गोल्ड और टैक्स / सोना खरीदने के तरीके से तय होता है उसे बेचने पर होने वाले कैपिटल गेन पर टैक्स



investment plan in gold by expert
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investment plan in gold by expert

Dainik Bhaskar

May 16, 2019, 12:00 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. जब आप सोना खरीदते हैं तो उस पर आपको तीन फीसदी गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) का भुगतान करना पड़ता है। गहने खरीदने पर यह टैक्स सोने की कीमत और बनवाई दोनों पर लगता है। भारत अपनी जरूरत के लिए बड़ी मात्रा में सोना आयात करता है, इसलिए देश में सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव पर भी निर्भर होती हैं। इनकम टैक्स के नियमों के मुताबिक सोने को बेचने पर होने वाले कैपिटल गेन पर टैक्स लगता है और यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने सोना कैसे खरीदा है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि सोने को बेचते समय उस पर टैक्स कैसे लगता है। मुंबई की केडिया एडवाइजरी के एमडी अजय केडिया से जानते हैं सोने में निवेश से जुड़ी खास बातें

ऐसे समझें गोल्ड में इन्वेसमेंट

  1. गोल्ड म्युचुअल फंड और गोल्ड ईटीएफ 

    गोल्ड ईटीएफ अपने धन को भौतिक सोने में निवेश करते हैं और गोल्ड म्युचुअल फंड गोल्ड ईटीएफ में निवेश करते हैं। गोल्ड म्युचुअल फंड और और गोल्ड ईटीएफ को बेचने से होने वाले लाभ पर भौतिक सोने की ही तरह टैैक्स लगता है। इसमें भी तीन साल तक शॉर्ट टर्म और उसके बाद लाँग टर्म माना जाता है। 

  2. गोल्ड बॉन्ड 

    यह सरकारी प्रतिभूतियां होती हैं, जो साेने के ग्राम के रूप में होती हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो यह भौतिक सोना रखने का विकल्प है। निवेशक भुगतान कर इन बॉन्ड को खरीद लेता है और अवधि पूर्ण होने पर इनके बदले में नगद धन पा लेता है।

    • सरकार की ओर से समय-समय पर रिजर्व बैंक ये बॉन्ड जारी करता है। ये बॉन्ड आठ साल की अवधि के होते हैं, लेकिन पांच साल के बाद इन्हें बेचने का विकल्प होता है। गोल्ड बॉन्ड पर हाेने वाला लाभ टैक्स से मुक्त होता है।
    • इन पर ढाई फीसदी सालाना का ब्याज भी मिलता है, जो हर छह महीने पर आपके बैंक खाते में जमा हो जाता है। इन गोल्ड बॉन्ड पर मिलने वाला यह ब्याज इनकम टैक्स के प्रावधानों के मुताबिक टैक्सेबल होता है, लेकिन इस पर टीडीएस प्रभावी नहीं होता है। 
       

  3. डिजिटल गोल्ड पर टैक्स 

    कई बैंक, फिनटेक और ब्रोकरेज कंपनियां एमएमटीसी के साथ मिलकर अपने एप के जरिए डिजिटल गोल्ड बेचती हैं। इस रूट से निवेशक बहुत छोटी राशि भी सोने में निवेश कर सकता है। डिजिटल गोल्ड से होने वाले कैपिटल गेन पर भी सोने के गहनों और गोल्ड म्युचुअल फंड के समान ही टैक्स की गणना होती है। 

  4. भौतिक सोना (गहने व सिक्के) बेचने पर टैक्स 

    सोना बेचने पर हाेने वाले लाभ पर टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि इसे अल्प अवधि में बेचा जा रहा है या दीर्घ अवधि में। अगर सोना खरीदने की तिथि से तीन साल के भीतर बेचा जा रहा है, तो इसे अल्प अवधि या शॉर्ट टर्म माना जाता है। तीन साल के बाद सोना बेचने को लाँग टर्म या दीर्घ अवधि माना जाता है।

    • शार्ट टर्म कैपिटल गेन को आपकी आय में जोड़ दिया जाता है और उस पर आपके इनकम स्लैब के मुताबिक टैक्स लगता है। जबकि लॉग टर्म गेन में सेस सहित 20.8 फीसदी की दर से टैक्स लगता है, लेकिन साथ ही आपको इंडेक्सेशन का लाभ मिलता। इंडक्सेशन को दूसरे शब्दों में कहें तो यह आपके सोने की खरीद कीमत को महंगाई के आधार पर तय करना होता है। 

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