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स्कूल कैसे खुल सकते हैं:स्कूलों में हो कोरोना टेस्ट की सुविधा, क्लासरूम में लगातार फ्रेश एयर आए; जानिए दुनिया के जिन देशों में स्कूल शुरू हुए, वहां क्या तैयारियां की गईं

2 महीने पहले
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कुछ रिसर्च के मुताबिक दुनियाभर में कोरोनावायरस से बड़ों की तुलना में बच्चे कम प्रभावित हुए हैं। इसी आधार पर कई लोग छोटे बच्चों के स्कूल खोलने की वकालत कर रहे हैं।
  • एक्सपर्ट्स की सलाह- हाइब्रिड सिस्टम अपनाएं, बच्चे स्कूल आएं और ऑनलाइन भी पढ़ाई करें
  • बच्चे और टीचर्स क्लास में धीमी आवाज में बात करें, लो वॉइस से ड्रॉपलेट्स दूर तक नहीं फैलते
  • स्कूल कम वक्त के लिए खुलें, दो डेस्क के बीच 6 फीट की दूरी हो, बच्चे ग्रुप में लंच न कर सकें

​​​​​​पॉम बेलुक/अपूर्वा मंडाविले/बेनेडिक्ट केरी. अमेरिका, भारत समेत तमाम देशों में स्कूलों को दोबारा खोलने को लेकर कवायद चल रही है। ये कवायद उस वक्त हो रही है, जब कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं। अब तक किसी रिसर्च में भी यह साबित नहीं हो पाया है कि क्लासरूम में कोरोना इंफेक्शन कम फैलता है।

WHO की यह बात चिंता और बढ़ा देती है कि यह वायरस एयरबोर्न है, यानी भीड़, बंद जगहों, पर्याप्त मात्रा में हवा की कमी वाले स्थानों में तेजी से फैलता है। अमेरिका के तमाम स्कूलों में यह खतरा मौजूद है, इसलिए पैरेंट्स, डॉक्टर्स, चाइल्ड स्पेशलिस्ट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर स्कूल नहीं खोलने को लेकर दबाव बना रहे हैं।

स्कूलों को खोलने को लेकर अपने-अपने तर्क

स्कूल खोलने को लेकर चल रही बहस में दो पक्ष हैं। एक के अनुसार बच्चों में कोरोना फैलने की दर कम है, इसलिए स्कूल खोल दिए जाएं। हालांकि डाटा भी बताते हैं कि दुनियाभर में कोरोनावायरस से बड़ों की तुलना में बच्चे कम प्रभावित हुए हैं। इसी आधार पर कई लोगों का मानना है कि बच्चे कोरोना के बड़े करियर नहीं हैं। उनसे उतना खतरा नहीं है, इसलिए प्राथमिक स्कूल खोले जा सकते हैं, भले ही हाईस्कूल बंद रखे जाएं। 

दुनिया के कई देशों ने स्कूल खोलने से पहले रिसर्च किया, आइए जानते हैं कि उसके नतीजे क्या रहे- 

आयलैंड: आयरलैंड में 6 कोरोना संक्रमितों पर एक स्टडी की गई। इन लोगों में तीन स्टूडेंट्स और तीन अधिक उम्र के लोग शामिल थे। इनके संपर्क में आए 1155 लोगों का विश्लेषण किया गया। इन संपर्कों में ऐसे भी छात्र थे, जो स्कूल की एक्टिविटी, खेल, म्यूजिक क्लासेस, प्रार्थना जैसी सामूहिक गतिविधियों का हिस्सा रहे। लेकिन स्टूडेंट्स से किसी को भी इंफेक्शन नहीं हुआ, जबकि बड़े लोगों से संक्रमण के मामले सामने आए।

फ्रांस: यहां पाश्चर इंस्टीट्यूट के एपिडेमोलॉजिस्ट डॉ.अरनॉड फोन्टानेट ने क्रिपी एन विलोइस (Crépy-en-Valois) शहर के दो हाई स्कूलों में कोरोना टेस्ट किया। यहां मार्च में स्कूल बंद होने से पहले दो टीचर्स कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। एक स्कूल में लगभग 38% स्टूडेंट और 43% टीचर में लक्षण पाए गए, जबकि दूसरे स्कूल में 59 फीसदी स्टाफ में एंटीबॉ़डी पाई गई। जिस आधार में फोन्टानेट ने सरकार को रिपोर्ट दी कि हाईस्कूल में इंफेक्शन फैल रहा है। 

इजरायल: यहां वाॅशिंगटन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने एक स्टडी की। इसमें पाया गया कि जब इजरायल में मई में स्कूल खोले गए और क्लास में स्टूडेंट्स की संख्या को लिमिटेड करना बंद किया गया तो गंभीर परिणाम सामने आए। वहां 200 बच्चों और स्कूल स्टाफ में इंफेक्शन पाया गया। 

दुनिया के जिन देशों में स्कूल शुरू हुए, जानिए वहां क्या तैयारियां की गईं-

नॉर्वे और डेनमार्कः यहां अप्रैल में स्कूल खोले गए। सिर्फ बड़े बच्चों को स्कूल आने की अनुमति मिली। क्लास में स्टूडेंट्स की संख्या सीमित रखी गई। सैनिटाइजेशन के लिए एडवांस सिस्टम आपनाया। डेस्कों की बीच दूरी निर्धारित की गई। लंच के लिए बच्चों को छोटे ग्रुप में जाने को कहा। 

ग्रीस के ओयन्निना स्थित एक स्कूल के क्लासरूम में दवा का छिड़काव करता एक वर्कर।
ग्रीस के ओयन्निना स्थित एक स्कूल के क्लासरूम में दवा का छिड़काव करता एक वर्कर।

स्विट्जरलैंड/ग्रीसः स्कूलों में कम संख्या में बच्चों बुलाया जा रहा है। इसके अलावा बड़े बच्चों को ही स्कूल में आने की अनुमति दी।

बेल्जियम और फ्रांस: टीचर्स को मास्क पहनना जरूरी किया। फ्रांस ने हाईस्कूल तक स्टूडेंट्स के लिए मास्क पहनना अनिवार्य किया है। 

जर्मनीः जिन स्टूडेंट्स का टेस्ट निगेटिव आया है, उन्हें मास्क पहनने से फ्री किया। बेल्जियम में बच्चों को अल्टरनेट डेज और शिफ्ट में आने को कहा। क्लास में स्टूडेंट्स की संख्या को अधिकतम 10-15 किया। दो डेस्कों के बीच की दूरी बढ़ा दी। ब्रेक और लंच टाइम में स्टूडेंट्स को ग्रुप बनाने से रोक दिया।

इजरायलः किसी एक छात्र के भी संक्रमित मिलने पर पूरे स्कूल को बंद करने की व्यवस्था की गई है। कुछ देशों में इंफेक्टेड क्लासरूम के स्टूडेंट्स और टीचर को दो हफ्ते के लिए होम क्वारैंटाइन करने का नियम बनाया।

अमेरिका: हाइब्रिड सिस्टम अपनाने पर विचार हो रहा है। इसके तहत बच्चे कुछ दिन स्कूल जाएं, कुछ दिन ऑनलाइन पढ़ाई करें। अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल(CAD) ने स्कूलों में फ्रेश एयर सर्कुलेशन सुनिश्चित करवाने की गाइडलाइंस बनाई है।

एक्सपर्ट्स कहते हैं स्कूलों को सुनिश्चित करनी होगी सुरक्षा-

  • टेक्सास यूनिवर्सिटी में बायोलॉजी और सांख्यिकी की प्रोफेसर लॉरेन एंसेल मेयर्स का कहना है कि स्कूल मास्क और बच्चों की संख्या कम करने जैसे उपायों के साथ कैसे संक्रमण को रोकते हैं, यह सबसे महत्वपूर्ण है। इसके अलावा अगस्त में इंफेक्शन किस स्तर तक पहुंचेगा, यह भी स्कूल खोले जाने के लिए निर्णायक फैक्टर होगा।
  • मेयर्स कहती हैं कि आस्टिन जैसे शहरों में जहां इंफेक्शन प्रत्येक हजार लोगों में सात लोगों तक पहुंच गया है, इस हिसाब से 500 बच्चों वाले किसी भी स्कूल में 4 कोरोनावायरस पॉजिटिव स्टूडेंट होंगे। हालांकि स्कूल इसका फैलना रोक सकते हैं। जो इस बात पर निर्भर करेगा कि उनकी तैयारी कैसी है। 
  • हॉपकिंस-ब्लूमवर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रोफेसर डॉ. जोशुआ सरफेस्टीन का मानना है कि स्कूल खोले जाने से पहले कम्युनिटी स्प्रेड को रोकना जरूरी है। कुछ इंफेक्शियस डिसीज एक्सपर्ट का भी मानना है कि स्कूल खोलने से वायरस के का फैलाव कम्युनिटी के स्तर पर होने का खतरा है। 
  • द अमेरिकन अकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने डाटा के आधार पर स्कूलों को सलाह दी है कि यदि वे स्कूल खोलना ही चाहते हैं तो उन्हें पहले बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी हर तरह की सावधानी रखने की तैयारी कर लेना चाहिए। 
  • वन्डरविल्ट यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन में प्रोफेसर और इंफेक्शियस डिसीज एक्सपर्ट डॉ. कैथरीन एडवर्डस ने स्कूल को दोबारा खोलने से पहले यह सुनिश्चित करने का सुझाव दिया है कि स्कूल सुरक्षा की अप्रोच क्या होनी चाहिए। 
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