादा है। ऐसे लोगों को भी यह दिक्कतें आ रही हैं, जिनकी स्किन बहुत ज्यादा सेंसिटिव है। डाॅ. सेठी कहती हैं कि ज्यादा मेकअप करने से स्किन के पोर बंद हो जाते हैं, उसके बाद यदि आप मास्क पहनते हैं तो साइडइफ्केट होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे चेहरे पर दाने भी निकल सकते हैं।
डॉ. सेठी के मुताबिक यह दिक्कत उन लोगों को ज्यादा हो रही है, जो मास्क पहनकर बाहर निकल रहे हैं और लगातार काम कर रहे हैं। खासकर, फ्रंटलाइन वर्कर्स और हेल्थ वर्कर्स के साथ मास्कने या मुंहासों की समस्या ज्यादा है। ऐसे लोगों को भी यह दिक्कतें आ रही हैं, जिनकी स्किन बहुत ज्यादा सेंसिटिव है। डाॅ. सेठी कहती हैं कि ज्यादा मेकअप करने से स्किन के पोर बंद हो जाते हैं, उसके बाद यदि आप मास्क पहनते हैं तो साइडइफ्केट होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे चेहरे पर दाने भी निकल सकते हैं।
  • बार-बार फेस को न छूएं-
डॉक्टर विवेक मास्कने से परेशान लोगों को बार-बार फेस नहीं छूने की सलाह देते हैं। कहते हैं कि ऐसे लोगों को एंटीबायोटिक जेल और क्रीम लगानी चाहिए। दरअसल, लगातार फेस को कवर करने और बंद रखने को ऑक्ल्यूजन भी कहते हैं। इससे हवा अंदर नहीं जाती है और पसीना होता है। फिर चेहरे पर दाने, कील-मुंहासे और रगड़ के निशान आते हैं। इसे आप मास्कने की जगह चुन्नीकने भी बोल सकते हैं, क्योंकि लंबे वक्त तक चुन्नी से फेस कवर करने वाली कुछ महिलाओं को भी ऐसी दिक्कतें होती हैं।
डॉक्टर विवेक मास्कने से परेशान लोगों को बार-बार फेस नहीं छूने की सलाह देते हैं। कहते हैं कि ऐसे लोगों को एंटीबायोटिक जेल और क्रीम लगानी चाहिए। दरअसल, लगातार फेस को कवर करने और बंद रखने को ऑक्ल्यूजन भी कहते हैं। इससे हवा अंदर नहीं जाती है और पसीना होता है। फिर चेहरे पर दाने, कील-मुंहासे और रगड़ के निशान आते हैं। इसे आप मास्कने की जगह चुन्नीकने भी बोल सकते हैं, क्योंकि लंबे वक्त तक चुन्नी से फेस कवर करने वाली कुछ महिलाओं को भी ऐसी दिक्कतें होती हैं।
  • हेल्थ केयर वर्कर्स को ज्यादा खतरा-
मास्कने का सबसे ज्यादा खतरा हेल्थ केयर वर्कर्स और दूसरे फ्रंटलाइन वर्कर्स को है। क्योंकि, ये सभी टाइट मास्क को लंबे वक्त तक पहन रहे हैं। जर्नल ऑफ अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मैटोलॉजी में छपे एक रिसर्च के मुताबिक, चीन के हुबेई में करीब 83 फीसदी स्वास्थ्य कर्मी चेहरे पर स्किन प्रॉब्लम से जूझ रहे हैं। इसके अलावा आम लोगों में भी मुंहासों की समस्या में इजाफा हुआ है।
मास्कने का सबसे ज्यादा खतरा हेल्थ केयर वर्कर्स और दूसरे फ्रंटलाइन वर्कर्स को है। क्योंकि, ये सभी टाइट मास्क को लंबे वक्त तक पहन रहे हैं। जर्नल ऑफ अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मैटोलॉजी में छपे एक रिसर्च के मुताबिक, चीन के हुबेई में करीब 83 फीसदी स्वास्थ्य कर्मी चेहरे पर स्किन प्रॉब्लम से जूझ रहे हैं। इसके अलावा आम लोगों में भी मुंहासों की समस्या में इजाफा हुआ है।
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