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पर्सनल फाइनेंस:हेल्थ इंश्योरेंस होने के बावजूद भी इन 5 कारणों से आपको उठाना पड़ सकता है इलाज का खर्च

नई दिल्ली9 महीने पहले
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हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में आपके इलाज का खर्च तभी कवर किया जाएगा जब आप अस्पताल में कम से कम 24 घंटे भर्ती रहे हों - Dainik Bhaskar
हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में आपके इलाज का खर्च तभी कवर किया जाएगा जब आप अस्पताल में कम से कम 24 घंटे भर्ती रहे हों
  • हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का वेटिंग पीरियड 15 से 90 दिनों तक का हो सकता है
  • लिमिट या सब लिमिट वाला प्लान लेना भी आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है

देश में हेल्थ इंश्योरेंस लेने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। ऐसे में अगर आप भी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने का सोच रहे हैं तो, इससे पहले आपको इन बातों की जानकारी होना बहुत जरूरी है कि कब आपकी बीमा कंपनी आपके इलाज का खर्च नहीं उठाएगी। आज हम आपको ऐसी ही 5 बातों के बारे में बता रहे हैं जिनके कारण हेल्थ इंश्योरेंस प्लान होने पर भी आपको इलाज का खर्च उठाना पड़ सकता है।

हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय वेटिंग पीरियड का रखें ध्यान
हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने का मतलब यह नहीं होता कि पॉलिसी खरीदने के पहले दिन से ही इंश्योरेंस कंपनी आपको कवर करने लगेगी। बल्कि, आपको क्लेम करने के लिए थोड़े दिन रुकना पड़ेगा। पॉलिसी खरीदने के बाद से लेकर जब तक आप बीमा कंपनी से कोई लाभ का क्लेम नहीं कर सकते, उस अवधि को एक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का वेटिंग पीरियड कहा जाता है। ये अवधि 15 से 90 दिनों तक की हो सकती है। आपको ऐसी कम्पनी से पॉलिसी लेनी चाहिए जिसका वेटिंग पीरियड कम हो।

लिमिट या सब लिमिट वाला प्लान न लें
अस्पताल में प्राइवेट रूम के किराए जैसी लिमिट से बचें। आपके लिए यह जरूरी नहीं है कि इलाज के दौरान आपको किस कमरे में रखा जाए। खर्च के लिए कंपनी द्वारा लिमिट या सब लिमिट तय करना आपके लिए ठीक नहीं है। पॉलिसी लेते समय इस बात का ध्यान रखें। सब-लिमिट का आशय री-इंबर्समेंट की सीमा तय करने से है। मसलन अस्पताल में भर्ती हुए तो कमरे के किराए पर बीमित राशि के एक फीसदी तक की सीमा हो सकती है। इस तरह पॉलिसी की बीमित राशि भले कितनी हो, सीमा से अधिक खर्च करने पर अस्पताल के बिल जेब से चुकाने पड़ सकते हैं।

पहले से मौजूद बीमारियां करा सकती हैं जेब खाली
सभी हेल्थ इंश्योरेंस प्लान पहले से मौजूद बीमारियों को कवर करते हैं। लेकिन, इन्हें 48 महीने के बाद ही कवर किया जाता है। कुछ 36 महीने बाद इन्हें कवर करते हैं। हालांकि, पॉलिसी खरीदते वक्त ही पहले से मौजूद बीमारियों के बारे में बताना होता है। ऐसे इस अवधि से पहले अगर आप इन बीमारियों के कारण बीमार पड़ते हैं तो और अस्पताल में भर्ती होते हैं तो इसका खर्च कवर नहीं होगा।

को-पे को चुनना पड़ेगा जेब पर भारी
थोड़े पैसे बचाने और प्रीमियम को कम करने के लिए कई बार लोग को-पे की सुविधा ले लेते हैं। को-पे का मतलब होता है कि क्लेम की स्थिति में पॉलिसी धारक को खर्चों का कुछ फीसदी (उदाहरण के लिए 10 फीसदी) खुद भुगतान करना होगा। को-पे को चुनने से प्रीमियम में मिलने वाला डिस्काउंट बहुत ज्यादा नहीं होता। लेकिन आपके बीमार पड़ने पर ये आपकी जेब खाली करा सकता है।

24 घंटे भर्ती रहना जरूरी
रेग्युलर हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में आपके इलाज का खर्च तभी कवर किया जाएगा जब आप अस्पताल में कम से कम 24 घंटे भर्ती रहे हों। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान बीमारी के इलाज के लिए आपके सभी खर्च कवर किए जाएंगे। लेकिन अगर आप 24 घंटों से पहले ही डिस्चार्ज कर दिए जाते हैं तो अस्पताल का खर्च आपको अपनी जेब से देना होगा।

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