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घर में भी धधक सकती है दिल्ली जैसी आग:18-20 घंटे AC-कूलर-पंखे चलाने से शॉर्ट सर्किट का खतरा, फिर निकलने का रास्ता तक नहीं बचता

नई दिल्ली11 दिन पहले
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दिल्ली के मुंडका में भीषण आग लगने से 27 लोगों की मौत हो गई। बताया जा रहा है अभी भी वहां कुछ लोग फंसे हुए हो सकते हैं। दिल्ली फायर सर्विसेज के डायरेक्टर अतुल गर्ग ने बताया है कि बिल्डिंग में किसी भी तरह का दूसरा एग्जिट नहीं था। जो फायर एक्सटिंग्विशर थे वह भी एक्सपायर हो चुके थे। वहां पर फायर सेफ्टी के किसी भी मानक का पालन नहीं किया गया।

दरअसल, लापरवाही से दिल्ली जैसी आग घरों में भी धधक सकती है। तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच है और गर्मी को मात देने के लिए AC, पंखे, कूलर 18 से 20 घंटे तक चल रहे हैं। ये अपनी फुल कैपेसिटी में चलते हैं। इनके लगातार चलने से शॉर्ट सर्किट होने की आशंका बढ़ जाती है।

शॉर्ट सर्किट से लगने वाली आग खतरनाक होती है। ऐसी स्थिति में इलेक्ट्रिकल करंट के डायरेक्शन में बदलाव होता है। अचानक से अधिक वॉल्यूम में इलेक्ट्रिसिटी दौड़ने लगती है। यह वायरिंग के जरिए एक साथ पूरे घर में फैल सकती है। जब तक लोग कुछ समझ पाते हैं तब तक यह सब कुछ अपनी चपेट में ले लेता है। इससे बाहर निकलने का काफी कम समय बचता है।

समय पर AC की नहीं होती सर्विस

इलेक्ट्रिशियंस का कहना है समय पर AC की सर्विसिंग नहीं की जाती। जब गर्मी के दिन आते हैं तो लोग अपने से ही फिल्टर की सफाई कर लेते हैं। उन्हें लगता है कि इससे AC की सर्विस हो गई, जबकि पुराने AC को सर्विस चाहिए। AC के रेफ्रिजरेंट को भरने और फिल्टर की सफाई इसमें शामिल है। कई जगहों पर खुले नाले होने से अमोनिया गैस बनती है। ये अमोनिया गैस AC में लगे कॉपर को धीरे-धीरे नष्ट करता है। इससे रेफ्रिजरेंट में लीकेज होता है। कुल मिलाकर AC की सर्विस नहीं होने से इसमें आग लगने की संभावना बढ़ जाती है।

ऑफ रहने पर भी शॉर्ट सर्किट होने की आशंका

जो यह सोचते हैं कि फ्रिज, कूलर, AC या दूसरे इलेक्ट्रानिक उपकरणों को स्विच ऑफ कर दिया और कोई खतरा नहीं है, वो गलत हैं, क्योंकि यदि इन उपकरणों के प्लग बोर्ड में लगे हुए हैं तब भी यह बिजली खपत करता है। बिजली के फ्लक्चुएट करने पर इनमें आग लगने की आशंका बनी रहती है।

बिना सर्विसिंग के ही पंखे, कूलर चलाना खतरनाक

सर्दियों में पंखे, 18-20 घंटे AC-कूलर-पंखे चलाने से शॉर्ट सर्किट का खतरा, फिर निकलने का रास्ता तक नहीं बचता, कूलर आमतौर पर बंद रहते हैं। जब गर्मियों के दिन आते हैं तो कई बार लोग बिना सर्विसिंग कराए ही इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। इन मशीनों में ल्यूब्रि सूखकेंट्स जाते हैं। जब ये इलेक्ट्रॉनिक सर्किट से जुड़ते हैं तो घर्षण शुरू होता है। नतीजा आग लगने की आशंका बढ़ जाती है।

कभी चेक किया घर में किस तरह के बिजली के बोर्ड, प्लग आदि लगे हैं

आजकल कई कंपनियां हाई क्वालिटी के बिजली के बोर्ड, प्लग, स्विच आदि बनाती हैं, जबकि पैसे बचाने के चक्कर में लोग घटिया क्वालिटी के वायर, बोर्ड, प्लग आदि लगा लेते हैं। ये अधिक देर तक नहीं चल पाते और न ही अधिक लोड उठा पाते हैं। इनसे भी घर में शॉर्ट सर्किट होने की आशंका बढ़ जाती है।

आग से सुरक्षा के लिए होती है कोटिंग

क्या आपके घरों में रखे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में विशेष केमिकल का कोट लगा है। दरअसल, टीवी, कंप्यूटर, मोबाइल, लैपटॉप, CCTV आदि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बाहरी और भीतरी सतहों पर स्पेशल केमिकल चढ़ाया जाता है, ताकि ये आग से कुछ हद तक सुरक्षित रह सकें। वैज्ञानिकों के अनुसार, पॉलिब्रोमिनेटेड डाइफिनाइल् इथर्स (PBDE), TRIAZINE का इस्तेमाल इन उपकरणों को फायर सेफ्टी बनाने में किया जाता है।

इसी तरह टेट्राब्रोमोबिसफेनोल और टेट्राक्लोरोबिसफेनोल की कोटिंग सर्किट बोर्ड की भीतरी दीवारों और प्लास्टिक केस में किया जाता है। दिल्ली के मुंडका में जिस इमारत में आग लगी वहां CCTV मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट थी। संभव है यहां इन उपकरणों में ऐसे फायर सेफ्टी कमेकिल का प्रयोग कम किया गया हो।

दिल्ली में फायर ब्रिगेड को हर दिन आ रेह 200 कॉल

दिल्ली फायर सर्विसेज का ही कहना है कि जनवरी के मुकाबले मई में फायर ब्रिगेड को कॉल करने में 4 गुनी बढ़ोतरी हुई है। जनवरी में जहां 50 कॉल आते थे, वहीं मई में हर दिन 200 कॉल आ रहे हैं ।अप्रैल का ही डाटा लिया जाए तो हर दिन लोगों ने दिल्ली फायर सर्विसेज को 110 कॉल किए जो आग लगने की थी।

अग्निशमन यंत्र चलाना जरूर सीखें

नई दिल्ली म्यूनिसिपल कारपोरेशन के पूर्व फायर ऑफिसर सज्जन कुमार शर्मा के अनुसार, नियमित अंतराल पर फायर ड्रिल करने की जरूरत है। 98 प्र्तिशत भारतीयों को ये नहीं पता होता कि अग्निशमन यंत्र कैसे चलाया जाता है, यानी किसी बिल्डिंग में आग लगी हो और किसी फ्लोर पर अग्निशमन यंत्र लगे हों तब भी वहां फंसे लोग इसका इस्तेमाल नहीं कर पाते। नतीजा कैजुअलटी अधिक होती है।

घरों में अर्थिंग भी जरूरी : अर्थिंग से इलेकट्रॉनिक उपकरणों की सुरक्षा हो पाती है। यह ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमें किसी उपकरण के नॉन करंट वाले धातु भागों को एक लो रेसिसटेंस कंडक्टर के द्वारा अर्थ के साथ जोड़ते हैं। अगर घरों में अर्थिंग नहीं की गई तो तेज करंट आने पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जलने का खतरा रहता है।