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पर्सनल फाइनेंस:हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय इन 7 बातों का रखें ध्यान, जल्दबाजी में गलत पॉलिसी चुनने पर उठाना पड़ सकता है नुकसान

नई दिल्ली2 महीने पहले
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कोरोना काल में हेल्थ इंश्योरेंस लेने वालों के संख्या में इजाफा हुआ है
  • जिस पॉलिसी में इलाज के ज्यादा से ज्यादा खर्च कवर हो उस पॉलिसी को लेना चाहिए
  • किसी भी बीमा कंपनी से इंश्योरेंस प्लान लेने से पहले उस कम्पनी के नेटवर्क अस्पतालों को देखना चाहिए

देश में कोरोना महामारी का कहर थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। ऐसे में सही उपचार और वित्तीय सुरक्षा के लिए लोग हेल्थ इंश्योरेंस ले रहे हैं। अगर आपने अभी तक कोई इंश्योरेंस प्लान नहीं लिया है और आप इन दिनों कोरोना या अन्य बीमारियों के इलाज को कवर करने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लेने का विचार कर रहे हैं, तो हम आपको बता रहे हैं कि हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

पॉलिसी में क्या-क्या कवर होगा ये ठीक से समझ लें
बीमा कंपनियां कई तरह की बीमा पॉलिसियां ऑफर कर रहे हैं। हर बीमा कंपनी के अपने नियम होते हैं, उसी हिसाब से वे पॉलिसी बनाती हैं। हेल्थ पॉलिसी खरीदने से पहले यह समझ लें कि उसमें कितना और क्या-क्या कवर होगा। जिस पॉलिसी में ज्यादा से ज्यादा चीजें जैसे टेस्ट का खर्च और एम्बुलेंस का खर्च कवर हो उस पॉलिसी को लेना चाहिए। ताकि आपको जेब से पैसे खर्च न करने पड़ें।

पहले से मौजूद बीमारियां कवर हैं कि नहीं?
सभी हेल्थ इंश्योरेंस प्लान पहले से मौजूद बीमारियों को कवर करते हैं। लेकिन, इन्हें 48 महीने के बाद ही कवर किया जाता है। कुछ 36 महीने बाद इन्हें कवर करते हैं। हालांकि, पॉलिसी खरीदते वक्त ही पहले से मौजूद बीमारियों के बारे में बताना होता है। इससे क्लेम सेटेलमेंट में दिक्कत नहीं आती है।

अस्पतालों का नेटवर्क
किसी भी हेल्थ प्लान में निवेश करने से पहले सुनिश्चित करें कि आप योजना के तहत आने वाले नेटवर्क अस्पतालों पर विचार किया है। नेटवर्क अस्पताल अस्पतालों का एक समूह हैं जो आपको अपनी वर्तमान हेल्थ प्लान को भुनाने की अनुमति देता है। हमेशा उसी प्लान के लिए जाएं जो आपके क्षेत्र में अधिकतम नेटवर्क अस्पताल प्रदान करता है अन्यथा आपका निवेश आपात स्थिति के समय में काम में नहीं आएगा।

को-पे को चुनना पड़ेगा जेब पर भारी
थोड़े पैसे बचाने और प्रीमियम को कम करने के लिए कई बार लोग को-पे की सुविधा ले लेते हैं। को-पे का मतलब होता है कि क्लेम की स्थिति में पॉलिसी धारक को खर्चों का कुछ फीसदी (उदाहरण के लिए 10 फीसदी) खुद भुगतान करना होगा। को-पे को चुनने से प्रीमियम में मिलने वाला डिस्काउंट बहुत ज्यादा नहीं होता। लेकिन आपके बीमार पड़ने पर ये आपकी जेब खाली करा सकता है।

अपनी मेडिकल हिस्ट्री न छुपाएं
हेल्थ पॉलिसी लेते समय कई लोग ऐप्लीकेशन फॉर्म में अपनी मेडिकल हिस्ट्री का खुलासा सही से नहीं करते हैं। कुछ लोग ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें इस बात का पता होता है कि इन स्थिति जैसे डायबिटीज, ज्यादा ब्लड प्रेशर आदि के बारे में बताने से उनकी ऐप्लीकेशन रिजेक्ट हो सकती है। इस बात का ध्यान रखें कि किसी तथ्य के बारे में नहीं बताना बीमा कंपनियों द्वारा गलत समझा जाता है और वे आपके क्लेम को रिजेक्ट कर सकती हैं।

पॉलिसी कवर काम होने पर 'सुपर टॉप-अप' से करें अपग्रेड
इलाज के बढ़ते खर्चों और कोविड-19 महामारी को देखते हुए कई लोगों को लगता है कि बीमा कवर की यह रकम पर्याप्‍त नहीं है। ऐसे में वो अपने कवर को 'सुपर टॉप-अप' से अपग्रेड कर सकते हैं। सुपर टॉप-अप हेल्‍थ प्‍लान उन लोगों के लिए अतिरिक्त कवर होता है जिनके पास पहले से ही हेल्‍थ पॉलिसी है। यह काफी कम कीमत में मिल जाता है। चूंकि कम कीमत में इससे अतिरिक्‍त कवर मिल जाता है, इसीलिए जिस व्यक्ति के पास पहले से इंश्योरेंस कवर है उसके लिए ये सही विकल्प है।

कोरोना काल में लगातार बढ़ रही इंश्योरेंस क्लेम की संख्या
पूरी दुनिया के साथ हमारे देश में भी कोरोना महामारी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। देश ने संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ने के साथ ही हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम में भी बढ़ोतरी हुई है। जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के अनुसार 29 सितंबर तक कुल 4,880 करोड़ रुपए के राशि के लिए 3.18 लाख से ज्यादा क्लेम आए हैं। इंश्योरेंस कंपनियों ने 29 सितंबर तक 1,964 करोड़ रुपए के 1.97 लाख क्लेम सेटल किए हैं।

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