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पेंशन / ऑर्गनाइज्ड सेक्टर के कर्मियों को मिलती है पेंशन, मृत्यु होने पर परिजनों को भी मिलेगी



Danik Bhaskar | Sep 16, 2018, 04:11 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. ऑर्गनाइज्ड सेक्टर में काम करने वाली कंपनी अपने कर्मचारियों के इम्प्लाई पेंशन स्कीम में भी योगदान करती है। इस पेंशन का लाभ कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद मिलता है, लेकिन इसके लिए कर्मचारी का कम से कम 10 साल तक लगातार नौकरी करना जरूरी है।


इसके अलावा कर्मचारी के पूरी तरह से डिसेबल हो जाने पर भी वह इस पेंशन को लेने का हकदार होता है। यह इम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड में कंपनी द्वारा किए जाने वाले 12 फीसदी योगदान का 8.33 फीसदी होता है। सरकार भी इसमें योगदान देती है, हालांकि यह रकम बेसिक सैलरी के 1.16 फीसदी से ज्यादा नहीं होती।

प्रोविडेंड पेंशन फंड से जुड़ी बड़ी बातें

  1. क्या है फैमिली पेंशन?

    मेंबर इम्प्लॉई की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी को पेंशन मिलती है। अगर इम्प्लॉई के बच्चे हैं तो उसके 2 बच्चों को भी 25 साल की उम्र तक पेंशन मिलती है। अगर इम्प्लॉई शादीशुदा नहीं है। तो उसके द्वारा पीएफ व पेंशन के लिए बनाए गए नॉमिनी को जिंदगीभर पेंशन मिलती है। और अगर कोई नॉमिनी नहीं हैं तो ऐसी स्थिति में पेंशन के हकदार मृत इम्प्लॉई पर निर्भर उसके मां या पिता होंगे। उन्हें ये पेंशन आजीवन मिलती है।

  2. दो पत्नियां भी हकदार

    अगर किसी इम्प्लॉई की दो पत्नियां हैं तो उसके मरने के बाद पेंशन की हकदार उसकी पहली पत्नी होगी। पहली पत्नी की मृत्यु के बाद उसकी दूसरी पत्नी को यह पेंशन मिलती रहेगी। इसी तरह अगर मृतक की पत्नी या पति की मौत हो जाए या फिर वे दूसरी शादी कर लें तो बच्चों को पेंशन का लाभ मिलता रहता है। मृत इम्प्लॉई के किसी भी तरह की परमानेंट डिसएबिलिटी से ग्रस्त बच्चे को पेंशन का लाभ पूरी जिंदगी दिया जाता है।

  3. यह बेहद खास

    ईपीएफ ने फैमिली पेंशन के लिए न्यूनतम 10 साल की सर्विस अनिवार्यता नहीं रखी है। यानी 10 साल पूरा होने से पहले भी अगर इम्प्लॉई की मौत हो जाती है तो उसके परिवार को पेंशन का लाभ मिलेगा।