रिवर्स मॉरगेज / बुढ़ापे के लिए वरदान है यह स्कीम, बैंक से मिलती रहेगी एक निश्चित रकम



what is reverse mortgage scheme and how it will benefited to senior citizen
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what is reverse mortgage scheme and how it will benefited to senior citizen

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2019, 12:15 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. दुनिया में लोगों की औसत आयु में बढ़ोतरी एक सुखद खबर है, लेकिन लंबी आयु में चिंता मुक्त जीवन के लिए धन का प्रबंध भी आवश्यक है। सरकार ने सीनियर सिटीजन को इस दिशा में मदद के लिए अनेक योजनाएं शुरू की हैं। इनमें एक रिवर्स मॉरगेज है। रिवर्स मॉरगेज को अगर साधारण शब्दों में समझाएं तो यह ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें आप अपने मॉरगेज (गिरवी) घर में रहते हैं और संबंधित बैंक से अपने जीवन यापन के लिए एक निश्चित राशि नियमित अवधि पर पाते रहते हैं। ऋण लेने वाले व्यक्ति की मौत के बाद यह संपत्ति बैंक की हो जाती है।

ऐसे काम करता है रिवर्स मॉरगेज

  1. जिस संपत्ति को गिरवी (मॉरगेज) रखना होता है बैंक उसकी मौजूदा कीमत की गणना करता है। इसमें मौजूदा संपत्ति दरों के साथ ही मांग व संपत्ति की स्थिति को भी देखा जाता है। कीमतों में उतार-चढ़ाव और ब्याज की गणना करके बैंक लोन की राशि तय करते हैं, जो किश्तों के रूप में तय अवधि में दी जाती है। इसे आप रिवर्स ईएमआई भी कह सकते हैं। हर पेमेंट के साथ संबंधित व्यक्ति की अपने घर पर इक्विटी कम होती जाती है। इस तरह का लोन उन बुजुर्ग लोगों के लिए आदर्श है जिनकी संपत्ति गिरवी रखी जा सकती हो और उन्हें नियमित आय की जरूरत हो।

  2. पात्रता की शर्तें

    • गृह स्वामी की उम्र 60 साल से अधिक होनी चाहिए। यदि पति-पत्नी दोनों संयुक्त आवेदक हैं तो उनकी उम्र 58 साल से अधिक होनी चाहिए।
    • रिवर्स मॉरगेज के लिए देश में स्थित घर या फ्लैट आवेदक के नाम पर होना चाहिए और उसका उसमें रहना जरूरी है।
    • इस संपत्ति पर कोई कानूनी विवाद नहीं होना चाहिए और इसमें कोई अवैध निर्माण भी नहीं होना चाहिए। 
    • यह संपत्ति ऋण लेने वाले का स्थायी मूल निवास होना चाहिए।

  3. रिवर्स मॉरगेज के लिए नियम

    • आवासीय संपत्ति की कीमत के 60 फीसदी के बराबर ही अधिकतम लोन राशि होगी।
    • मॉरगेज का न्यूनतम समय 10 साल और अधिकतम 15 साल ही होगा। हालांकि, कुछ बैंक 20 साल की अवधि का भी प्रस्ताव कर रहे हैं।
    • लोन का भुगतान एकमुश्त, मासिक, त्रैमासिक या वार्षिक आधार पर भी किया जा सकता है। 
    • हर 5 साल के बाद ऋणदाता द्वारा संपत्ति का पुनर्मूल्यांकन कराया जाएगा। यदि इसकी कीमत बढ़ती है तो लोन की राशि में बढ़ोतरी की जाएगी और बढ़ी हुई राशि एकमुश्त दी जा सकती है।
    • रिवर्स मॉरगेज से मिलने वाली राशि टैक्स से पूरी तरह मुक्त होती है, क्योंकि यह इनकम न होकर एक ऋण के रूप में मिलती है।

  4. सेटलमेंट के प्रावधान

    अगर ऋण लेने वाले की मौत हो जाए या बीच में वह इस घर को बेचना चाहे तो रिवर्स मॉरगेज का लोन देना होगा। बैंक सबसे पहले संबंधित व्यक्ति के निकटतम परिजन को घर बेचे बिना ब्याज के साथ लोन की रकम चुकाने का विकल्प देता है। यदि वह ऐसा नहीं कर पाता तो बैंक इस घर को बेचकर अपना लोन और ब्याज वसूलता है। यदि सभी खर्चों को काटकर कोई राशि बचती है तो वह लोन लेने वाले के निकटतम परिजन को दे दी जाती है। वहीं अगर यह राशि कम होती है तो उसे बैंक ही वहन करता है।

  5. अन्य प्रमुख बातें

    • यदि ऋण लेने वाला इसे समय से पहले चुकाना चाहता है तो वह बिना अतिरिक्त शुल्क के इसे चुका सकता है। 
    • यदि ऋण की अवधि पूरी हो जाती है तो भी ऋण लेने वाला इस घर में रह सकता है। हालांकि उसको मिलने वाली रकम बंद हो जाएगी।
    • पति या पत्नी में से किसी की मौत होने पर भी दूसरा इस घर में रह सकता है। उसकी मौत के बाद ही सेटलमेंट होगा।

  6. इन स्थितियों में लोन रुक सकता है

    • अगर ऋण लेने वाला लगातार एक साल तक इस घर में न रहे। 
    • अगर घर का बीमा न कराया जाए या संपत्ति कर न दिया जाए। 
    • अगर वह दिवालिया हो जाए अथवा घर को दान कर दे या इसे छोड़ दे। 
    • अगर घर को पूरा या आंशिक तौर पर किराए पर दे। 
    • घर के मालिकाना हक में किसी अन्य को शामिल करे।

    नोट: निवेशकों को जोखिम लेने की क्षमता, रिटर्न, लिक्विडिटी और टैक्सेशन पर पूरी तरह सोच-विचार करने के बाद ही निवेश का फैसला करना चाहिए। 

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