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पर्सनल फाइनेंस:इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C ही नहीं इन 10 तरह से आप भी बचा सकते हैं ज्यादा इनकम टैक्स

नई दिल्ली2 महीने पहले
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आयकर कानून के ऐसे कई सेक्शन हैं जिसके तहत आप ज्यादा से ज्यादा टैक्स छूट का लाभ ले सकते हैं
  • सेक्शन 80D के तहत बीमा प्रीमियम पर टैक्स बचा सकते हैं
  • 80E के तहत आप एजुकेशन लोन पर टैक्स छूट का लाभ ले सकते हैं

इनकम टैक्स फाइल करने से पहले ज्यादातर लोगों के मन में ये सवाल रहता है कि ज्यादा से ज्यादा टैक्स कैसे बचाया जा सकता है। आम तौर पर लोगों को 5 साल की फिक्स्ड डिपॉजिट या अन्य सेविंग स्कीम पर मिलने वाली इनकम टैक्स छूट की जानकारी तो रहती है, लेकिन उन्हें इसके अलावा कई अन्य इनकम टैक्स छूट की जानकारी नहीं होती है। इसके चलते वो इनकम टैक्स छूट का पूरा फायदा नहीं ले पाते। आज अभय शर्मा, पूर्व अध्यक्ष इंदौर चार्टर्ड अकाउंटेंट आपको आयकर कानून के कुछ ऐसे सेक्शनों के बारे में बता रहे हैं। जिनसे आप ज्यादा टैक्स बचा सकते हैं।

सेक्शन 80C
आयकर कानून का सेक्शन 80C दरअसल इनकम टैक्स कानून, 1961 का हिस्सा है। इसमें उन निवेश माध्यमों का उल्लेख है, जिनमें निवेश कर आयकर में छूट का दावा किया जा सकता है। कई लोग वित्त वर्ष खत्म होने से पहले टैक्स बचाने के लिए निवेश करना शुरू करते हैं। आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत, आपकी कुल आय से 1.5 लाख रुपए की कटौती का दावा कर सकते हैं। आसान भाषा में इसे ऐसे समझें, आप धारा 80C के माध्यम से अपनी कुल कर योग्य आय से 1,50,000 रुपए तक कम कर सकते हैं।

सेक्शन 80D
सेक्शन 80D चिकित्सा खर्च पर कटौती के लिए है। इसके तहत खुद, परिवार और आश्रित माता-पिता के स्वास्थ्य के लिए भुगतान किए गए चिकित्सा बीमा प्रीमियम पर कर बचा सकता है। स्वयं / परिवार के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम के लिए धारा 80 D कटौती की सीमा 25 हजार रुपए है। वरिष्ठ नागरिक माता-पिता के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम के लिए, आप 50 हजार रुपए तक की कटौती का दावा कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, 5 हजार रुपए की सीमा तक स्वास्थ्य जांच की भी अनुमति है और इसे समग्र सीमा में शामिल किया गया है।

सेक्शन 80DD
यदि किसी विकलांग व्यक्ति के इलाज पर आप खर्चा कर रहे हैं तो इस सेक्शन के तहत कर छूट पा सकते हैं। विकलांग व्यक्ति में माता-पिता, पत्नी, बच्चे, भाई और बहन हो सकते हैं, जो संबंधित व्यक्ति पर डिपेंडेंट हों। हिंदु अनडिवाइडेड फैमिली (HUF) केस में फैमिली का कोई भी व्यक्ति हो सकता है। इस सेक्शन के तहत कुल कटौती की सीमा 1.5 हजार रुपए तक है।

सेक्शन 80E
सेक्शन 80E एजुकेशन लोन पर ब्याज में कटौती प्रदान करता है। इस तरह की कटौती का दावा करने से जुड़ी महत्वपूर्ण शर्तें यह हैं कि लोन किसी व्यक्ति या उसके पति या बच्चों द्वारा उच्च अध्ययन (भारत या विदेश में) के लिए बैंक या वित्तीय संस्थान से लिया जाना चाहिए। कोई इस कटौती का दावा उस वर्ष से शुरू कर सकता है जिसमें ऋण चुकाना शुरू हो जाता है और अगले 7 सालों तक (यानी कुल 8 मूल्यांकन वर्ष) या लोन चुकाने से पहले, जो भी पहले हो।

सेक्शन 80EE
सेक्शन 80 EE मकान मालिक को होम लोन ईएमआई के ब्याज पर 50 हजार रुपए (धारा 24) की अतिरिक्त कटौती का दावा करने की अनुमति देता है। बशर्ते लोन 35 लाख रुपए से अधिक नहीं होना चाहिए और संपत्ति का मूल्य 50 लाख रुपए से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, किसी व्यक्ति के पास लोन स्वीकृत होने के समय उसके नाम पर पंजीकृत कोई अन्य संपत्ति नहीं होनी चाहिए।

सेक्शन 80G
सामाजिक हित के लिए काम करने वाली संस्थाओं को दान देकर आप 80जी के तहत टैक्स में छूट का फायदा भी उठा सकते हैं। इनकम टैक्स की धारा 80 जी के तहत कोई भी शख्स, एचयूएफ या कंपनी किसी फंड या चैरिटेबल संस्था को दिए गए दान पर टैक्स छूट ले सकता है। शर्त यह है कि आप जिस संस्था को यह दान देते हैं, वह सरकार के पास रजिस्टर्ड जरूर होनी चाहिए। कटौती का क्लेम कुछ मामलों में 100 फीसदी तक तो कुछ में 50 फीसदी तक या किसी में बिना लिमिट वाला हो सकता है। दान चेक/ड्राफ्ट या कैश में ​दिया जा सकता है। लेकिन कैश में 2000 रुपए से ज्यादा के दान पर कर कटौती का फायदा नहीं मिलेगा।

सेक्शन 80GG
अगर आपको हाउस रेंट अलाउंस (HRA) नहीं मिलता है लेकिन आप किराये के मकान में रहते हैं, तब भी आयकर अधिनियम, 1961 के धारा 80GG के अंतर्गत आपको दिए हुए किराये पर टैक्स छूट मिल सकती है। धारा 80GG के अंतर्गत सालाना 60,000 रु. ( 5,000 रु. प्रति महीना) की अधिकतम छूट की अनुमति है। आपको इस धारा का लाभ नहीं मिल सकता है अगर आपके (या आपकी बीवी/बच्चे) के पास खुद का घर है। इस धारा के फायदे का दावा करने के लिए, आपको 10BA फॉर्म भरना होगा।

सेक्शन 80TTA
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80TTA बचत खाता ब्याज से अर्जित आय पर 10 हजार तक की कटौती प्रदान करता है। यह छूट व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित फैमिली (HUF) के लिए उपलब्ध है। यदि बैंक ब्याज से आय INR 10,000 से कम है, तो पूरी राशि में कटौती की अनुमति दी जाएगी। हालाँकि, यदि बैंक ब्याज से आय 10 हजार से अधिक है, तो उसके बाद की राशि कर योग्य होगी।

सेक्शन 80DDB
सेक्शन 80DDB के तहत अपने किसी आश्रित की गंभीर और लंबी बीमारी के इलाज में खर्च की गई रकम पर आय कर कटौती मिलती है। कोई आय कर दाता अपने माता-पिता, बच्चे, आश्रित भाई-बहनों और पत्नी के इलाज में खर्च की गई रकम की कटौती के लिए दावा कर सकता है। इनमें कैंसर, हीमोफीलिया, थैलीसीमिया और एड्स आदि बीमारियां शामिल हैं। आम तौर पर यह कटौती 40 हजार रुपए होती है। वरिष्ठ नागरिकों के मामले में यह कटौती 1 लाख रुपए तक हो सकती है। इसके लिए चिकित्सक से प्रमाण पत्र लेना होता है।

सेक्शन 80CCD (1B)
अगर आपने नेशनल पेंशन स्कीम का लाभ ले रखा है तो आप सेक्शन 80CCD (1B) के तहत 50 हजार तक इनकम टैक्स का लाभ ले सकते हैं। इस तरह सेक्शन 80CCD (1B) और 80C मिलाकर आप कुल 2 लाख रुपए तक टैक्स छूट का लाभ ले सकते हैं।

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