एक्सपर्ट व्यू / निवेश के पोर्टफोलियो में कमोडिटी के इस्तेमाल में सावधानी की जरूरत



mutual fund; investment plan in mutual fund by expert
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mutual fund; investment plan in mutual fund by expert

Dainik Bhaskar

Jun 20, 2019, 03:02 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. सेबी ने म्यूचुअल फंड कंपनियों को कमोडिटी में निवेश करने की अनुमति दे दी है। वे कमोडिटी से जुड़े स्कीमों की पेशकश कर सकेंगी। इससे रिटेल निवेशकों को बेहतर तरीके से कमोडिटी मार्केट में भाग लेने का रास्ता साफ होगा। इससे पहले सेबी अल्टरनेट इन्वेस्टमेंट फंडों (एआईएफ) को कमोडिटी में निवेश करने की अनुमति दे चुका है। कुछ फंड कमोडिटी मार्केट में खरीद-फरोख्त भी कर रहे हैं। सेबी के अनुमति देने के निवेशकों के लिए क्या मायने हैं? कमोडिटी फंड उनके पोर्टफोलियो में क्या बदलाव ला सकते हैं? आइए इस पर हम एक नजर डाल लें.. 

पिछले कुछ वर्षों के भारी उतार-चढ़ावों को देखें

  1. सबसे पहले महत्वपूर्ण बात यह है कि कमोडिटी मार्केट ने पिछले कुछ वर्षों में भारी उतार-चढ़ाव देखे हैं। एमसीएक्स इंडिया कमोडिटीज इंडेक्स आज भी उसी स्तर पर है जितने पर यह 2011 में था। यानी आठ साल में कमोडिटी मार्केट ने शनू्य रिटर्नदिया है, तो क्या कमोडिटी में निवेश करने का कोई मतलब नहीं है? जहां तक मेरा मानना है सीधे तौर पर ऐसा नहीं जा सकता।

     

    - शेयर या बॉन्ड फाइनेंशियल एसेट्स होते हैं जबकि कमोडिटी एक हार्ड एसेट होती है जिसके अलग-अलग आर्थिक चक्र होते हैं। कई तरह की एसेट क्लास में पैसा लगाने से निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में जोखिम-रिटर्न के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलती है।

     

    - मसलन, 2007 से 2019 के बीच 90% इक्विटी और 10% कमोडिटी वाले पोर्टफोलियो में उतना ही रिटर्नमिला, जितना 100% इक्विटी वाले पोर्टफोलियो में मिला। दो एसेट क्लास में निवेश से उतार-चढ़ाव में कुछ कमी आई। इसलिए कमोडिटी को इसी नजरिए से देखना चाहिए।

     

    - कमोडिटी मार्केट में भले रिटर्न कम मिले, लेकिन इसमें अलग-अलग कमोडिटी में किया निवेश आपके पोर्टफोलियो को मजबूती देता है। कमोडिटी की यह विशेषता म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री द्वारा रिटेल निवेशकों के लिए पेश की जाने वाली स्कीमों में दिख सकती हैं। ज्यादातर संभावना यह है कि कमोडिटी को एसेट एलोकेशन फंड में शामिल किया जा सकता है।

  2. रिटेल निवेशक अल्टरनेट इन्वेस्टमेंट फंडों में निवेश के मौके तलाश सकते हैं। यहां वे न सिर्फ अलग एसेट क्लास में निवेश का उद्शदे्य पूरा कर सकते हैं, बल्कि कमोडिटी में ट्रेडिंग कर मुनाफा भी कमा सकते हैं।

     

    - कमोडिटी ट्रेडिंग में बुनियादी और तकनीकी कारकों का महत्व होता है। इसके मुताबिक अलग-अलग जिंसों में तेजी से खरीद-फरोख्त के सौदे करने की जरूरत होती है। साथ ही शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म का नजरिए की समझ होना भी आवश्यक है। 

  3. वैश्विक स्तर पर कई कमोडिटी एक्सचेंज ट्डेड फंड रे (ईटीएफ) लॉन्च हुए हैं। लेकिन हमारा मानना है कि भारत में ऐसे फंडों को अच्छी तरह सोच-समझ कर बाजार में उतरना चाहिए। अन्यथा वे निवेशकों का ध्यान आकर्षित नहीं कर पाएंगे। एक और बात यह कि निवेशकों को कमोडिटी मार्केट की ज्यादा समझ नहीं है।

     

    - अपने पोर्टफोलियो में कमोडिटी म्यूचुअल फंडों का इस्तेमाल कैसे करना है इसमें उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। संक्प में कहें षे तो कमोडिटी एक ऐसी एसेट क्लास है जो निवेशकों को अच्छा मौका मुहैया करा सकती है। लेकिन निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में इसका कैसे इस्तेमाल करना इसमें सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

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