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कंपैरिजन / एफडी की तुलना में डेट म्युचुअल फंड्स में निवेश करने पर मिल सकता है अच्छा रिटर्न



date mutual fund gives higher return in comparison with fixed deposit
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date mutual fund gives higher return in comparison with fixed deposit

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 04:46 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. फिक्स्ड डिपॉज़िट यानी एफडी हममें से ज्यादातर भारतीयों का पसंदीदा निवेश है और खास तौर पर मध्यम वर्ग में काफी प्रचलित है। अक्सर लोग बोनस, बचत या अन्य अतिरिक्त रकम को लोग फिक्स्ड कर देते हैं। यह अपनी रकम को सुरक्षित रखते हुए ब्याज कमाने का बेहतर तरीका है। सीमित और तय आय वाले हम में से ज्यादातर लोगों का निवेश एफडी से शुरू होकर एफडी पर ही खत्म होता है। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि एफडी के फायदे और प्रक्रिया समझना आसान है।

 

ज्यादातर लोग निवेश करते वक्त चुकाए जाने वाले टैक्स और निवेश से मिलने वाले वास्तविक रिटर्न पर विचार नहीं करते और सिर्फ सुरक्षा और तय रिटर्न पर भरोसा करते हैं। इसलिए ज्यादातर निवेशक अन्य निवेश विकल्पों के बारे में सोचते ही नहीं हैं। जबकि बेहतर रिटर्न देने वाले अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। ऐसा ही एक विकल्प डेट म्यूचुअल फंड है। जिसमें निवेश करके फिक्स डिपॉजिट की तुलना में बेहतर रिटर्न पाया जा सकता है।

एफडी पर वास्तविक रिटर्न को ऐसे समझ सकते हैं

  1. मान लीजिए, आप 30% टैक्स के दायरे में आते हैं और एफडी पर आपको 7% की दर से रिटर्न मिल रहा है। जबकि असलियत यह है कि आपके हाथ में 7% रिटर्न नहीं आ रहा है। इस पर आपको 30% टैक्स चुकाना पड़ेगा, जो इस सात फीसदी का 2.1% होता है। यानी आपके हाथ में सिर्फ 4.9% रिटर्न ही आएगा।

  2. अगर इसे महंगाई के लिहाज़ से देखें, तो आपके निवेश पर रिटर्न कुछ भी नहीं बनता। जैसे- अगर महंगाई दर 5% है और टैक्स के बाद आपको निवेश पर 4.9% रिटर्न मिल रहा है, तो असल में आपको निवेश पर रिटर्न शून्य मिला है क्योंकि महंगाई बढ़ने के साथ-साथ क्रय क्षमता भी कम होती जाती है।

  3. अब बात करते हैं, डेट म्युचुअल फंड्स की। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि डेट म्युचुअल फंड से मिलने वाला रिटर्न तय नहीं होता, ये क्रेडिट रिस्क यानी जोखिम का सामना करते हैं और इस प्रकार आपका पैसा जोखिम में पड़ सकता है।

डेट म्युचुअल फंड्स कैसे काम करते हैं? 

  1. डेट फंड्स कॉर्पोरेट बॉन्ड्स, सरकारी प्रतिभूतियों, ट्रेजरी बिल, कमर्शियल पेपर और अन्य मनी मार्केट जैसे फिक्स्ड-ब्याज वाले सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं जो पूंजी को बढ़ाते हैं। डेट फंड को आय फंड या बॉन्ड फंड भी कहा जाता है।

  2. डेट फंड में निवेश से लो-कॉस्ट स्ट्रक्चर, अपेक्षाकृत स्थिर रिटर्न (6% से 7% तक), अपेक्षाकृत उच्च तरलता (यानी डेट म्युचुअल फंड को एक दिन के भीतर भी रिडीम किया जा सकता है और आमतौर पर इस पर एफडी की तरह कोई शुल्क भी नहीं लगता।), उचित सुरक्षा और बेहतर कर दक्षता जैसे फायदे हैं।

  3. डेट फंड उन निवेशकों के लिए आदर्श हैं जो नियमित आय का लक्ष्य रखते हैं, और वित्तीय लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं। इसमें भी जोखिम कम और स्थिरता अधिक होती है। डेट फंड अन्य इक्विटी म्युचुअल फंड स्कीम से बहुत ज्यादा अलग नहीं है। हालांकि आपके पैसों की सुरक्षा के लिहाज़ से यह इक्विटी म्युचुअल फंड से बेहतर है।

  4. डेट म्युचुअल फंड टैक्स के मामले में एफडी से बेहतर है। क्योंकि एफडी पर टैक्स आपके इनकम टैक्स की दर से लगता है जबकि डेट म्युचुअल फंड में टैक्स सिर्फ इनकी बिक्री के वक्त तय होता है। जब तक आप इन्हें नहीं बेचते, कोई टैक्स नहीं चुकाना होता। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप इन्हें कितने लंबे वक्त के लिए रखे रहते हैं।

  5. निवेश पर रिटर्न ऐसे समझ सकते हैं

    मान लीजिए आपने दोनों विकल्पों में 2-2 लाख रुपए 3-3 साल के लिए निवेश किए हैं, तो रिटर्न की स्थिति यह हो सकती है। 

    विकल्प डेट फंड एफडी 
    निवेश 2 लाख रु. 2 लाख रु. 
    रिटर्न की दर 7% 7% 
    मियाद 3 वर्ष   3 वर्ष
    फंड वैल्यू (अंत में) 2.45 लाख रु. 2.45 लाख रु.लाख रु.
    महंगाई दर 6% 6%
    इंडेक्स्ड निवेश 2.38 लाख रु. अनुमति नहीं
    टैक्स योग्य राशि 7,000 रु. 45,000 रु. 
    टैक्स 2,400 रु. 15,000 रु.
    टैक्स के बाद रिटर्न 42,600 रु. 30,000 रु. 

  6. नोट- निवेशकों को जोखिम लेने की क्षमता, रिटर्न, लिक्विडिटी और टैक्सेशन पर पूरी तरह सोच विचार करने के बाद ही निवेश का फैसला करना चाहिए।

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