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  • Income Tax ; Tax ; PPF ; Atal Pension Yojana ; Saving Scheme ; Tax Saving ; ELSS ; Mutual Fund ; Invest In These 8 Schemes Including Equity Linked Savings Scheme, PPF And Atal Pension Yojana, Benefit Of Tax Rebate With Better Returns

पर्सनल फाइनेंस:इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम, पीपीएफ और अटल पेंशन योजना सहित इन 8 योजनाओं में करें निवेश, बेहतर रिटर्न के साथ मिलेगा टैक्स छूट का लाभ

नई दिल्ली2 महीने पहले
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सरकार ने टैक्स-सेविंग्स इनवेस्टमेंट के लिए समय सीमा 31 जुलाई तक बढ़ा दी है
  • वॉलेंटरी प्रोविडेंट फंड में 8.5 फीसदी सालाना ब्याज मिल रहा है
  • 10 साल में ELSS म्‍यूचुअल फंड कैटेगरी ने करीब 8.46 फीसदी का रिटर्न दिया है

कोरोना वायरस के चलते सरकार ने टैक्स-सेविंग्स इनवेस्टमेंट के लिए समय सीमा 31 जुलाई तक बढ़ा दी है। ऐसे में अगर आपने अभी तक कहीं निवेश नहीं किया है तो इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम, PPF और अटल पेंशन योजना सहित सहित कई तरह की योजनाओं में निवेश करते टैक्स छूट का लाभ ले सकते हैं। अगर आप पुराने टैक्स सिस्टम को चुनते हैं तो इन योजनाओं में निवेश के जरिए 80C के तहत 1.5 लाख रुपए तक टैक्स की छूट ली जा सकती है। सीए अभय शर्मा (पूर्व अध्यक्ष इंदौर चार्टर्ड अकाउंटेंट शाखा) टैक्स बचत के लिए कुछ लोकप्रिय योजनाओं के बारे में बता रहे हैं।

अटल पेंशन योजना

  • 18 से 40 साल का कोई भी शख्स अटल पेंशन योजना अकाउंट ओपन करवा सकता है।
  • स्कीम में शामिल होने के लिए सेविंग बैंक अकाउंट, आधार और एक्टिव मोबाइल नंबर का होना जरूरी है।
  • कोई शख्स इस स्कीम को लेता है तो उसे कम से कम 20 साल निवेश करना होगा।
  • इन्वेस्टर्स मंथली, क्वाटरली या सेमी-एनुअल यानी 6 माह की अवधि में निवेश कर सकते हैं।
  • कॉन्ट्रीब्यूशन ऑटो-डेबिट हो जाएगा। यानी आपके अकाउंट से तय राशि अपने आप कट जाएगी और आपके पेंशन खाते में जमा हो जाएगी।
  • अमाउंट कितना कटेगा यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आप रिटायरमेंट के बाद कितनी पेंशन चाहते हैं।
  • इसमें आप सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपए तक टैक्स बेनीफिट क्लेम कर सकेंगे।
  • 1 हजार से 5 हजार रुपए प्रतिमाह पेंशन लेने के लिए सब्सक्राइबर को 42 रुपए से लेकर 210 रुपए प्रतिमाह तक भुगतान करना होगा। यह 18 साल की उम्र में स्कीम लेने पर होगा।
  • वहीं यदि कोई सब्सक्राइबर 40 साल की उम्र में स्कीम लेता है तो उसे 291 रुपए से लेकर 1454 रुपए प्रतिमाह तक का मंथली कॉन्ट्रीब्यूशन करना होगा।
  • सब्सक्राइबर जितना ज्यादा कॉन्ट्रीब्यूशन करेगा, उसे रिटायरमेंट के बाद उतनी ही ज्यादा पेंशन मिलेगी। हालांकि यह 5 हजार रुपए से ज्यादा नहीं होगी। इसलिए कॉन्ट्रीब्यूशन भी इसी हिसाब से होगा।

इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS)

  • देश में 42 म्युचुअल फंड कंपनियां टैक्स सेविंग स्कीम चलाती हैं। हर कंपनी के पास इनकम टैक्स बचाने के लिए ELSS है। इसे ऑनलाइन घर बैठे-बैठे या किसी एजेंट के माध्यम से खरीदा जा सकता है।
  • इसमें अगर इनकम टैक्स बचाने के लिए एक बार में निवेश करना है तो आम तौर पर न्यूनतम 5 हजार रुपए और अगर हर माह निवेश करना है तो आमतौर पर न्यूनतम 500 रुपये महीने का निवेश शुरू किया जा सकता है। हालांकि इसमें 1.5 लाख रुपए की अधिकतम टैक्स छूट ली जा सकती है, लेकिन अधिकतम निवेश की इसमें कोई सीमा नहीं है।
  • इस इनकम टैक्स बचाने वाली स्कीम में निवेश 3 साल के लिए लॉकइन रहता है। इसके बाद निवेशक चाहे तो यह पैसा निकाल सकता है। तीन साल के बाद चाहें तो पूरा निकाल लें या जितनी जरूरत हो उतना पैसा निकाल ले और बाकी पैसा इस ELSS में जब तक चाहे बना रहने दें।
  • ELSS केवल 3 साल के लिए लॉकइन होती है, लेकिन अगर निवेशक इसमें डिविडेंट पेआउट का आप्शन लेता है तो उन्हें बीच-बीच में पैसा मिलता रहेगा। हालांकि इनकम टैक्स बचाने वाली ELSS स्कीम से बीच में पैसा निकाला नहीं जा सकता है।
  • इसमें निवेश पर ब्याज दर की जगह मार्केट लिंक रिटर्न मिलता है। बीते 10 साल में ईएलएसएस म्‍यूचुअल फंड कैटेगरी ने करीब 8.46 फीसदी का रिटर्न दिया है।

सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम 

  • इस योजना में  सालाना 7.4 प्रतिशत की ब्याज दर मिल रही है। यदि ब्याज राशि सालाना 10000 रुपए से अधिक है, तो स्रोत पर कर कटौती यानी टीडीएस काटी जाती है। 
  • इस योजना के तहत निवेश करने पर आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80 सी के तहत टैक्स लाभ प्राप्त होता है। 
  • 60 साल या उससे अधिक आयु के बाद अकाउंट खोला जा सकता है। वहीं VRS लेने वाला व्यक्ति जो 55 वर्ष से अधिक लेकिन 60 वर्ष से कम है वो भी इस अकाउंट को खोल सकता है। 
  • इस स्कीम के तहत 5 साल के लिए पैसा निवेश किया जा सकता है। मैच्योरिटी के बाद इस स्कीम को 3 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।
  • इस योजना के तहत आप अधिकतम 15 लाख रुपए तक का निवेश कर सकते हैं।

सुकन्या समृद्धि योजना

  • इसके तहत अकाउंट किसी बच्ची के जन्म लेने के बाद 10 साल की उम्र से पहले ही खोला जा सकता है। 
  • आप केवल 250 रुपए में ये खाता खुलवा सकते हैं। इसमें सालाना 7.6 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जा रहा है जो फिक्स्ड डिपॉजिट से काफी ज्यादा है। 
  • चालू वित्त वर्ष में सुकन्या समृद्धि योजना के तहत अधिकतम 1.5 लाख रुपए जमा कराए जा सकते हैं। 
  • इस योजना में निवेश करने पर 80सी के तहत टैक्स छूट का भी फायदा उठा सकते हैं। 
  • यह एकाउंट किसी पोस्ट ऑफिस या बैंक की अधिकृत शाखा में खोला जा सकता है। 

पोस्ट ऑफिस पब्लिक प्रॉविडेंट फंड

  • पोस्ट ऑफिस पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ) खातों में जमा राशि पर फिलहाल 7.1 प्रतिशत ब्याज मिल रहा है। 
  • जमा पर ब्याज कैलकुलेशन सालाना आधार पर की जाती हैं, जिसका अर्थ है कि इसे हर साल मूलधन में जोड़ा जाता है। 
  • पीपीएफ छूट की ईईई कैटेगरी के अंतर्गत आता है। इसका मतलब यह है कि रिटर्न, मेच्योरिटी राशि और ब्याज से इनकम पर आयकर छूट मिलती है। 
  • यह अकाउंट 15 साल के लिए खोल सकते हैं, जिसे आगे 5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। 
  • पीपीएफ में मिनिमम 500 रुपए से अकाउंट खुलवाया जा सकता है। इसमें एक फाइनेंशियल में कम से कम 500 रुपए निवेश करना जरूरी है। 
  • इस स्कीम के तहत आप एक साल में अकाउंट में अधिकतम 1.5 लाख रुपए निवेश कर सकते हैं।

पोस्ट ऑफिस नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट

  • पोस्ट ऑफिस नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी) में निवेश पर 6.8 प्रतिशत सालाना ब्याज मिल रहा है। 
  • इसमें ब्याज की गणना सालाना आधार पर होती है, लेकिन ब्याज की राशि निवेश की अवधि होने पर ही दी जाती है। 
  • नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट में जमा राशि पर आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत कर छूट मिलती है। 
  • एनएससी अकाउंट खुलवाने के लिए आपको न्यूनतम 100 रुपए निवेश करना होगा। 
  • आप एनएससी में कितनी भी रकम निवेश कर सकते हैं। इसमें निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं है।
  •  योजना में भी व्यक्ति जिसके उम्र 18 साल से अधिक हो निवेश कर सकता है। इसमें ज्वॉइंट अकाउंट भी खोला जा सकता है। 

पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट योजना

  • यह एक तरह की फिक्स डिपॉजिट (एफडी) है। इसमें एक तय अवधि के लिए एकमुश्त पैसा निवेश करके आप निश्चित रिटर्न और ब्याज भुगतान का फायदा ले सकते हैं। 
  • पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट अकाउंट 1 से 5 साल तक की अवधि के लिए 5.5 से 6.7 फीसदी तक ब्याज दर की पेशकश करता है। 
  • भारतीय डाक की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक 5 साल की सावधि जमा के तहत निवेश करने पर आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80 सी के तहत टैक्स छूट का फायदा ले सकते हैं। 
  • इसमें 1000 रुपए का मिनिमम निवेश करना होता है। वहीं अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है।
  •  योजना में भी व्यक्ति जिसके उम्र 18 साल से अधिक हो निवेश कर सकता है। इसमें ज्वॉइंट अकाउंट भी खोला जा सकता है। 

वॉलेंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) 

  • EPF में बेसिक सैलरी का सिर्फ 12% ही कॉन्ट्रीब्यूट किया जा सकता है लेकिन VPF में निवेश करने की कोई सीमा नहीं होती। यानी अगर कर्मचारी अपनी इनहैंड सैलरी को कम रखकर भविष्य निधि में योगदान बढ़ाता है तो इस विकल्प को VPF कहते हैं। VPF में 8.5% ब्याज दिया जा रहा है।
  • यह ईपीएफ का ही एक्सटेंशन है। इस कारण सिर्फ नौकरीपेशा ही इसे ओपन कर सकते हैं। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारी इसका लाभ नहीं उठा सकते। इसमें बेसिक सैलरी का 100 परसेंट और डीए निवेश किया जा सकता है। VPF की ब्याज दर सरकार हर वित्तीय वर्ष में तय करती है।
  • आपको अपनी कंपनी के एचआर या फाइनेंस टीम से संपर्क करना होगा और वीपीएफ में कॉन्ट्रीब्यूशन की रिक्वेस्ट करनी होगी। प्रॉसेस होते ही आपके EPF अकाउंट से VPF को जोड़ दिया जाएगा। VPF का अलग से कोई अकाउंट ओपन नहीं होता। 
  • VPF के योगदान को हर साल संशोधित किया जा सकता है। हालांकि VPF के तहत नियोक्ता पर यह बंदिश नहीं है कि वह भी कर्मचारी के बराबर ही EPF में उच्च योगदान करें।
  • यदि आप जॉब चेंज करते हैं तो इस अकाउंट को आसानी से ट्रांसफर करवा सकते हैं। इस पर लोन भी लिया जा सकता है। बच्चों के एजुकेशन, होम लोन, बच्चों की शादी आदि के लिए भीइससे लोन लिया जा सकता है।
  • VPF खाते से रकम की आंशिक निकासी के लिए खाताधारक का 5 साल नौकरी करना जरूरी है, वर्ना टैक्स कटता है। VPF की पूरी रकम केवल रिटायरमेंट पर ही निकाली जा सकती है। 
  • यह स्कीम सरकार की है, इसलिए पूरी तरह से सुरक्षित है और इसमें ब्याज भी ज्यादा मिलता है। इसमें मिलने वाले ब्याज पर टैक्स नहीं देना होता। आप 100 परसेंट तक कॉन्ट्रीब्यूशन इसमें कर सकते हैं।
  • VPF पर आयकर कानून के सेक्शन 80C के तहत टैक्स डिडक्शन का फायदा मिलता है। EPF की तरह ही VPF खाते में किय गया निवेश भी EEE कैटेगरी में आता है, यानी इसमें निवेश, उस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पीरियड पूरा होने पर मिलने वाला पैसा पूरी तरह टैक्स फ्री है।

क्या है सेक्शन 80C? 
आयकर कानून का सेक्शन 80C दरअसल इनकम टैक्स कानून, 1961 का हिस्सा है। इसमें उन निवेश माध्यमों का उल्लेख है, जिनमें निवेश कर आयकर में छूट का दावा किया जा सकता है। कई लोग वित्त वर्ष खत्म होने से पहले टैक्स बचाने के लिए निवेश करना शुरू करते हैं।

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