एक्सपर्ट एडवाइस / रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए कछुए की जगह खरगोश बनना बेहतर, इससे बुढ़ापे में नहीं झेलनी पड़ेगी गरीबी

It is better to be a rabbit than a turtle for retirement planning
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It is better to be a rabbit than a turtle for retirement planning

Dainik Bhaskar

Dec 02, 2019, 12:18 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. बचपन में हम सबने खरगोश और कछुए की कहानी सुनी है। इससे हम सीखते हैं कि धीमा लेकिन निरंतरशील रहने से जीत मिलती है। अपने काम में इस सिद्धांत को अपनाने की सीख दी जाती है। लेकिन क्या यह जीवन के सबसे अहम लक्ष्यों में से एक यानी रिटायरमेंट के मामले में लागू होता है? उन्नत मेडिकल सुविधाओं की मदद से लगातार बढ़ती जीवन प्रत्याशा दर के कारण रिटायरमेंट लाइफ 15-20 साल या इससे ज्यादा लंबी हो सकती है।


इसलिए यह काफी महत्वपूर्ण हो जाता है कि रिटायरमेंट के बाद के लिए हमारे हमारी तैयारी अच्छी हो। सबसे जरूरी है कि यह महंगाई दर को मात दे सके। ऐसी स्थिति में हमें कछुआ नहीं बल्कि तेज दौड़ने वाला खरगोश बनने की जरूरत है। इससे आप अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए ज्यादा जोखिम लेते हुए इक्विटी में निवेश कर पाएंगे। इसके उलट आप अगर फिक्स डिपॉजिट जैसे तरीके अपनाकर कछुए की रणनीति पर चलेंगे तो लक्ष्य से दूर तो रहेंगे ही साथ ही बुढ़ापे में गरीबी भी झेलनी पड़ सकती है।

प्लानिंग के लिए एसेट एलोकेशन में डेट की भूमिका अहम

  1. महंगाई दर से रकम की वैल्यू कम होती है

    पेंशन की मदद से रिटायरमेंट के बाद की जिम्मेदारियों को पूरा करना अब पुरानी बात हो चुकी है। इसलिए जरूरी है कि आप इतना फंड तैयार करें जिससे रिटायमेंट के बाद जीवन बोझ न लगे। महंगाई दर आपकी रकम की वैल्यू को कम करती है। जितनी राशि आज पर्याप्त लगती है मुमकिन है कि कल वह आपकी जरूरतें पूरी न कर सकें। उदाहरण के लिए अगर अभी आपका मासिक खर्च 30 हजार रुपए है और महंगाई दर महज 3% रहती है तो 30 साल साल बाद हर महीने आपको 60 हजार रुपए की जरूरत पड़ेगी।


    रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए एसेट एलोकेशन में डेट की भूमिका अहम है लेकिन यह तब जरूरी है जब आप रिटायरमेंट के नजदीक पहुंच जाते हैं। लेकिन शुरुआती दिनों में अपने निवेश को लेकर आक्रामक रुख बेहतर डिविडेंड देता है। उदाहरण के तौर पर मल्टीकैप फंडों का 15 साल का इनफ्लेशन समायोजित सीएजीआर 10.16% होता है। वहीं ईपीएफ और पीपीएफ का क्रमशः 2.26% और 1.7% है। यह गैप रिटायरमेंट फंड में बड़ा अंतर पैदा कर सकता है। साथ ही अगर आप समय से पहले रिटायमेंट की प्लानिंग कर रहे हैं तो आपके पास निवेश में आक्रामक रहने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।

  2. एफडी का महत्व दूसरे लक्ष्यों के लिए ज्यादा

    तो क्या हमें बैंक एफसी, एनसीडी और पीपीएफ की पूरी तरह से उपेक्षा कर देनी चाहिए। ये भी अहम हैं लेकिन इनकी अहमियत अन्य लक्ष्यों मसलन कार खरीदने, घर के लिए डाउनपेंमेंट करने या छुट्टी मनाने आदि में ज्यादा है। रिटायरमेंट प्लानिंग इनसे अलग मुद्दा है। इसमें हमें रिटायरमेंट के बाद के अपने जीवन काल का अनुमान लगाना पड़ता है। इतना तय है कि रिटायमेंट के बाद खर्च बढ़ेंगे। इससे पार पाने का सबसे अच्छा तरीका आक्रामक निवेश है। अंत में यही कहा जा सकता है कि खरगोश भले ही कहानी में कछुए से हार गया हो लेकिन अगर रिटायरमेंट के बाद के जीवन के लिए फंड जुटाना है तो खरगोश का अप्रोच ज्यादा उचित है। इससे आप रिटायरमेंट के बाद तनावमुक्त जीवन जी पाएंगे।

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