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राहत / HDFC से कर्ज लेना हुआ सस्ता, बैंक ने MCLR 0.1 फीसदी घटाई

hdfc bank reduces intrest rate on loan by 0.10 percent that effective from 7 august
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hdfc bank reduces intrest rate on loan by 0.10 percent that effective from 7 august

दैनिक भास्कर

Aug 07, 2019, 10:59 AM IST

यूटिलिटी डेस्क. एचडीएफसी बैंक ने मंगलवार को एमसीएलआर में 0.10 फीसद की कटौती की है। बैंक ने आरबीआई के मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में रेपो रेट में 0.25 फीसद की कटौती के अनुमान के बीच ग्राहकों को सस्ते कर्ज का तोहफा दिया है। सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। कटौती का फैसला 7 अगस्त 2019 से प्रभावी हो जाएगा। कटौती के बाद अब एचडीएफसी बैंक की नई एमसीएलआर एक साल की अवधि वाले कर्ज के लिए 8.60 फीसद हो गई है। इससे मकान और वाहन कर्ज सस्ते होंगे और मासिक किस्तें कम होंगी।


बैंकों ने पिछले कुछ हफ्तों में अपनी कर्ज दरों में मामूली कमी की है। जानकारों का मानना है कि रिजर्व बैंक बुधवार को नीतिगत समीक्षा में लगातार चौथी बार 0.25 फीसद की कटौती कर सकता है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों से केंद्रीय बैंक की आसान धन नीति द्वारा मदद के लिए दरों में और कटौती करने को कहा है। 

पहले भी कई बैंक कम कर चुके हैं ब्याज दरें

होम फाइनेंस कंपनी HDFC ने 31 जुलाई को अलग-अलग अवधि और रकम के खुदरा लोन पर ब्याज दर में 0.10 फीसदी की कटौती की थी. यह कटौती नए कर्ज के साथ मौजूदा लोन पर भी लागू होगी। 

  • इससे 30 लाख रुपए तक के होम लोन पर 8.60 फीसदी ब्याज लिया जाएगा। महिला ग्राहकों के लिए यह दर 8.55 फीसदी होगी। यह कटौती मौजूदा ग्राहकों के लिए भी होगी।
  • 30 लाख रुपए से 75 लाख रुपये तक के कर्ज पर 8.85 फीसदी ब्याज लिया जाएगा। महिला ग्राहकों के लिए यह दर 8.80 फीसदी होगी। 75 लाख रुपये से अधिक के लोन पर क्रमश: 8.90 फीसदी और 8.85 फीसदी ब्याज दर लागू होगी।

इससे पहले पिछले महीने जुलाई में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) अपने अलग-अलग परिपक्वता अवधि के ऋणों पर ब्याज दर में 0.05 फीसद की कमी की थी। साथ ही एसबीआई ने एक साल के कर्ज पर ब्याज दर को 8.45 फीसद से कम करके 8.40 फीसद कर दिया था।

  • यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने भी हाल ही में अलग-अलग अवधि के कर्ज पर मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिग रेट्स यानी MCLR में 0.20 फीसदी तक की कटौती की है। इसके बाद बैंक से होम या ऑटो लोन लेना सस्‍ता हो जाएगा। 
  • बैंक की ओर से बताया गया कि एक साल की MCLR को 8.55 से घटाकर 8.50 फीसदी किया गया है। इसी तरह एक माह की MCLR को भी 8.30 से घटाकर 8.10 फीसदी किया गया है। वहीं अगर तीन महीने और छह महीने की बात करें तो MCLR में 0.10 फीसदी की कटौती की गई है।

MCLR को मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट भी कहते हैं। इसमें बैंक अपने फंड की लागत के हिसाब से लोन की दरें तय करते हैं। ये बैंचमार्क दर होती है। इसके बढ़ने से आपके बैंक से लिए गए सभी तरह के लोन महंगे हो जाते हैं।

  • मार्जिनल का मतलब होता है- अलग से या अतिरिक्त। जब भी बैंक लेंडिंग रेट तय करते हैं, तो वे बदली हुई स्थ‍ितियों में खर्च और मार्जिनल कॉस्ट को भी कैलकुलेट करते हैं। बैंकों के स्तर पर ग्राहकों को डिपॉजिट पर दिए जाने वाली ब्याज दर शामिल होती है। 
  • MCLR को तय करने के लिए चार फैक्टर को ध्यान में रखा जाता है। इसमें फंड का अतिरिक्त चार्ज भी शामिल होता है। निगेटिव कैरी ऑन CRR भी शामिल होता है। साथ ही, ऑपरेशन कॉस्ट औक टेन्योर प्रीमियम शामिल होता है।

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