डेट मार्केट / 2-3 साल के कॉरपोरेट बॉन्ड सेगमेंट में निवेश करना बेहतर



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Jul 13, 2019, 01:12 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. डेट या बॉन्ड मार्केट एक ऐसा वित्तीय बाजार है, जहां ऋण प्रतिभूतियां (डेट सिक्युरिटीज) जारी की जाती हैं। इसे प्राइमरी मार्केट के रूप में जाना जाता है जबकि सेकंडरी मार्केट में डेट सिक्युरिटीज की खरीद-फरोख्त होती है। डेट मार्केट में मुख्य रूप से सरकार द्वारा जारी की गई प्रतिभूतियां और कॉरपोरेट ऋण प्रतिभूतियां शामिल हैं। पिछले 9-12 महीनों के दौरान डेट मार्केट में ब्याज दरों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 


कुछ कंपनियों के डिफॉल्ट करने और तेज डाउनग्रेड के अलावा रेगुलेटर और सरकार की ओर से खासा हस्तक्षेप देखने को मिला। लेकिन हमारा मानना है कि डेट मार्केट में कमजोरी के दौर अब खत्म होने के करीब है। बाजार ने नियामक व सरकार के हस्तक्षेप को सकारात्मक रूप से लिया और इसने सितंबर 2018 से पहले की समान्य स्थिति में आना शुरू किया है। 


भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत मजबूत बनी हुई है। इसके कर्ज की स्थिति बिगड़ते नहीं दिख रही। हालांकि आर्थिक सूचक सुस्ती आने की ओर इशारा कर रहे हैं। पिछले छह महीनों में रिजर्व बैंक रेपो रेट में 0.75% की कटौती कर चुका है। आरबीआई ने ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों और ट्रेजरी बिल की खरीदारी कर काफी मात्रा में नकदी बाजार में डाली है। 


बड़ी एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां सितंबर 2018 में आईएलएंडएफएस संकट उभरने से पहले की तरह नकदी हासिल करने में समर्थ हैं। बाजार में नकदी पर्याप्त मात्रा में बनी रहे और पूंजी बाजारों में मजबूती के लिए सरकार और रिजर्व बैंक मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने जरूरत के मुताबिक नियमों में बदलाव भी किए हैं। मौजूदा परिदृश्य में 2-3 साल के कॉरपोरेट बॉन्ड सेगमेंट में निवेश करना बेहतर रहेगा। ऐसे निवेशक जो क्रेडिट रिस्क को समझते हैं और उन्हें शॉर्ट टर्म के उतार-चढ़ाव से कोई हर्ज नहीं, वे हाईली डाइवर्सिफाइड एए ओरिएंटेड क्रेडिट फंड्स में निवेश कर सकते हैं। 


आरबीआई ने 3 लाख करोड़ की नकदी बैंकिंग में डाली है 
रिजर्व बैंक ने पिछले नौ महीनों में ओएमओ के जरिए तीन लाख करोड़ रुपए की नकदी बैंकिंग तंत्र में डाली है। रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीति को उदार करने और सरकारी बैंकों द्वारा कर्ज बांटने की रफ्तार बढ़ाने से विपरीत माहौल में अर्थव्यवस्था को टिकाऊ बने रहने में मदद मिली है। 
 

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