एक्सपर्ट व्यू / पब्लिक होल्डिंग बढ़ने से शेयर भाव फेयर मार्केट प्राइस के करीब आएंगे



investment plan in share market according to expert
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investment plan in share market according to expert

Dainik Bhaskar

Jul 26, 2019, 11:52 AM IST

यूटिलिटी डेस्क. हाल में पेश बजट की कई घोषणाएं भले बहुत सकारात्मक न रही हो, लेकिन एक प्रस्ताव ने काफी हलचल पैदा की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में कंपनियों में सार्वजनिक शेयरधारिता (पब्लिक शेयरहोल्डिंग) की न्यूनतम सीमा को 25% से बढ़ाकर 35% करने का प्रस्ताव किया है। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने 2010 में एक दिशानिर्देश के तहत कंपनियों के लिए 25% न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग को अनिवार्य किया था। 2014 में यह नियम सरकारी कंपनियों पर भी लागू किया गया। इन कंपनियों को शेयर होल्डिंग में इस परिवर्तन को अपनाने के लिए तीन साल का समय दिया गया था। शेयरहोल्डिंग में इस बदलाव से कुछ कंपनियों पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। आइए कैपिटलव्हाया ग्लोबल रिसर्च लिमिटेड के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग से इसे थोड़ा विस्तार से समझते हैं.. 


एक लिस्टेड कंपनी में दो प्रकार के स्टेकहोल्डर होते हैं - प्रमोटर और पब्लिक यानी आम निवेशक। किसी कंपनी के लिए प्रमोटर वे लोग होते हैं जो कंपनी की स्थापना के समय उसे पूंजी मुहैया कराते हैं। अब तक सेबी ने प्रमोटरों को कंपनी में 65% से अधिक हिस्सेदारी रखने की अनुमति दी है। लेकिन बजट की घोषणा के बाद प्रमोटरों को अब अपनी हिस्सेदारी को घटाकर 65% पर लाना होगा। इस तरह देखें तो प्रमोटरों और संस्थापकों के लिए यह अच्छी खबर नहीं है। लेकिन आम निवेशकों और रिटेल कारोबारियों के लिए यह एक अच्छी खबर है। यह बदलाव होने से सेकेंडरी बाजारों में नकदी की मात्रा अधिक होगी। इससे शेयरों की कीमतों में और सुधार होगा। जितने ज्यादा लोग कंपनी में निवेश करना चाहेंगे उनके शेयर की कीमत उसके उचित बाजार मूल्य (फेयर मार्केट प्राइस) के नजदीक आ जाएगी। नए नियम के पालन में कंपनियों के प्रमोटरों अपनी अपनी हिस्सेदारी घटाकर 65% पर लाने के लिए 39,000 करोड़ रुपए के शेयर बेचने पड़ेंगे। 


होल्डिंग की नई सीमा से 1,400 कंपनियां प्रभावित होंगी 
1,400 लिस्टेड कंपनियां ऐसी हैं जिनमें प्रमोटरों की शेयरहोल्डिंग बजट प्रस्ताव के मानदंड के अनुरूप नहीं हैं। इन कंपनियों को जल्द ही बदलाव करने होंगे। इनमें से 14 मल्टीनेशनल कंपनियां ऐसी भी हैं जो निफ्टी एमएनसी इंडेक्स का हिस्सा हैं। उन्हें करीबन 2-10% की सीमा में अपने प्रमोटर की हिस्सेदारी को बेचना या कम करना होगा। 

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