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फ़ायदे का सौदा / एसआईपी में कम जोखिम के साथ मिलता है बेहतर रिटर्न, इनकम का 15% निवेश है अच्छा विकल्प



Danik Bhaskar | Sep 16, 2018, 04:25 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. जहां एक ओर हमारी ज़रूरतों की सूची तेज़ी से बढ़ रही है, वहीं हम चाहते हैं कि निवेश पर अधिक से अधिक रिटर्न मिले। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए एसआईपी फ़ायदे का सौदा साबित हो सकता है। जीवन बीमा, एफडी या भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों की पूर्ति को सुनिश्चित करने वाले सभी प्लान पर्सनल फाइनेंस के तहत आते हैं। एसआईपी भी इसी का एक हिस्सा है।

 

अर्थशास्त्र में एक सिद्धांत है कि जितना अधिक जोखिम होगा फ़ायदे के अवसर भी उतने ही अधिक होंगे, लेकिन हर व्यक्ति अधिक जोखिम नहीं ले सकता। साथ ही सुरक्षा भी तो महत्वपूर्ण बिंदु है। पैसा सुरक्षित रहकर बेहतर रिटर्न दे इसके लिए एसआईपी एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार एवं वित्त विश्लेषक बी.के. झा एसआईपी के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।

एसआईपी और निवेश से जुड़ी सावधानियां

  1. एसआईपी की अवधारणा

    यह शेयर बाज़ार आधारित प्लान है। शेयर के उतार-चढ़ाव का जोखिम यहां भी है लेकिन न्यूनतम। इसमें रिटर्न निश्चित होता है जो इसे दूसरे विकल्पों से बेहतर बनाता है। यह एक सिस्टमेटिक यानी व्यवस्थित निवेश योजना है। इसमें एकमुश्त राशि के बजाय हर महीने पैसा जमा किया जाता है। हमारी मासिक आय का एक चौथाई यानी 25 प्रतिशत भाग बचत के लिए होना चाहिए। इसमें से 10-15 प्रतिशत एसआईपी में निवेश करना बेहतर विकल्प है।

  2. कॅरियर की शुरुआत में लेना सबसे सही

    किसी भी उम्र में यह प्लान लिया जा सकता है, लेकिन कॅरियर की शुरूआत में एसआईपी लेना सबसे उपयुक्त है क्योंकि युवावस्था में पैसे की फिज़ूलख़र्ची अधिक होती है। इसलिए भविष्य की योजनाओं के लिए एसआईपी अच्छा विकल्प है। न्यूनतम 500 रूपए हर महीने इनवेस्ट करके एसआईपी शुरू किया जा सकता है।

  3. बरतें सावधानी

    चूंकि यह शेयर बाज़ार पर आधारित है, इसलिए सही कम्पनी का चुनाव आवश्यक है। किसी कम्पनी को चुनने से पहले उसके बारे में थोड़ी-जांच पड़ताल कर लें। यह भी देखें कि कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में कितना रिटर्न दिया है। संभव हो तो जिन लोगों ने उस कम्पनी के माध्यम से पैसा निवेश किया है उनसे भी सलाह मशवरा करें। इसके अलावा निवेश करने से पहले किसी वित्त विशेषज्ञ से सलाह भी ले सकते हैं।

  4. इन बातों का ध्यान रखें

    • इसमें फिक्स डिपॉज़िट की तरह एक निश्चित राशि में रिटर्न नहीं मिलता। यह शेयर बाज़ार में होने वाले उतार-चढ़ाव पर आधारित होता है, हालांकि दूसरी वित्तीय योजनाओं के मुक़ाबले अधिक रिटर्न की संभावना इसमें होती है।
    • हर कंपनी की अलग-अलग शर्तें होती हैं। कुछ कंपनियां टैक्स सेविंग का विकल्प भी देती हैं। इसलिए बेहतर है कि पहले योजना से सम्बंधित सभी दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें और किसी भी तरह की शंका होने पर पहले ही सलाहकार से पूछकर दूर कर लें।

  5. म्युचुअल फंड का है एक भाग

    शेयर बाज़ार में पैसा दो तरीके से निवेश किया जा सकता है। पहला डायरेक्ट तरीका होता है, जिसमें सीधे किसी भी कंपनी के शेयर ख़रीदकर मर्जी से किसी भी समय बेच सकते हैं। दूसरा होता है कि किसी वित्तीय सलाहकार की मदद से सही समय देखकर और नपा-तुला जोखिम लेकर पैसा लगाएं। यही दूसरा तरीका ही म्युचुअल फंड है। म्युचुअल फंड की सुविधा देने वाली कंपनी अपने और अपने ग्राहकों का लाभ देखकर पैसा बाज़ार में निवेश करती है। इसके लिए कंपनी शेयर बाज़ार और वित्त विशेषज्ञों की मदद लेती है।

  6. एसआईपी की अवधारणा

    यह शेयर बाज़ार आधारित प्लान है। शेयर के उतार-चढ़ाव का जोखिम यहां भी है लेकिन न्यूनतम। इसमें रिटर्न निश्चित होता है जो इसे दूसरे विकल्पों से बेहतर बनाता है। यह एक सिस्टमेटिक यानी व्यवस्थित निवेश योजना है। इसमें एकमुश्त राशि के बजाय हर महीने पैसा जमा किया जाता है। हमारी मासिक आय का एक चौथाई यानी 25 प्रतिशत भाग बचत के लिए होना चाहिए। इसमें से 10-15 प्रतिशत एसआईपी में निवेश करना बेहतर विकल्प है।

  7. कॅरियर की शुरुआत में लेना सबसे सही

    किसी भी उम्र में यह प्लान लिया जा सकता है, लेकिन कॅरियर की शुरूआत में एसआईपी लेना सबसे उपयुक्त है क्योंकि युवावस्था में पैसे की फिज़ूलख़र्ची अधिक होती है। इसलिए भविष्य की योजनाओं के लिए एसआईपी अच्छा विकल्प है। न्यूनतम 500 रूपए हर महीने इनवेस्ट करके एसआईपी शुरू किया जा सकता है।

  8. बरतें सावधानी

    चूंकि यह शेयर बाज़ार पर आधारित है, इसलिए सही कम्पनी का चुनाव आवश्यक है। किसी कम्पनी को चुनने से पहले उसके बारे में थोड़ी-जांच पड़ताल कर लें। यह भी देखें कि कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में कितना रिटर्न दिया है। संभव हो तो जिन लोगों ने उस कम्पनी के माध्यम से पैसा निवेश किया है उनसे भी सलाह मशवरा करें। इसके अलावा निवेश करने से पहले किसी वित्त विशेषज्ञ से सलाह भी ले सकते हैं।

  9. इन बातों का ध्यान रखें

    • इसमें फिक्स डिपॉज़िट की तरह एक निश्चित राशि में रिटर्न नहीं मिलता। यह शेयर बाज़ार में होने वाले उतार-चढ़ाव पर आधारित होता है, हालांकि दूसरी वित्तीय योजनाओं के मुक़ाबले अधिक रिटर्न की संभावना इसमें होती है।
    • हर कंपनी की अलग-अलग शर्तें होती हैं। कुछ कंपनियां टैक्स सेविंग का विकल्प भी देती हैं। इसलिए बेहतर है कि पहले योजना से सम्बंधित सभी दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें और किसी भी तरह की शंका होने पर पहले ही सलाहकार से पूछकर दूर कर लें।

  10. म्युचुअल फंड का है एक भाग

    शेयर बाज़ार में पैसा दो तरीके से निवेश किया जा सकता है। पहला डायरेक्ट तरीका होता है, जिसमें सीधे किसी भी कंपनी के शेयर ख़रीदकर मर्जी से किसी भी समय बेच सकते हैं। दूसरा होता है कि किसी वित्तीय सलाहकार की मदद से सही समय देखकर और नपा-तुला जोखिम लेकर पैसा लगाएं। यही दूसरा तरीका ही म्युचुअल फंड है। म्युचुअल फंड की सुविधा देने वाली कंपनी अपने और अपने ग्राहकों का लाभ देखकर पैसा बाज़ार में निवेश करती है। इसके लिए कंपनी शेयर बाज़ार और वित्त विशेषज्ञों की मदद लेती है।