एक्सपर्ट व्यू / समझकर बनाएं म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो, इसके होते हैं कई फायदे



investment plan in mutual fund by expert
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investment plan in mutual fund by expert

Dainik Bhaskar

Jun 13, 2019, 11:26 AM IST

यूटिलिटी डेस्क. पोर्टफोलियो बनाने के लिए म्यूचुअल फंड सबसे बेहतर रास्ता है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि आप किस तरह अपना म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो तैयार करें। इसके लिए आपको अपने लंबी और मध्यम अवधि के लक्ष्यों को दिमाग में रखना होगा। बिना सोचे-समझे ऐसा करना ठीक नहीं है। यहां पर हम ये छह कदम बता रहे हैं, जिन्हें आपको उठाना चाहिए- 

इन बातों का रखें ध्यान...

  1. सामान्यत: लंबी व मध्यम अवधि के लक्ष्य एक तरह के सपने होते हैं, लेकिन इनकी मात्रा तय होना चाहिए। उदाहरण के लिए एक अच्छा रिटायरमेंट एक सपना है, लेकिन लिए इसके आपको लक्ष्य के तौर पर एक धनराशि तय करनी चाहिए। एक बार आपके सामने आपका बचा कार्यकाल और रिटायरमेंट के समय लक्षित राशि होगी तो अगला कदम ऐसा पोर्टफोलियो बनाना होगा, जिससे आप इस लक्ष्य को पा सकें। ऐसा ही आपके बच्चे की शिक्षा के मामले में होगा। यह एक बड़ा निवेश होगा और इसे पूरा करने के लिए अलग-अलग समय पर धन की उपलब्धता के लिए योजना बनानी होगी। इसके साथ ही होम लोन के लिए मार्जिन मनी की व्यवस्था व विदेश यात्रा के लिए धन जुटाने जैसे मध्यम लक्ष्य भी होंगे। यह आपके निवेश का शुरुआती बिंदु होना चाहिए। 

  2. म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो को इस तरह से तैयार करें कि वे इन लक्ष्यों पर आधारित हों। आपको यह अनुमान भी होना चाहिए कि भविष्य की तिथियों पर आपके लक्ष्य को पाने के लिए कितने धन की जरूरत होगी। आपको यह अंदाज भी होना चाहिए कि आपके लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आपको कितने रिटर्न की जरूरत होगी। (टेबल देखें)। 
     

  3. अपने म्यूचुअल फंड निवेश को कोर और सैटेलाइट में विघटित करें। इसका क्या मतलब है? जैसा कि हमने देखा कि अपने लक्ष्यों को पाने के लिए हमें हर महीने एक ठीक-ठाक राशि की जरूरत होगी। यह हमारा कोर पोर्टफोलियो होगा, क्योंकि इसे तो देना ही है। अगर हमारे पास किसी महीने बोनस या इंसेंटिव के तौर पर कोई अतिरिक्त राशि आ जाती है तो हम उसे कुछ अधिक जोखिम वाले डेब्ट फंडों में निवेश कर सकते हैं, यह सैटेलाइट पोर्टफोलियो है। हमें यह ध्यान रखना है कि कोर निवेश किसी भी दशा में छूटना नहीं चाहिए। इसके अलावा समय-समय पर इसकी समीक्षा भी करते रहें।

  4. आपके जोखिम सहने की क्षमता आपके जोखिम के चाव से अधिक मायने रखती है, क्योंकि इन दाेनों में अंतर है। आपके जोखिम उठाने की क्षमता आपकी उम्र, आपकी आय के स्तर, आपकी संपत्ति, आपकी जिम्मेदारियां और आपके पारिवारिक दायित्वों पर निर्भर करती है। इसे ध्यान में रखकर ही म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो बनाना चाहिए। उदाहरण के लिए एक सेक्टर फंड अच्छा उत्पाद हो सकता है, लेकिन अगर आपकी उम्र 50 साल है और आप जिम्मेदारियों से दबे हुए हैं तो इसके जोखिम को उठाने की क्षमता नहीं है। 
     

  5. कोई भी म्यूचुअल फंड निवेश जोखिम और रिटर्न की अदला-बदली है। इसलिए आपको हमेशा फंड पर मिलने वाले रिटर्न की गणना के साथ ही जाेखिम नियंत्रण के उपाय भी करते रहना चाहिए। अगर कोई फंड मैनेजर 30 फीसदी के स्टैंडर्ड डेविएशन पर 2 फीसदी अधिक रिटर्न दे रहा है तो वह आपके लिए नहीं है। 
     

  6. एक बार बनाया गया पोर्टफोलियो ही हमेशा रहेगा, यह जरूरी नहीं है। आपको अपने कोर पोर्टफोलियो की नियमित तौर पर समीक्षा करके यह देखना चाहिए कि क्या यह आपके लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में है। अगर कोई उत्पाद आपके लिए काम नहीं कर रहा है तो आप अपने कोर पोर्टफोलियो में भी बदलाव कर सकते हैं। सैटेलाइट फंड के बारे में आप इंडस्ट्री में होने वाली गतिविधियों के मुताबिक समीक्षा कर सकते हैं।

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