राहत / नियमों में बदलाव से म्यूचुअल फंडों में निवेश करना सस्ता

Dainik Bhaskar

May 16, 2019, 03:56 PM IST


investment tips in mutual fund by expert
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investment tips in mutual fund by expert

यूटिलिटी डेस्क. पिछले एक साल में पूंजी बाजार नियामक सेबी ने म्यूचुअल फंड सेक्टर में पारदर्शिता लाने के लिए नियमों में कई बदलाव किए हैं। इनमें से हाल के दो-तीन नियम निवेशकों के लिहाज से फायदेमंद हैं। निवेश के लिए म्यूचुअल फंड जितना पारदर्शी साधन है, उतना कोई और नहीं है। एम्फी के मुताबिक मार्च 2018 तक म्यूचुअल फंड कंपनियां 22.71 लाख करोड़ रुपए का एसेट का प्रबंधन (एयूएम) कर रही थीं। सालभर में यानी मार्च 2019 तक इसका आंकड़ा 8% बढ़कर 24.58 लाख करोड़ रु. तक पहुंच चुका है। पैंटोमैथ एडवाइजरी सर्विसेज ग्रुप के एमडी महावीर लुनावत से जानते हैं, इससे जुड़ी खास बातें...

इससे जुड़ी खास बातें

  1. सेबी ने एजेंटों के कमीशन सीमा की तय

    निवेशकों के लिए अच्छा यह है कि एक अप्रैल से इक्विटी केंद्रित म्यूचुअल फंडों में निवेश सस्ता हो गया है क्योंकि सेबी ने एजेंटों के कमीशन सीमा तय कर दी है। म्यूचुअल फंड कंपनियां पैसे का प्रबंधन के लिए निवेशकों से फीस लेती हैं। इसे कुल खर्च अनुपात (टीईआर) कहा जाता है।

    • नए नियमों के मुताबिक जैसे-जैसे म्यूचुअल फंड का एयूएम (असेट अंडर मैनेजमेंट) बढ़ता जाएगा वैसे-वैसे उसका टीईआर कम होता जाएगा। निवेशकों को ज्यादा लाभ चाहिए तो उन्हें बड़ी इक्विटी स्कीमों पर फोकस करना होगा। क्योंकि छोटे एयूएम वाली स्कीमों के लिए निवेशकों को ज्यादा कमीशन का भुगतान करना होगा, जो फंड वितरकों की जेब में जाएगा।
    • नए नियम के मुताबिक 2,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की एसेट वाले वाले इक्विटी फंड का टीईआर घटेगा। 2,000 करोड़ से कम एसेट वाले फंडों का टीईआर पहले की तरह बना रहेगा। यानी जो निवेशक पहले 2% टीईआर दे रहे थे। उन्हें अब 1.72-1.75% ही खर्च करना होगा। 

  2. अब एजेंटों को नहीं मिलेगा एडवांस कमीशन

    दूसरा बड़ा बदलाव यह है कि किसी फंड में निवेश पर एजेंटों को जो एडवांस कमीशन मिलता था, उसे पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। यानी एजेंटों को अब सिर्फ ट्रेल कमीशन मिलेगा। जब तक किसी फंड में रकम लगी रहती है, तब तक वितरकों को कमीशन पर मिलने वाली 1%-2% रकम को ट्रेल कमीशन कहा जाता है। यह बड़ा बदलाव है।

    • जब कोई निवेश करता है, तो इसमें मदद करने वाले डिस्ट्रीब्यूटर को निवेश की कुल रकम का 1%-2% हिस्सा कमीशन के रूप में मिलता था। यही एडवांस कमीशन कहलाता था। ऐसे में डिस्ट्रीब्यूटर की दिलचस्पी इसमें बनी रहती थी कि किसी तरह लेनदेन पूरा हो जाए। यानी एक ही निवेशक से बार-बार कमीशन हासिल करने के चक्कर में फंड डिस्ट्रीब्यूटर कोशिश करता था निवेश की रकम से एक से दूसरे फंड में लेनदेन होता रहे।

  3. स्कीमों का वर्गीकरण निवेशकों के लिए भी अच्छा कदम

    इसी तरह, सेबी ने म्यूचुअल फंड हाउसों को री-कैटेगराइजेशन के नियमों को लागू करने का आदेश दिया है। इसका अर्थ यह है कि फंड कंपनियों को लार्ज कैप फंड में मिड कैप कंपनियों की संख्या को 20% तक सीमित करना है। इससे पहले कई फंड हाउस के इक्विटी लार्ज कैप फंड में मिड कैप कंपनियों में निवेश 40-50% तक था।

    • स्कीमों का वर्गीकरण निवेशकों के लिए भी अच्छा कदम है। अब निवेशक म्यूचुअल फंड स्कीम की विशेषताओं को समझने और तुलना करने के लिए बेहतर स्थिति में होंगे। देश में 2.62 करोड़ निवेशक एसआईपी से म्यूचुअल फंडों में निवेश कर रहे हैं। एम्फी के मुताबिक बीते वर्ष हर माह 9.13 लाख एसआईपी खाते नए जुड़े हैं। 

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